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शिमला , 05 जनवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित सचिवालय के बाहर आज सुबह दृष्टिबाधित बेरोजगारों ने चक्का जाम कर दिया, जिससे शहर की लाइफ लाइन मानी जाने वाली सर्कुलर रोड पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। प्रदर्शन के दौरान दृष्टिबाधित बेरोजगारों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। चक्का जाम के चलते चार किलोमीटर से अधिक लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे कामकाजी लोगों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे बने कि कई लोग पैदल चलकर अपने दफ्तर और कामकाज पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि दृष्टिबाधित बेरोजगार पिछले करीब दो वर्षों से शिमला में धरने पर बैठे हैं। इस दौरान वे कई बार नौकरी की मांग को लेकर चक्का जाम कर चुके हैं। प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के साथ टकराव के वीडियो भी कई बार सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर 3 दिसंबर 2025 को भी दृष्टिबाधित बेरोजगारों का एसडीएम शिमला और पुलिस अधिकारियों के साथ टकराव हुआ था, उस दिन भी उन्होंने चक्का जाम किया था। इसके बावजूद मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से आज एक बार फिर बेरोजगार सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में विभिन्न सरकारी विभागों में दृष्टिहीन कोटे के खाली पड़े बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरना, पेंशन राशि बढ़ाना और मूलभूत सुविधाओं में सुधार शामिल है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार इन पर भर्तियां नहीं कर रही है। सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी वे चक्का जाम करते हैं, तो प्रशासन बातचीत के लिए बुलाता है, लेकिन बाद में उनकी मांगों पर कोई अमल नहीं होता।
शिमला , 05 जनवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित सचिवालय के बाहर आज सुबह दृष्टिबाधित बेरोजगारों ने चक्का जाम कर दिया, जिससे शहर की लाइफ लाइन मानी जाने वाली सर्कुलर रोड पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। प्रदर्शन के दौरान दृष्टिबाधित बेरोजगारों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
चक्का जाम के चलते चार किलोमीटर से अधिक लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे कामकाजी लोगों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे बने कि कई लोग पैदल चलकर अपने दफ्तर और कामकाज पर पहुंचे।
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बताया जा रहा है कि दृष्टिबाधित बेरोजगार पिछले करीब दो वर्षों से शिमला में धरने पर बैठे हैं। इस दौरान वे कई बार नौकरी की मांग को लेकर चक्का जाम कर चुके हैं। प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के साथ टकराव के वीडियो भी कई बार सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर 3 दिसंबर 2025 को भी दृष्टिबाधित बेरोजगारों का एसडीएम शिमला और पुलिस अधिकारियों के साथ टकराव हुआ था, उस दिन भी उन्होंने चक्का जाम किया था। इसके बावजूद मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से आज एक बार फिर बेरोजगार सड़कों पर उतर आए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में विभिन्न सरकारी विभागों में दृष्टिहीन कोटे के खाली पड़े बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरना, पेंशन राशि बढ़ाना और मूलभूत सुविधाओं में सुधार शामिल है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार इन पर भर्तियां नहीं कर रही है।
सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी वे चक्का जाम करते हैं, तो प्रशासन बातचीत के लिए बुलाता है, लेकिन बाद में उनकी मांगों पर कोई अमल नहीं होता।
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