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चम्बा ! हिमाचल की पावन धरा और शिव की नगरी के नाम से विख्यात चंबा का ऐतिहासिक चौगान बुधवार को एक ऐसे आध्यात्मिक पुनरुत्थान का साक्षी बनने जा रहा है, जिसका संबंध सीधे भारत के स्वर्णिम और संघर्षशील इतिहास से है। करीब 1000 वर्ष पूर्व जब राजा साहिल वर्मन ने चंबा रियासत की नींव रखी थी, लगभग उसी कालखंड में सोमनाथ के प्रथम ज्योतिर्लिंग पर विदेशी आक्रांताओं के हमले हो रहे थे। आज नियति ने इन दोनों ऐतिहासिक कड़ियों को एक सूत्र में पिरो दिया है। 1000 वर्ष पुराने चंबा शहर से सोमनाथ महादेव के उन प्राचीन और दिव्य अवशेषों की यात्रा शुरू हो रही है, जिन्हें सदियों तक गुमनामी में सुरक्षित रखा गया था। इतिहास गवाह है कि जब आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर को निशाना बनाया, तब समर्पित अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने अपनी जान की बाजी लगाकर ज्योतिर्लिंग के पावन अंशों को वहां से निकाल लिया था। पीढ़ियों तक इन अवशेषों को अत्यंत गोपनीयता और विधि-विधान के साथ संरक्षित रखा गया। हाल ही में, इन दिव्य अवशेषों को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को सौंपा गया, जिनके मार्गदर्शन में अब इन्हें जन-कल्याण के लिए पूरे हिमाचल के भ्रमण पर लाया गया है। चंबा से नाहन, 10 दिनों तक बहेगी भक्ति की बयार..आर्ट आफ लिविंग के मीडिया प्रबंधक मनुज शर्मा ने बताया कि स्वामी वीरूपाक्ष की देखरेख में द आर्ट आफ लिविंग और वैदिक धर्म संस्थान की ओर से आयोजित यह 10 दिवसीय हिमाचल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा प्रदेश के कोने-कोने को शिवमय करेगी। इस पावन यात्रा का आगाज बुधवार पहली अप्रैल को ऐतिहासिक चंबा से हो रहा है। इसके बाद दो अप्रैल को यात्रा कांगड़ा के कैलाश आश्रम पहुंचेगी, जहां से तीन अप्रैल को हमीरपुर और चार अप्रैल को ऊना के श्रद्धालुओं को महादेव के दर्शन सुलभ होंगे। भक्ति का यह सफर पांच अप्रैल को छोटी काशी मंडी और छह अप्रैल को देव घाटी कुल्लू में पड़ाव डालेगा। एक दिन के अंतराल के बाद आठ अप्रैल को सोलन और नौ अप्रैल को प्रदेश की राजधानी शिमला में भव्य आयोजन होंगे। अंततः 10 अप्रैल को नाहन में इस ऐतिहासिक यात्रा का भव्य समापन किया जाएगाचम्बा चौगान में बुधवार का विशेष आयोजन...बुधवार शाम को चंबा का वातावरण वेद मंत्रों और शिव भजनों से गुंजायमान रहेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ शाम 4:00 बजे गुरुकुल के वेद बटुकों की ओर से मंगलकारी वेद मंत्रोच्चारण के साथ किया जाएगा। इसके बाद शाम 4:30 बजे एक विशेष वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धालुओं को सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास और इन अवशेषों को बचाने के संघर्ष से रूबरू कराया जाएगा। शाम 5:00 बजे मुख्य पूजा का आयोजन होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु एक साथ सामूहिक ध्यान (गाइडेड मेडिटेशन) और दिव्य सत्संग के माध्यम से आत्मिक शांति का अनुभव करेंगे। यह आयोजन केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उस अटूट धैर्य का प्रतीक है, जिसने 1000 वर्षों तक अपनी विरासत को संजोए रखा। चंबा के लोगों के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अध्याय की शुरुआत उनकी प्राचीन नगरी से हो रही है।
चम्बा ! हिमाचल की पावन धरा और शिव की नगरी के नाम से विख्यात चंबा का ऐतिहासिक चौगान बुधवार को एक ऐसे आध्यात्मिक पुनरुत्थान का साक्षी बनने जा रहा है, जिसका संबंध सीधे भारत के स्वर्णिम और संघर्षशील इतिहास से है। करीब 1000 वर्ष पूर्व जब राजा साहिल वर्मन ने चंबा रियासत की नींव रखी थी, लगभग उसी कालखंड में सोमनाथ के प्रथम ज्योतिर्लिंग पर विदेशी आक्रांताओं के हमले हो रहे थे। आज नियति ने इन दोनों ऐतिहासिक कड़ियों को एक सूत्र में पिरो दिया है। 1000 वर्ष पुराने चंबा शहर से सोमनाथ महादेव के उन प्राचीन और दिव्य अवशेषों की यात्रा शुरू हो रही है, जिन्हें सदियों तक गुमनामी में सुरक्षित रखा गया था। इतिहास गवाह है कि जब आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर को निशाना बनाया, तब समर्पित अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने अपनी जान की बाजी लगाकर ज्योतिर्लिंग के पावन अंशों को वहां से निकाल लिया था। पीढ़ियों तक इन अवशेषों को अत्यंत गोपनीयता और विधि-विधान के साथ संरक्षित रखा गया। हाल ही में, इन दिव्य अवशेषों को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को सौंपा गया, जिनके मार्गदर्शन में अब इन्हें जन-कल्याण के लिए पूरे हिमाचल के भ्रमण पर लाया गया है।
चंबा से नाहन, 10 दिनों तक बहेगी भक्ति की बयार..
आर्ट आफ लिविंग के मीडिया प्रबंधक मनुज शर्मा ने बताया कि स्वामी वीरूपाक्ष की देखरेख में द आर्ट आफ लिविंग और वैदिक धर्म संस्थान की ओर से आयोजित यह 10 दिवसीय हिमाचल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा प्रदेश के कोने-कोने को शिवमय करेगी। इस पावन यात्रा का आगाज बुधवार पहली अप्रैल को ऐतिहासिक चंबा से हो रहा है। इसके बाद दो अप्रैल को यात्रा कांगड़ा के कैलाश आश्रम पहुंचेगी, जहां से तीन अप्रैल को हमीरपुर और चार अप्रैल को ऊना के श्रद्धालुओं को महादेव के दर्शन सुलभ होंगे। भक्ति का यह सफर पांच अप्रैल को छोटी काशी मंडी और छह अप्रैल को देव घाटी कुल्लू में पड़ाव डालेगा। एक दिन के अंतराल के बाद आठ अप्रैल को सोलन और नौ अप्रैल को प्रदेश की राजधानी शिमला में भव्य आयोजन होंगे। अंततः 10 अप्रैल को नाहन में इस ऐतिहासिक यात्रा का भव्य समापन किया जाएगा
चम्बा चौगान में बुधवार का विशेष आयोजन...
बुधवार शाम को चंबा का वातावरण वेद मंत्रों और शिव भजनों से गुंजायमान रहेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ शाम 4:00 बजे गुरुकुल के वेद बटुकों की ओर से मंगलकारी वेद मंत्रोच्चारण के साथ किया जाएगा। इसके बाद शाम 4:30 बजे एक विशेष वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धालुओं को सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास और इन अवशेषों को बचाने के संघर्ष से रूबरू कराया जाएगा। शाम 5:00 बजे मुख्य पूजा का आयोजन होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु एक साथ सामूहिक ध्यान (गाइडेड मेडिटेशन) और दिव्य सत्संग के माध्यम से आत्मिक शांति का अनुभव करेंगे। यह आयोजन केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उस अटूट धैर्य का प्रतीक है, जिसने 1000 वर्षों तक अपनी विरासत को संजोए रखा। चंबा के लोगों के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अध्याय की शुरुआत उनकी प्राचीन नगरी से हो रही है।
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