धरनों से रूट डायवर्ट, व्यापार ठप—पहली बार ऐसा मुख्यमंत्री, जिसकी कोई नहीं सुनता
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शिमला , 01 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स को लेकर चल रहे विवाद पर कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दरों में कटौती के आदेश जारी करने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह उलट हैं और लोगों से अभी भी ₹170 तक की पर्ची काटी जा रही है, जो साफ तौर पर प्रशासनिक विफलता और भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स और जमीनी साक्ष्यों से स्पष्ट है कि पहले 5 से 12 सीटर वाहनों पर ₹70 से ₹110 तक शुल्क लिया जा रहा था, जिसे बढ़ाकर ₹130 किया गया और विरोध के बाद सरकार ने इसे घटाकर ₹100 करने का दावा किया। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी लोगों से ₹170 तक वसूले जा रहे हैं, जिससे आम जनता और वाहन चालकों में भारी रोष है। संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि “सरकार के आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं, ज़मीनी स्तर पर कोई पालन नहीं हो रहा। यह हिमाचल के इतिहास में पहली बार है कि ऐसा मुख्यमंत्री मिला है, जिसकी बात को खुद उसका प्रशासन ही नहीं सुन रहा।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की नीतियां “खुल्ला पैसा रखो और टैक्स भरो” की मानसिकता को दर्शाती हैं, जहां आम आदमी को मजबूरी में अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि एंट्री टैक्स के खिलाफ चल रहे धरना-प्रदर्शनों के कारण ऊना बॉर्डर से हिमाचल आने वाले कई मार्गों को डायवर्ट करना पड़ा, जिससे न केवल आम यात्रियों को परेशानी हो रही है बल्कि व्यापार और परिवहन गतिविधियों पर भी गंभीर असर पड़ा है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह स्थिति बताती है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह चरमरा चुका है। सरकार एक तरफ फैसले लेती है और दूसरी तरफ उन्हें लागू कराने में पूरी तरह विफल रहती है। अंत में संदीपनी भारद्वाज ने मांग की कि सरकार तत्काल इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए, अवैध वसूली पर रोक लगाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, अन्यथा भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर व्यापक आंदोलन।
शिमला , 01 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स को लेकर चल रहे विवाद पर कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दरों में कटौती के आदेश जारी करने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह उलट हैं और लोगों से अभी भी ₹170 तक की पर्ची काटी जा रही है, जो साफ तौर पर प्रशासनिक विफलता और भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है।
उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स और जमीनी साक्ष्यों से स्पष्ट है कि पहले 5 से 12 सीटर वाहनों पर ₹70 से ₹110 तक शुल्क लिया जा रहा था, जिसे बढ़ाकर ₹130 किया गया और विरोध के बाद सरकार ने इसे घटाकर ₹100 करने का दावा किया। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी लोगों से ₹170 तक वसूले जा रहे हैं, जिससे आम जनता और वाहन चालकों में भारी रोष है।
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संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि “सरकार के आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं, ज़मीनी स्तर पर कोई पालन नहीं हो रहा। यह हिमाचल के इतिहास में पहली बार है कि ऐसा मुख्यमंत्री मिला है, जिसकी बात को खुद उसका प्रशासन ही नहीं सुन रहा।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की नीतियां “खुल्ला पैसा रखो और टैक्स भरो” की मानसिकता को दर्शाती हैं, जहां आम आदमी को मजबूरी में अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि एंट्री टैक्स के खिलाफ चल रहे धरना-प्रदर्शनों के कारण ऊना बॉर्डर से हिमाचल आने वाले कई मार्गों को डायवर्ट करना पड़ा, जिससे न केवल आम यात्रियों को परेशानी हो रही है बल्कि व्यापार और परिवहन गतिविधियों पर भी गंभीर असर पड़ा है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह स्थिति बताती है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह चरमरा चुका है। सरकार एक तरफ फैसले लेती है और दूसरी तरफ उन्हें लागू कराने में पूरी तरह विफल रहती है।
अंत में संदीपनी भारद्वाज ने मांग की कि सरकार तत्काल इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए, अवैध वसूली पर रोक लगाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, अन्यथा भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर व्यापक आंदोलन।
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