- विज्ञापन (Article Top Ad) -
सोलन , 29 मार्च [ विशाल सूद ] ! आध्यात्मिक जीवन में नारी की भूमिका को रेखांकित करते हुए संत निरंकारी मण्डल के जोन नम्बर 5A, सोलन में एक भव्य जोन स्तरीय महिला समागम का आयोजन किया गया। यह आयोजन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राज पिता जी की शिक्षाओं से प्रेरित रहा। समागम में जिला सिरमौर, सोलन और शिमला की विभिन्न शाखाओं से आई महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्संग के माध्यम से उपस्थित संगत ने आध्यात्मिक आनंद की दिव्य अनुभूति प्राप्त की। इस अवसर पर दिल्ली से पधारी प्रचारक अनीता वाधवा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अध्यात्म में महिलाओं का योगदान युगों-युगों से अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। महिलाएं भक्ति, साधना और योग के माध्यम से न केवल स्वयं को जागृत करती हैं, बल्कि परिवार और समाज में प्रेम, सेवा, करुणा और नैतिक मूल्यों का भी प्रसार करती हैं। उन्होंने कहा कि नारी सृजन, समर्पण और सहनशीलता की प्रतीक बनकर समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करती है। महिलाओं का आध्यात्मिक विकास न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को समृद्ध बनाता है, बल्कि एक संतुलित और स्वस्थ समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस संदर्भ में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज स्वयं एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य मानव मात्र को परमात्मा के ज्ञान से जोड़ना और आत्मा का परमात्मा से मिलन कराकर जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति दिलाना है। समागम में उपस्थित महिलाओं ने इस आध्यात्मिक संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
सोलन , 29 मार्च [ विशाल सूद ] ! आध्यात्मिक जीवन में नारी की भूमिका को रेखांकित करते हुए संत निरंकारी मण्डल के जोन नम्बर 5A, सोलन में एक भव्य जोन स्तरीय महिला समागम का आयोजन किया गया। यह आयोजन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राज पिता जी की शिक्षाओं से प्रेरित रहा।
समागम में जिला सिरमौर, सोलन और शिमला की विभिन्न शाखाओं से आई महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्संग के माध्यम से उपस्थित संगत ने आध्यात्मिक आनंद की दिव्य अनुभूति प्राप्त की।
- विज्ञापन (Article Inline Ad) -
इस अवसर पर दिल्ली से पधारी प्रचारक अनीता वाधवा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अध्यात्म में महिलाओं का योगदान युगों-युगों से अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। महिलाएं भक्ति, साधना और योग के माध्यम से न केवल स्वयं को जागृत करती हैं, बल्कि परिवार और समाज में प्रेम, सेवा, करुणा और नैतिक मूल्यों का भी प्रसार करती हैं।
उन्होंने कहा कि नारी सृजन, समर्पण और सहनशीलता की प्रतीक बनकर समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करती है। महिलाओं का आध्यात्मिक विकास न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को समृद्ध बनाता है, बल्कि एक संतुलित और स्वस्थ समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस संदर्भ में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज स्वयं एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य मानव मात्र को परमात्मा के ज्ञान से जोड़ना और आत्मा का परमात्मा से मिलन कराकर जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति दिलाना है। समागम में उपस्थित महिलाओं ने इस आध्यात्मिक संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
- विज्ञापन (Article Bottom Ad) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 1) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 2) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 3) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 4) -