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सिरमौर ! पिछले लगभग चार दिनो से क्षैत्र की ऊची चोटियों पर हो रहै हिमपात व निचले क्षैत्रो मे लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा से जहां पूरा जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है ! वही किसानो व बागवानो के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है यहा पिछले चार दिनो से मौसम कडे तेवर दिखा रहा है तेज शीत लहरे चल रही है जिससे तापमान मे भारी गिरावट दर्ज की जा रही है ! मौसम की बेरुखी की सबसे अधिक मार किसानो व बागवानो पर पड रही है इस बार सर्दी के मौसम मे हुई पर्याप्त बारिश व स्नौफाल से किसान बागवान काफी खुश थे मगर अब मौसम के बदले मिजाज से किसानो व बागवानो के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है मौसम के बदले तैवर के कारण यहा स्टोन फ्रुट जिसमे राजगढ का ऐशिया प्रसिद्ध आडू ,पलम ,खुमानी शामिल है पल संकट के बादल छा गये है इन दिनो इन फलो का फलावरिंग का समय है पर तापमान मे भारी गिरावट के कारण फलावरिंग नही हो पा रही है तो फलो की सैटिग नही हो पाएगी यहा पूरे क्षैत्र मे हजारो टन गुठलीदार फलो का उत्पादन होता है मगर इस वर्ष यह शून्य तक जा सकता है ! इसी प्रकार सैब एवं नाशपाती की फसल पर भी अब संकट के बादल मंडराने लगे है अगर यहा की प्रमुख नकदी फसले लहसुन ,आलू ,मटर की बात करे तो उनमे भी अधिक वर्षा व तापमान मे भारी कमी के कारण सडन रैग लग गया है और फसले 90 प्रतिशत तक तबाह हो सकती है हैरानी का विषय तो यह है कि यहा इस वर्षा के कारण बरसात का मौसम बन गया है क्षैत्र मे बहने वाले नदी नाले उफान पर है
सिरमौर ! पिछले लगभग चार दिनो से क्षैत्र की ऊची चोटियों पर हो रहै हिमपात व निचले क्षैत्रो मे लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा से जहां पूरा जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है ! वही किसानो व बागवानो के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है यहा पिछले चार दिनो से मौसम कडे तेवर दिखा रहा है तेज शीत लहरे चल रही है जिससे तापमान मे भारी गिरावट दर्ज की जा रही है !
मौसम की बेरुखी की सबसे अधिक मार किसानो व बागवानो पर पड रही है इस बार सर्दी के मौसम मे हुई पर्याप्त बारिश व स्नौफाल से किसान बागवान काफी खुश थे मगर अब मौसम के बदले मिजाज से किसानो व बागवानो के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है मौसम के बदले तैवर के कारण यहा स्टोन फ्रुट जिसमे राजगढ का ऐशिया प्रसिद्ध आडू ,पलम ,खुमानी शामिल है पल संकट के बादल छा गये है इन दिनो इन फलो का फलावरिंग का समय है पर तापमान मे भारी गिरावट के कारण फलावरिंग नही हो पा रही है तो फलो की सैटिग नही हो पाएगी यहा पूरे क्षैत्र मे हजारो टन गुठलीदार फलो का उत्पादन होता है मगर इस वर्ष यह शून्य तक जा सकता है !
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इसी प्रकार सैब एवं नाशपाती की फसल पर भी अब संकट के बादल मंडराने लगे है अगर यहा की प्रमुख नकदी फसले लहसुन ,आलू ,मटर की बात करे तो उनमे भी अधिक वर्षा व तापमान मे भारी कमी के कारण सडन रैग लग गया है और फसले 90 प्रतिशत तक तबाह हो सकती है हैरानी का विषय तो यह है कि यहा इस वर्षा के कारण बरसात का मौसम बन गया है क्षैत्र मे बहने वाले नदी नाले उफान पर है
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