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चम्बा / भरमौर ! सदियों से चली आ रही परम्परा है कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी से लेकर राधाष्टमी तकविश्व विख्यात मणिमहेश यात्रा का शुभारंभ होता है । इस पवित्र तीर्थ यात्रा में दुनिया भर श्रद्धालु दूर दूर से आते है। यह पवित्र यात्रा पुरे एक महीने तक चलती रहती है। साल में एक बार होने वाली इस यात्रा की इसमें सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जनजातीय क्षेत्र भरमौर के समूचे गद्दी परिवार के लोग इस दौरान ब पुरे एक सप्ताह तक चौरासी प्रांगण में शाम के समय पारम्परिक वेशभूषा में सुस्सजित होकर डंडारस करते है। यह लोक गायन व डंडारस समृद्ध प्राचीन समृद्ध संस्कृति को दर्शाता है। पर इस बार कोरोना महामारी के चलते जिला प्रशासन ने इस यात्रा को सम्पूर्णतः बंद कर दिया है, ताकि आगे कोई किसी भी तरह का कोई संक्रमण न फैले। जंहा तक इस प्राचीन संस्कृति को बचाने की बात की जाये तो यंहा के स्थानीय लोगों ने यह सिद्ध कर दिया है कि चाहे कितनी विकट परिस्थितिया क्यों न हो ये परम्परा यूँ ही चलती रहेगी। चौरासी प्रांगण जोकि इस समय मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ होता था। इसमें आज पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है। दूर दूर से आए श्रद्धालु जो कि इन देवालयों में जाकर भगवान का आशीर्वाद तो प्राप्त करते ही थे , बल्कि वे निशानी के तौर पर अपने घरवालों के लिए यंहा से कुछ न कुछ खरीदारी भी करते थे। पर आज यंहा सब कुछ शून्य दिखाई दे रहा है। इस देव भूमि चौरासी भरमौर में अपना सारा जीवन भगवान के चरणों में यापन करने वाले संत पंचम गिरी महाराज जी ने खबर हिमाचल से खास बातचीत में बताया कि यह हमारे दादा गुरु जी श्री जय श्री कृष्ण गिरी महाराज ने इस परमपरा को शुरू किया था,और यंहा के स्थानीय लोगों ने भी इस परम्परा को बखूबी निभाया था उन्होंने कहा कि उस समय भी उतनी ही पब्लिक हुआ करती थी जितनी कर आज है, संत पंचम गिरी महाराज जी ने हमारी खबर हिमाचल से खास बातचीत में आगे बताया कि यात्रियों की संख्या जो बढ़ी है वह करीब 20 से 25 वर्ष से ही बढ़ी है जब 1995 में चम्बा जिले में फ्लड आया था उसके बाद ही यात्रियों की गणना में इजाफा हुआ है। यंहा के स्थानीय लोगो ने बताया कि इस शिव प्रांगण में यह मेला और इसमें चलने वाली जात्तर पुरे आठ दिनों तक लगातार यूँ ही चलती है और जिसका कि आज आखिरी दिन है और कोविड 19 के चलते सिर्फ परम्पराओं को निभाया जा रहा है। इन लोगो ने कहा कि इस तरह कि महामारी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी है। उन्होंने बताया कि प्राचीन संस्कृति को बचाने के लिए इस मेले को पुरे आठ दिनों तक उन्ही रीति रिवाजों का निर्बहन करते हुए ठीक उसी तरह से निभाया गया है जिस तरह से पहले हमारे यंहा के बजुर्ग लोग पीछे निभाते चले आ रहे थे। परम्परागत निभाई जाने वाली इस रीति रिवाजो को लेकर युवाओ का कहना है कि यह महामारी पुरे विश्व में फैली हुई है जिसको की हम भगवान का प्रकोप नहीं कह सकते है,और जंहा तक इस बिमारी की बात की जाये तो इसका प्रभाव हमारे यंहा इन देवालयों और प्राचीन नगरी भरमौर में नहीं पड़ा है।
चम्बा / भरमौर ! सदियों से चली आ रही परम्परा है कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी से लेकर राधाष्टमी तकविश्व विख्यात मणिमहेश यात्रा का शुभारंभ होता है । इस पवित्र तीर्थ यात्रा में दुनिया भर श्रद्धालु दूर दूर से आते है। यह पवित्र यात्रा पुरे एक महीने तक चलती रहती है। साल में एक बार होने वाली इस यात्रा की इसमें सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जनजातीय क्षेत्र भरमौर के समूचे गद्दी परिवार के लोग इस दौरान ब पुरे एक सप्ताह तक चौरासी प्रांगण में शाम के समय पारम्परिक वेशभूषा में सुस्सजित होकर डंडारस करते है। यह लोक गायन व डंडारस समृद्ध प्राचीन समृद्ध संस्कृति को दर्शाता है। पर इस बार कोरोना महामारी के चलते जिला प्रशासन ने इस यात्रा को सम्पूर्णतः बंद कर दिया है, ताकि आगे कोई किसी भी तरह का कोई संक्रमण न फैले। जंहा तक इस प्राचीन संस्कृति को बचाने की बात की जाये तो यंहा के स्थानीय लोगों ने यह सिद्ध कर दिया है कि चाहे कितनी विकट परिस्थितिया क्यों न हो ये परम्परा यूँ ही चलती रहेगी।
चौरासी प्रांगण जोकि इस समय मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ होता था। इसमें आज पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है। दूर दूर से आए श्रद्धालु जो कि इन देवालयों में जाकर भगवान का आशीर्वाद तो प्राप्त करते ही थे , बल्कि वे निशानी के तौर पर अपने घरवालों के लिए यंहा से कुछ न कुछ खरीदारी भी करते थे। पर आज यंहा सब कुछ शून्य दिखाई दे रहा है। इस देव भूमि चौरासी भरमौर में अपना सारा जीवन भगवान के चरणों में यापन करने वाले संत पंचम गिरी महाराज जी ने खबर हिमाचल से खास बातचीत में बताया कि यह हमारे दादा गुरु जी श्री जय श्री कृष्ण गिरी महाराज ने इस परमपरा को शुरू किया था,और यंहा के स्थानीय लोगों ने भी इस परम्परा को बखूबी निभाया था उन्होंने कहा कि उस समय भी उतनी ही पब्लिक हुआ करती थी जितनी कर आज है, संत पंचम गिरी महाराज जी ने हमारी खबर हिमाचल से खास बातचीत में आगे बताया कि यात्रियों की संख्या जो बढ़ी है वह करीब 20 से 25 वर्ष से ही बढ़ी है जब 1995 में चम्बा जिले में फ्लड आया था उसके बाद ही यात्रियों की गणना में इजाफा हुआ है।
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यंहा के स्थानीय लोगो ने बताया कि इस शिव प्रांगण में यह मेला और इसमें चलने वाली जात्तर पुरे आठ दिनों तक लगातार यूँ ही चलती है और जिसका कि आज आखिरी दिन है और कोविड 19 के चलते सिर्फ परम्पराओं को निभाया जा रहा है। इन लोगो ने कहा कि इस तरह कि महामारी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी है। उन्होंने बताया कि प्राचीन संस्कृति को बचाने के लिए इस मेले को पुरे आठ दिनों तक उन्ही रीति रिवाजों का निर्बहन करते हुए ठीक उसी तरह से निभाया गया है जिस तरह से पहले हमारे यंहा के बजुर्ग लोग पीछे निभाते चले आ रहे थे। परम्परागत निभाई जाने वाली इस रीति रिवाजो को लेकर युवाओ का कहना है कि यह महामारी पुरे विश्व में फैली हुई है जिसको की हम भगवान का प्रकोप नहीं कह सकते है,और जंहा तक इस बिमारी की बात की जाये तो इसका प्रभाव हमारे यंहा इन देवालयों और प्राचीन नगरी भरमौर में नहीं पड़ा है।
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