प्रशासक नियुक्त करने के हाईकोर्ट फैसले का विरोध, चुनाव तक पंचायत प्रधानों को शक्तियां बरकरार रखने की मांग
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शिमला , 19 जनवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के कार्यकाल को लेकर सियासत और प्रशासन के बीच खींचतान तेज हो गई है। पंचायत चुनावों से पहले प्रशासक नियुक्त किए जाने के हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में आज प्रदेश भर से करीब चार सौ पंचायत प्रधान शिमला पहुंचे और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात करके अपनी मांगें उनके समक्ष रखने शिमला पहुंचे हैं। शिमला में आज पंचायत प्रधानों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे करीब 400 पंचायत प्रधान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात करने अपनी मांग रखने पहुंचे हैं कि वे चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं और अपने लोगों की समस्याओं को प्रशासक से कही बेहतर समझते हैं। ऐसे में जब तक पंचायत चुनाव नहीं होते, तब तक पंचायतों की शक्तियां उनसे नहीं छीनी जानी चाहिए। प्रधानों का कहना है कि प्रदेश में आपदा एक्ट के तहत राहत और पुनर्निर्माण का काम चल रहा है। ऐसे समय में पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने मांग की कि 31 जनवरी के बाद भी पंचायत प्रधानों को अधिकारों के साथ काम करने दिया जाए। प्रशासक केवल दफ्तर समय में उपलब्ध रहेगा, जबकि पंचायत प्रधान 24 घंटे जनता के बीच रहता है। हम लोगों की समस्याओं को जमीन पर समझते हैं। जब पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है तो सरकार को चाहिए कि प्रधानों का कार्यकाल चुनाव होने तक बढ़ाया जाए। पंचायत प्रधानों ने मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे उसके बाद ग्रामीण एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से भी भेंट करेंगे और उन्हें ज्ञापन सौपेंगे। आपदाओं के कारण कई विकास कार्य रुके हुए थे। हाल ही में उनके इस्टीमेट पास हुए हैं। अगर हमारा कार्यकाल खत्म हुआ तो गरीब और जरूरतमंद लोगों के काम फिर से रुक जाएंगे। सरकार चाहे हमें शक्तियां दे या न दे, लेकिन सिस्टम का हिस्सा जरूर बनाए रखे। प्रशासक एक अधिकारी होता है, जो गांव के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा नहीं समझ सकता। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार इसके बाद प्रशासक नियुक्त किए जाने हैं। इसी फैसले के विरोध में पंचायत प्रधान महासंघ के अध्यक्ष बिजेंद्र चंदेल की अगुवाई में प्रदेश भर के पंचायत प्रतिनिधि आज शिमला पहुंचे और सरकार से लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाए रखने की मांग की।
शिमला , 19 जनवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के कार्यकाल को लेकर सियासत और प्रशासन के बीच खींचतान तेज हो गई है। पंचायत चुनावों से पहले प्रशासक नियुक्त किए जाने के हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में आज प्रदेश भर से करीब चार सौ पंचायत प्रधान शिमला पहुंचे और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात करके अपनी मांगें उनके समक्ष रखने शिमला पहुंचे हैं।
शिमला में आज पंचायत प्रधानों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे करीब 400 पंचायत प्रधान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात करने अपनी मांग रखने पहुंचे हैं कि वे चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं और अपने लोगों की समस्याओं को प्रशासक से कही बेहतर समझते हैं। ऐसे में जब तक पंचायत चुनाव नहीं होते, तब तक पंचायतों की शक्तियां उनसे नहीं छीनी जानी चाहिए।
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प्रधानों का कहना है कि प्रदेश में आपदा एक्ट के तहत राहत और पुनर्निर्माण का काम चल रहा है। ऐसे समय में पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने मांग की कि 31 जनवरी के बाद भी पंचायत प्रधानों को अधिकारों के साथ काम करने दिया जाए।
प्रशासक केवल दफ्तर समय में उपलब्ध रहेगा, जबकि पंचायत प्रधान 24 घंटे जनता के बीच रहता है। हम लोगों की समस्याओं को जमीन पर समझते हैं। जब पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है तो सरकार को चाहिए कि प्रधानों का कार्यकाल चुनाव होने तक बढ़ाया जाए।
पंचायत प्रधानों ने मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे उसके बाद ग्रामीण एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से भी भेंट करेंगे और उन्हें ज्ञापन सौपेंगे। आपदाओं के कारण कई विकास कार्य रुके हुए थे। हाल ही में उनके इस्टीमेट पास हुए हैं। अगर हमारा कार्यकाल खत्म हुआ तो गरीब और जरूरतमंद लोगों के काम फिर से रुक जाएंगे। सरकार चाहे हमें शक्तियां दे या न दे, लेकिन सिस्टम का हिस्सा जरूर बनाए रखे। प्रशासक एक अधिकारी होता है, जो गांव के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा नहीं समझ सकता।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार इसके बाद प्रशासक नियुक्त किए जाने हैं। इसी फैसले के विरोध में पंचायत प्रधान महासंघ के अध्यक्ष बिजेंद्र चंदेल की अगुवाई में प्रदेश भर के पंचायत प्रतिनिधि आज शिमला पहुंचे और सरकार से लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाए रखने की मांग की।
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