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चम्बा ! चंबा रिडिस्कवर संस्था द्वारा मिंजर मेले के समापन अवसर पर चमीणू में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्था के पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा साल नदी में मिंजर प्रवाहित करने की रस्म अदा की गई तथा भगवान से सुख शांति की कामना की। इससे पूर्व संस्था द्वारा पारंपरिक खेलों नौ गिटड़ा, ब्राग गिट्टी, चानण चप्पा, गिल्ली डंडा, डोडे की गुत्थी का भी आयोजन किया गया। इन खेलों का पदाधिकारियों व सदस्यों ने खूब लुत्फ उठाया। इसके अलावा संस्था द्वारा पारंपरिक पकवान भी बनाए गए। इसमें खमोद, दाड़ू वाला मीट, गुच्छी का मधरा, मक्की के लड्डू, झिंझन चावल, चाशनीदार आदि पकवान शामिल रहे। इस अवसर पर पद्मश्री विजय शर्मा, पंकज चौफला, डॉ. विदयासागर, पवन वैद, यशपाल पांडे, मनुज शर्मा, गुरमीत नागपाल, अरविंद , हितेश पठानिया, मनीष जमवाल, मल, देवेन्द्र सिंह, लछियाराम, बलराम, प्रखर, तुषार, मगनदीप, सारंग, मैत्रेया, नितिगया, तनु, विजय, विकास आदि मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि चंबा रिडिस्कवर संस्था द्वारा पारंपरिक गतिविधियों का पिछले काफी समय से आयोजन किया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी को इनका ज्ञान हो सके। उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आएं। चंबा की संस्कृति पहले से ही काफी स्मृद्ध ही है।
चम्बा ! चंबा रिडिस्कवर संस्था द्वारा मिंजर मेले के समापन अवसर पर चमीणू में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्था के पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा साल नदी में मिंजर प्रवाहित करने की रस्म अदा की गई तथा भगवान से सुख शांति की कामना की।
इससे पूर्व संस्था द्वारा पारंपरिक खेलों नौ गिटड़ा, ब्राग गिट्टी, चानण चप्पा, गिल्ली डंडा, डोडे की गुत्थी का भी आयोजन किया गया। इन खेलों का पदाधिकारियों व सदस्यों ने खूब लुत्फ उठाया। इसके अलावा संस्था द्वारा पारंपरिक पकवान भी बनाए गए। इसमें खमोद, दाड़ू वाला मीट, गुच्छी का मधरा, मक्की के लड्डू, झिंझन चावल, चाशनीदार आदि पकवान शामिल रहे।
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इस अवसर पर पद्मश्री विजय शर्मा, पंकज चौफला, डॉ. विदयासागर, पवन वैद, यशपाल पांडे, मनुज शर्मा, गुरमीत नागपाल, अरविंद , हितेश पठानिया, मनीष जमवाल, मल, देवेन्द्र सिंह, लछियाराम, बलराम, प्रखर, तुषार, मगनदीप, सारंग, मैत्रेया, नितिगया, तनु, विजय, विकास आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि चंबा रिडिस्कवर संस्था द्वारा पारंपरिक गतिविधियों का पिछले काफी समय से आयोजन किया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी को इनका ज्ञान हो सके। उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आएं। चंबा की संस्कृति पहले से ही काफी स्मृद्ध ही है।
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