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चम्बा , 01 अप्रैल [ शिवानी ] !हिमाचल प्रदेश के चम्बा शहर ने बुधवार को एक अद्भुत और ऐतिहासिक आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनकर अपने गौरवशाली इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। ऐतिहासिक चौगान नंबर-दो में भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़े प्राचीन और पवित्र अवशेषों का भव्य पूजन एवं दर्शन कार्यक्रम श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। द आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वावधान में आयोजित इस दिव्य समागम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया। आयोजन की अगुवाई आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के मार्गदर्शन में की गई, जिनकी प्रेरणा से इन दुर्लभ अवशेषों को जन-दर्शन के लिए प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वेद मंत्रों की गूंज के साथ हुआ, जब गुरुकुल के वेद बटुकों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद प्रस्तुत वीडियो के माध्यम से श्रद्धालुओं को ज्योतिर्लिंग के इतिहास और इन अवशेषों की गौरवगाथा से अवगत कराया गया। मुख्य पूजा आरंभ होते ही पूरा चौगान “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। इस दौरान सामूहिक ध्यान (गाइडेड मेडिटेशन), सत्संग और दर्शन की लंबी कतारों ने आयोजन को और भी दिव्य बना दिया। श्रद्धालुओं ने न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए संकल्प भी लिए। इतिहास के अनुसार, विदेशी आक्रमणों के समय जब सोमनाथ मंदिर को क्षति पहुंचाई गई थी, तब समर्पित ब्राह्मणों और अग्निहोत्रियों ने ज्योतिर्लिंग के पवित्र अंशों को सुरक्षित बचाकर पीढ़ियों तक संरक्षित रखा। इन्हीं अमूल्य अवशेषों का पहली बार इस प्रकार सार्वजनिक पूजन और दर्शन कराया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना और आध्यात्मिक चेतना के जागरण का माध्यम बना। चंबा में उमड़ी भीड़ और श्रद्धा का सैलाब इस बात का प्रमाण रहा कि आज भी लोगों की आस्था और संस्कृति के प्रति जुड़ाव अटूट है। कार्यक्रम के सफल आयोजन के साथ चंबा एक बार फिर आध्यात्मिक मानचित्र पर प्रमुख केंद्र के रूप में उभर कर सामने आया। श्रद्धालु इस दिव्य अनुभव को जीवन भर संजोकर रखने की बात कहते नजर आए। कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। आयोजकों ने बताया कि सोमनाथ मूल ज्योतिर्लिंग यात्रा पूरे हिमाचल प्रदेश में आयोजित की जा रही है। मान्यता है कि लगभग एक हजार वर्ष पूर्व जब सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण हुआ था, तब उसके अवशेषों को वहां के पंडितों ने सुरक्षित रख लिया था। बाद में इन्हें श्री श्री रविशंकर के पास संरक्षित रखा गया। अब इन्हीं पवित्र ज्योतिर्लिंग अवशेषों के दर्शन हिमाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं को करवाए जा रहे हैं। इस यात्रा की शुरुआत चंबा से की गई है, और आज इसका शुभारंभ चंबा के ऐतिहासिक चौगान मैदान से हुआ। बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर श्रद्धा और भक्ति के साथ इन दिव्य अवशेषों के दर्शन किए।
चम्बा , 01 अप्रैल [ शिवानी ] !हिमाचल प्रदेश के चम्बा शहर ने बुधवार को एक अद्भुत और ऐतिहासिक आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनकर अपने गौरवशाली इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। ऐतिहासिक चौगान नंबर-दो में भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़े प्राचीन और पवित्र अवशेषों का भव्य पूजन एवं दर्शन कार्यक्रम श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ।
द आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वावधान में आयोजित इस दिव्य समागम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया। आयोजन की अगुवाई आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के मार्गदर्शन में की गई, जिनकी प्रेरणा से इन दुर्लभ अवशेषों को जन-दर्शन के लिए प्रस्तुत किया गया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ वेद मंत्रों की गूंज के साथ हुआ, जब गुरुकुल के वेद बटुकों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद प्रस्तुत वीडियो के माध्यम से श्रद्धालुओं को ज्योतिर्लिंग के इतिहास और इन अवशेषों की गौरवगाथा से अवगत कराया गया। मुख्य पूजा आरंभ होते ही पूरा चौगान “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
इस दौरान सामूहिक ध्यान (गाइडेड मेडिटेशन), सत्संग और दर्शन की लंबी कतारों ने आयोजन को और भी दिव्य बना दिया। श्रद्धालुओं ने न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए संकल्प भी लिए।
इतिहास के अनुसार, विदेशी आक्रमणों के समय जब सोमनाथ मंदिर को क्षति पहुंचाई गई थी, तब समर्पित ब्राह्मणों और अग्निहोत्रियों ने ज्योतिर्लिंग के पवित्र अंशों को सुरक्षित बचाकर पीढ़ियों तक संरक्षित रखा। इन्हीं अमूल्य अवशेषों का पहली बार इस प्रकार सार्वजनिक पूजन और दर्शन कराया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना और आध्यात्मिक चेतना के जागरण का माध्यम बना। चंबा में उमड़ी भीड़ और श्रद्धा का सैलाब इस बात का प्रमाण रहा कि आज भी लोगों की आस्था और संस्कृति के प्रति जुड़ाव अटूट है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के साथ चंबा एक बार फिर आध्यात्मिक मानचित्र पर प्रमुख केंद्र के रूप में उभर कर सामने आया। श्रद्धालु इस दिव्य अनुभव को जीवन भर संजोकर रखने की बात कहते नजर आए।
कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। आयोजकों ने बताया कि सोमनाथ मूल ज्योतिर्लिंग यात्रा पूरे हिमाचल प्रदेश में आयोजित की जा रही है। मान्यता है कि लगभग एक हजार वर्ष पूर्व जब सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण हुआ था, तब उसके अवशेषों को वहां के पंडितों ने सुरक्षित रख लिया था। बाद में इन्हें श्री श्री रविशंकर के पास संरक्षित रखा गया।
अब इन्हीं पवित्र ज्योतिर्लिंग अवशेषों के दर्शन हिमाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं को करवाए जा रहे हैं। इस यात्रा की शुरुआत चंबा से की गई है, और आज इसका शुभारंभ चंबा के ऐतिहासिक चौगान मैदान से हुआ। बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर श्रद्धा और भक्ति के साथ इन दिव्य अवशेषों के दर्शन किए।
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