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बददी ! प्रभु श्रीराम के विशाल व भव्य राम मंदिर के निर्माण के शिलान्यास की घडी जैसे जैसे नजदीक आ रही है तो राम भक्तों में उत्साह बढता जा रहा है। सबसे ज्यादा खुशी उन राम भक्तों को हो रही है जिन्होने हिमाचल से अयोध्या पहुंच कर विवादित बाबरी मस्जिद के गिराने के लिए यात्रा की थी। जब बददी के युवा राजेश जिंदल यहां से निकले तो वह यह सोच कर गए थे कि वो इस संघर्ष में भाग लेंगे चाहे उनकी जान चली जाए। आजकल बददी में अपना उद्योग चलाकर सामाजिक जनकल्याण कार्यों में जुटे हिंदू कार्यकर्ता राजेश जिंदल उर्फ राजू भैया ने उस दौर को याद करते हुए अपने कई संस्मरण याद किए। उन्होने कहा कि जब मैं पहली बार राम की नगरी अयोध्या के लिए रवाना हुआ तो 18 दिन उन्नाव की सेंट्रल जेल में बिताए थे । हमें लखनऊ के चार बाग रेलवे स्टेशन से पकडा गया था और उन्नाव जेल में शिफ्ट कर दिया गया था जहां से 7 नवम्बर 1990 को हमें छोडा गया था । हमारी गिरफ्तारी 19 अक्तूबर को हुई थी , हम छूटने के बाद सीधे अयोध्या पहुंचे वहां बाबरी ढांचा था उसमें राम लला की मूर्ति थी । सख्त पहरा था वहां दर्शन करके हनुमान गढी गए और दोपहर का भोजन वहां किया । राजू भैया ने बताया कि इसके पश्चात हम सरयू नदी गए , वहां तट पर लगभग 4 कारसेवकों का अंतिम संस्कार हो रहा था । हम जब नहाने लगे तो एक बोरी में बंद शहीद कारसेवक की मृत देह पर हमारे एक साथी कारसेवक का पैर पडा । हमने उस बोरी को खींचकर बाहर निकाला , उसे बालों से ऊपर से बांधा हुआ था जब बोरी को खोला गया तो एक 35-36 वर्ष के कारसेवक की गली हुई देह देखकर हम सबकी आखों से अश्रु धारा बह निकली । जाने कितनी देर तक तट पर बैठे हम सब लोग जोर जोर से रोते रहे , फिर नम आंखों से उनका अंतिम संस्कार किया। 2 नवम्बर 1990 को हुए भीषण हत्याकांड में मुलायम सरकार ने सैंकडो रामभक्तों की बलि ले ली थी , आज राम मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त को हो रहा है , जैसे उन हुतात्मा कारसेवकों के अमर बलिदान पर अब सच्चे श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाएंगे । राजू भैया ने कहा कि ऐसे पावन अवसर पर मैं लाल कृष्ण आडवाणी जी , साध्वी ऋतंभरा जी और उमा भारती जी , अशोक जी सिंहल , कल्याण सिंह जी , विश्व हिंदू परिषद , विश्व के सबसे बडे स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ , प्रधानमंत्री मोदी जी , यू.पी के सीएम योगी जी को हृदय से नमन करता हूं । उन्होने कहा कि दूसरी बार ढांचा तोड दिया गया और बाबरी कंलक से मुक्ति मिल गई थी पर उन शहीद कारसेवकों की जब याद आती है आज भी रोम रोम जल उठता है और आत्मा तक रो पडती है। आस्था का प्रश्न था मंदिर- राजेश जिंदल ने कहा कि भगवान राम का 5 अगस्त से मंदिर निर्माण का काम शुरु हो रहा है उसमें हिंदू संगठनों व कार्यकर्ताओं ने सैंकडों ने बलिदान दिया है। उन्होने कहा कि यह एक साधारण मंदिर नहीं बल्कि रामलल्ला का जन्म स्थान है। यह सौ करोड से ज्यादा हिंदूओं की आस्था का प्रश्न था। और हम लॉकडाऊन के कारण अगर अयोध्या नहीं जा पाएंगे तो अपने अपने घरों में देसी घी के दिए जलाएंगे। आज संपूर्ण हिंदू समाज स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। हमें लगता है हमने भगवान राम के लिए जेलों में जो वनवास काटा था वो आज सफल हो गया और हमारे आराध्य देव आज विराजमान होने वाले हैं। विवादित ढांवे को विंध्वस करने के साक्षी रहे बददी के राम भक्त राजेश जिंदल ऊर्फ राजू भैया जो कि उन्नाव जेल में रहे चुके हैं।
बददी ! प्रभु श्रीराम के विशाल व भव्य राम मंदिर के निर्माण के शिलान्यास की घडी जैसे जैसे नजदीक आ रही है तो राम भक्तों में उत्साह बढता जा रहा है। सबसे ज्यादा खुशी उन राम भक्तों को हो रही है जिन्होने हिमाचल से अयोध्या पहुंच कर विवादित बाबरी मस्जिद के गिराने के लिए यात्रा की थी। जब बददी के युवा राजेश जिंदल यहां से निकले तो वह यह सोच कर गए थे कि वो इस संघर्ष में भाग लेंगे चाहे उनकी जान चली जाए। आजकल बददी में अपना उद्योग चलाकर सामाजिक जनकल्याण कार्यों में जुटे हिंदू कार्यकर्ता राजेश जिंदल उर्फ राजू भैया ने उस दौर को याद करते हुए अपने कई संस्मरण याद किए। उन्होने कहा कि जब मैं पहली बार राम की नगरी अयोध्या के लिए रवाना हुआ तो 18 दिन उन्नाव की सेंट्रल जेल में बिताए थे । हमें लखनऊ के चार बाग रेलवे स्टेशन से पकडा गया था और उन्नाव जेल में शिफ्ट कर दिया गया था जहां से 7 नवम्बर 1990 को हमें छोडा गया था । हमारी गिरफ्तारी 19 अक्तूबर को हुई थी , हम छूटने के बाद सीधे अयोध्या पहुंचे वहां बाबरी ढांचा था उसमें राम लला की मूर्ति थी । सख्त पहरा था वहां दर्शन करके हनुमान गढी गए और दोपहर का भोजन वहां किया । राजू भैया ने बताया कि इसके पश्चात हम सरयू नदी गए , वहां तट पर लगभग 4 कारसेवकों का अंतिम संस्कार हो रहा था । हम जब नहाने लगे तो एक बोरी में बंद शहीद कारसेवक की मृत देह पर हमारे एक साथी कारसेवक का पैर पडा । हमने उस बोरी को खींचकर बाहर निकाला , उसे बालों से ऊपर से बांधा हुआ था जब बोरी को खोला गया तो एक 35-36 वर्ष के कारसेवक की गली हुई देह देखकर हम सबकी आखों से अश्रु धारा बह निकली । जाने कितनी देर तक तट पर बैठे हम सब लोग जोर जोर से रोते रहे , फिर नम आंखों से उनका अंतिम संस्कार किया। 2 नवम्बर 1990 को हुए भीषण हत्याकांड में मुलायम सरकार ने सैंकडो रामभक्तों की बलि ले ली थी , आज राम मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त को हो रहा है , जैसे उन हुतात्मा कारसेवकों के अमर बलिदान पर अब सच्चे श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाएंगे । राजू भैया ने कहा कि ऐसे पावन अवसर पर मैं लाल कृष्ण आडवाणी जी , साध्वी ऋतंभरा जी और उमा भारती जी , अशोक जी सिंहल , कल्याण सिंह जी , विश्व हिंदू परिषद , विश्व के सबसे बडे स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ , प्रधानमंत्री मोदी जी , यू.पी के सीएम योगी जी को हृदय से नमन करता हूं । उन्होने कहा कि दूसरी बार ढांचा तोड दिया गया और बाबरी कंलक से मुक्ति मिल गई थी पर उन शहीद कारसेवकों की जब याद आती है आज भी रोम रोम जल उठता है और आत्मा तक रो पडती है।
आस्था का प्रश्न था मंदिर-
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राजेश जिंदल ने कहा कि भगवान राम का 5 अगस्त से मंदिर निर्माण का काम शुरु हो रहा है उसमें हिंदू संगठनों व कार्यकर्ताओं ने सैंकडों ने बलिदान दिया है। उन्होने कहा कि यह एक साधारण मंदिर नहीं बल्कि रामलल्ला का जन्म स्थान है। यह सौ करोड से ज्यादा हिंदूओं की आस्था का प्रश्न था। और हम लॉकडाऊन के कारण अगर अयोध्या नहीं जा पाएंगे तो अपने अपने घरों में देसी घी के दिए जलाएंगे। आज संपूर्ण हिंदू समाज स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। हमें लगता है हमने भगवान राम के लिए जेलों में जो वनवास काटा था वो आज सफल हो गया और हमारे आराध्य देव आज विराजमान होने वाले हैं।
विवादित ढांवे को विंध्वस करने के साक्षी रहे बददी के राम भक्त राजेश जिंदल ऊर्फ राजू भैया जो कि उन्नाव जेल में रहे चुके हैं।
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