संवेदनशील कृषि व डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित, टेक्सटाइल–मशीनरी–कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्राथमिक पहुंच
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शिमला, 09 फरवरी [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को भारतीय अर्थव्यवस्था, निर्यात और घरेलू उद्योगों के लिए ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि इस समझौते से भारत को लगभग 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के विशाल बाजार में प्राथमिक (प्रेफरेंशियल) पहुंच मिली है। उन्होंने कहा कि यह समझौता संतुलित, भारत-हितैषी और किसान तथा MSME सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। विपिन परमार ने कहा कि समझौते के तहत भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को बड़ी राहत मिली है, जहां पहले 50% तक लगने वाले टैरिफ घटाकर लगभग 18% कर दिए गए हैं। सिल्क उत्पादों को तो शून्य शुल्क (0% ड्यूटी) पहुंच मिली है, जिससे 113 अरब डॉलर के अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। मशीनरी निर्यात पर भी टैरिफ घटाकर 18% किया गया है, जिससे 477 अरब डॉलर के बड़े बाजार में भारतीय निर्माताओं के लिए नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने बताया कि लगभग 1.36 अरब डॉलर के भारतीय कृषि निर्यात को अमेरिका में अतिरिक्त शुल्क से मुक्त पहुंच मिली है। मसाले, चाय, कॉफी, फल, मेवे और प्रोसेस्ड फूड जैसे प्रमुख उत्पादों को शून्य ड्यूटी ट्रीटमेंट दिया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि डेयरी, मांस, पोल्ट्री और अनाज जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और इन पर कोई बाज़ार खुलापन नहीं दिया गया। विपिन परमार ने कहा कि इस समझौते से भारत को बहु-स्तरीय लाभ मिला है — लगभग 900 अरब डॉलर के अमेरिकी वैश्विक आयात पर 18% की प्रतिस्पर्धी दर, 150 अरब डॉलर के आयात पर शून्य शुल्क, 720 अरब डॉलर के आयात पर अतिरिक्त ड्यूटी नहीं, 350 अरब डॉलर के आयात पर पूर्व छूट जारी तथा 232 टैरिफ लाइनों पर प्रेफरेंशियल ट्रीटमेंट सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय MSME, कारीगर, टेक्सटाइल उद्योग, फूड प्रोसेसिंग और कृषि निर्यातकों के लिए नए द्वार खोलेगा तथा रोजगार और विदेशी मुद्रा आय दोनों में वृद्धि करेगा। विपक्ष द्वारा इस पर भ्रम फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि यह समझौता स्पष्ट रूप से भारत के उत्पादकों और किसानों के हितों की रक्षा करते हुए किया गया है।
शिमला, 09 फरवरी [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को भारतीय अर्थव्यवस्था, निर्यात और घरेलू उद्योगों के लिए ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि इस समझौते से भारत को लगभग 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के विशाल बाजार में प्राथमिक (प्रेफरेंशियल) पहुंच मिली है। उन्होंने कहा कि यह समझौता संतुलित, भारत-हितैषी और किसान तथा MSME सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
विपिन परमार ने कहा कि समझौते के तहत भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को बड़ी राहत मिली है, जहां पहले 50% तक लगने वाले टैरिफ घटाकर लगभग 18% कर दिए गए हैं। सिल्क उत्पादों को तो शून्य शुल्क (0% ड्यूटी) पहुंच मिली है, जिससे 113 अरब डॉलर के अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। मशीनरी निर्यात पर भी टैरिफ घटाकर 18% किया गया है, जिससे 477 अरब डॉलर के बड़े बाजार में भारतीय निर्माताओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।
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उन्होंने बताया कि लगभग 1.36 अरब डॉलर के भारतीय कृषि निर्यात को अमेरिका में अतिरिक्त शुल्क से मुक्त पहुंच मिली है। मसाले, चाय, कॉफी, फल, मेवे और प्रोसेस्ड फूड जैसे प्रमुख उत्पादों को शून्य ड्यूटी ट्रीटमेंट दिया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि डेयरी, मांस, पोल्ट्री और अनाज जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और इन पर कोई बाज़ार खुलापन नहीं दिया गया।
विपिन परमार ने कहा कि इस समझौते से भारत को बहु-स्तरीय लाभ मिला है — लगभग 900 अरब डॉलर के अमेरिकी वैश्विक आयात पर 18% की प्रतिस्पर्धी दर, 150 अरब डॉलर के आयात पर शून्य शुल्क, 720 अरब डॉलर के आयात पर अतिरिक्त ड्यूटी नहीं, 350 अरब डॉलर के आयात पर पूर्व छूट जारी तथा 232 टैरिफ लाइनों पर प्रेफरेंशियल ट्रीटमेंट सुनिश्चित हुआ है।
उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय MSME, कारीगर, टेक्सटाइल उद्योग, फूड प्रोसेसिंग और कृषि निर्यातकों के लिए नए द्वार खोलेगा तथा रोजगार और विदेशी मुद्रा आय दोनों में वृद्धि करेगा। विपक्ष द्वारा इस पर भ्रम फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि यह समझौता स्पष्ट रूप से भारत के उत्पादकों और किसानों के हितों की रक्षा करते हुए किया गया है।
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