- विज्ञापन (Article Top Ad) -
शिमला , 31 मार्च [ विशाल सूद ] ! डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने सदन में हिमाचल प्रदेश में अल्पसंख्यकों के लिए विकास एवं कल्याणकारी पहलों का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि चालू बजट चक्र के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य में अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों हेतु स्वीकृत विशिष्ट सामुदायिक अवसंरचना परियोजनाओं का ब्यौरा क्या है ? राज्य के उन विद्यार्थियों का ब्यौरा क्या है जिनके वर्ष 2026-27 में प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्तियों के लिए शैक्षिक सशक्तिकरण हेतु वर्तमान राष्ट्रीय आबंटन से लाभान्वित होने की अपेक्षा है ? पारंपरिक कारीगरों को समर्थन देने और हिमालयी क्षेत्र के विशिष्ट स्वदेशी शिल्प को बढ़ावा देने के लिए पीएम-विकास योजना के अंतर्गत विशेष प्रावधानों का ब्यौरा क्या है और पिछले वर्षों में बजट के अल्प उपयोग के संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्त चिंताओं का ध्यान में रखते हुए राज्य में शत-प्रतिशत निधि उपयोग सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं ? केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित एक कंेद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसका उदेश्य देश भर के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में सामुदायिक अवसंरचना का सृजन करना है। इस योजना में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, महिला केंद्रित परियोजनाएं, पेयजल एवं स्वच्छता, खेल, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, पशुपालन तथा अन्य सामुदायिक अवसंरचना सहित विभिन्न क्षेत्र शामिल है। उन्होनें चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान हिमाचल प्रदेश राज्य के लिए पीएमजेवीके के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं की जानकारी विवरण सहित सदन में प्रस्तुत की। केंद्रीय मंत्री ने आगे बताते हुए कहा कि मंत्रालय ने छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों अर्थात बौद्ध, ईसाई, जैन, मुस्लिम, पारसी एवं सिखों के शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए मैट्रिक पूर्व छात्रवृति योजना, मैट्रिकोत्तर छात्रवृति योजना तथा मैरिट सह साधान आधारित छात्रवृति योजना कार्यान्वित की है। इन योजनाओं का उदेश्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के गरीब एवं मेधावी छात्रों को व्यवसायिक एवं तकनीकी पाठयक्रमों में शिक्षा प्राप्त करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएम-विकास योजना में पारंपरिक कारीगरों को सहयोग प्रदान करने तथा स्वदेशी शिल्पों का बढ़ावा देने हेतु विशेष प्रावधान शामिल हैं। यह योजना स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, कौशन उन्नयन तथा पारंपरिक व्यवसायांे से जुड़े अल्पसंख्यक कारीगर समुदायों के लिए स्थाीय आजीविका सृजन पर बल देती है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक प्रशिक्षण उप घटक के प्रावधान के अनुसार कारीगरों को आवश्यकता आधारित शिल्प कार्यकलापों में एनएसक्यूएफ संरेखित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है इसके साथ ही उत्पाद, गुणवत्ता, डिजाइन एवं विपणन संपर्क सुधारने हेतु अनुकूलित कार्यशालाएं भी आयोजित की जाती है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएमजेवीके के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं का कार्यान्वयन, संचालन एवं देख रेख की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों व संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन की है। मंत्रालय राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के साथ आवधिक समीक्षा बैठकों के माध्यम से परियोजनाओं की वास्तविक एवं वित्तीय प्रगति की निगरानी करता है।
शिमला , 31 मार्च [ विशाल सूद ] ! डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने सदन में हिमाचल प्रदेश में अल्पसंख्यकों के लिए विकास एवं कल्याणकारी पहलों का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि चालू बजट चक्र के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य में अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों हेतु स्वीकृत विशिष्ट सामुदायिक अवसंरचना परियोजनाओं का ब्यौरा क्या है ?
राज्य के उन विद्यार्थियों का ब्यौरा क्या है जिनके वर्ष 2026-27 में प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्तियों के लिए शैक्षिक सशक्तिकरण हेतु वर्तमान राष्ट्रीय आबंटन से लाभान्वित होने की अपेक्षा है ? पारंपरिक कारीगरों को समर्थन देने और हिमालयी क्षेत्र के विशिष्ट स्वदेशी शिल्प को बढ़ावा देने के लिए पीएम-विकास योजना के अंतर्गत विशेष प्रावधानों का ब्यौरा क्या है और पिछले वर्षों में बजट के अल्प उपयोग के संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्त चिंताओं का ध्यान में रखते हुए राज्य में शत-प्रतिशत निधि उपयोग सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं ?
- विज्ञापन (Article Inline Ad) -
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित एक कंेद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसका उदेश्य देश भर के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में सामुदायिक अवसंरचना का सृजन करना है। इस योजना में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, महिला केंद्रित परियोजनाएं, पेयजल एवं स्वच्छता, खेल, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, पशुपालन तथा अन्य सामुदायिक अवसंरचना सहित विभिन्न क्षेत्र शामिल है। उन्होनें चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान हिमाचल प्रदेश राज्य के लिए पीएमजेवीके के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं की जानकारी विवरण सहित सदन में प्रस्तुत की।
केंद्रीय मंत्री ने आगे बताते हुए कहा कि मंत्रालय ने छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों अर्थात बौद्ध, ईसाई, जैन, मुस्लिम, पारसी एवं सिखों के शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए मैट्रिक पूर्व छात्रवृति योजना, मैट्रिकोत्तर छात्रवृति योजना तथा मैरिट सह साधान आधारित छात्रवृति योजना कार्यान्वित की है। इन योजनाओं का उदेश्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के गरीब एवं मेधावी छात्रों को व्यवसायिक एवं तकनीकी पाठयक्रमों में शिक्षा प्राप्त करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएम-विकास योजना में पारंपरिक कारीगरों को सहयोग प्रदान करने तथा स्वदेशी शिल्पों का बढ़ावा देने हेतु विशेष प्रावधान शामिल हैं। यह योजना स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, कौशन उन्नयन तथा पारंपरिक व्यवसायांे से जुड़े अल्पसंख्यक कारीगर समुदायों के लिए स्थाीय आजीविका सृजन पर बल देती है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक प्रशिक्षण उप घटक के प्रावधान के अनुसार कारीगरों को आवश्यकता आधारित शिल्प कार्यकलापों में एनएसक्यूएफ संरेखित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है इसके साथ ही उत्पाद, गुणवत्ता, डिजाइन एवं विपणन संपर्क सुधारने हेतु अनुकूलित कार्यशालाएं भी आयोजित की जाती है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएमजेवीके के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं का कार्यान्वयन, संचालन एवं देख रेख की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों व संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन की है। मंत्रालय राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के साथ आवधिक समीक्षा बैठकों के माध्यम से परियोजनाओं की वास्तविक एवं वित्तीय प्रगति की निगरानी करता है।
- विज्ञापन (Article Bottom Ad) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 1) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 2) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 3) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 4) -