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शिमला , 29 जनवरी ( विशाल सूद ) ! भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राकेश डोगरा ने कहा है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर न करवाना, निर्वाचित प्रधानों को संवैधानिक अधिकारों व शक्तियों से वंचित रखना तथा अध्यापकों को पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करना, सीधे तौर पर पंचायत व्यवस्था और गांवों के समग्र विकास पर पूर्ण विराम लगाने जैसा है। राकेश डोगरा ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था संविधान की आत्मा है और ग्रामीण भारत की रीढ़ मानी जाती है, लेकिन कांग्रेस सरकार इस व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर कर रही है। चुनाव न करवाकर सरकार जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है और निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह अस्थायी प्रशासक थोपकर पंचायतों को अपंग बना रही है। उन्होंने कहा कि अध्यापकों को प्रशासक बनाना न केवल शिक्षा व्यवस्था के साथ अन्याय है बल्कि पंचायत प्रशासन के साथ भी खिलवाड़ है। शिक्षक का कार्य बच्चों का भविष्य संवारना है, न कि पंचायतों के वित्तीय और विकासात्मक निर्णय लेना। इससे एक ओर स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायतों में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। डोगरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार न देकर सत्ता का केंद्रीकरण करना चाहती है, ताकि भ्रष्टाचार और मनमानी को खुली छूट मिल सके। पंचायतों को न तो वित्तीय अधिकार दिए जा रहे हैं और न ही विकास योजनाओं को मंजूरी देने की स्वतंत्रता, जिससे गांवों में सड़क, पानी, स्वच्छता, रोजगार और अन्य मूलभूत सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाया गया था, ग्राम सभाओं को ताकत दी गई और विकास को गांव तक पहुंचाया गया, लेकिन कांग्रेस सरकार आते ही पंचायतें केवल नाम की रह गई हैं। राकेश डोगरा ने प्रदेश सरकार से मांग की कि पंचायती राज चुनाव तुरंत करवाए जाएं, निर्वाचित प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों को पूर्ण संवैधानिक व वित्तीय शक्तियां दी जाएं, अध्यापकों को प्रशासक बनाने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए,पंचायतों को विकास के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस सरकार ने शीघ्र अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया तो भाजपा इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ जन आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेगी।
शिमला , 29 जनवरी ( विशाल सूद ) ! भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राकेश डोगरा ने कहा है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर न करवाना, निर्वाचित प्रधानों को संवैधानिक अधिकारों व शक्तियों से वंचित रखना तथा अध्यापकों को पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करना, सीधे तौर पर पंचायत व्यवस्था और गांवों के समग्र विकास पर पूर्ण विराम लगाने जैसा है।
राकेश डोगरा ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था संविधान की आत्मा है और ग्रामीण भारत की रीढ़ मानी जाती है, लेकिन कांग्रेस सरकार इस व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर कर रही है। चुनाव न करवाकर सरकार जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है और निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह अस्थायी प्रशासक थोपकर पंचायतों को अपंग बना रही है।
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उन्होंने कहा कि अध्यापकों को प्रशासक बनाना न केवल शिक्षा व्यवस्था के साथ अन्याय है बल्कि पंचायत प्रशासन के साथ भी खिलवाड़ है। शिक्षक का कार्य बच्चों का भविष्य संवारना है, न कि पंचायतों के वित्तीय और विकासात्मक निर्णय लेना। इससे एक ओर स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायतों में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं।
डोगरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार न देकर सत्ता का केंद्रीकरण करना चाहती है, ताकि भ्रष्टाचार और मनमानी को खुली छूट मिल सके। पंचायतों को न तो वित्तीय अधिकार दिए जा रहे हैं और न ही विकास योजनाओं को मंजूरी देने की स्वतंत्रता, जिससे गांवों में सड़क, पानी, स्वच्छता, रोजगार और अन्य मूलभूत सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाया गया था, ग्राम सभाओं को ताकत दी गई और विकास को गांव तक पहुंचाया गया, लेकिन कांग्रेस सरकार आते ही पंचायतें केवल नाम की रह गई हैं।
राकेश डोगरा ने प्रदेश सरकार से मांग की कि पंचायती राज चुनाव तुरंत करवाए जाएं,
निर्वाचित प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों को पूर्ण संवैधानिक व वित्तीय शक्तियां दी जाएं,
अध्यापकों को प्रशासक बनाने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए,पंचायतों को विकास के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस सरकार ने शीघ्र अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया तो भाजपा इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ जन आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेगी।
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