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शिमला , 30 मार्च [ विशाल सूद ] ! सुंदरनगर से भाजपा के विधायक व मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार के फैसलों पर जोरदार हमला बोलते हुए इसे हिमाचल के अपने शिक्षा बोर्ड को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का निर्णय बिना किसी ठोस अध्ययन और दूरदर्शिता के जल्दबाजी में लिया गया है, जिसका खामियाजा आने वाले समय में प्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षा तंत्र को भुगतना पड़ेगा। सदन में सरकार द्वारा दिए गए जवाब का हवाला देते हुए जमवाल ने कहा कि प्रदेश के लगभग 151 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को सीबीएसई से जोड़ा जा रहा है और इन्हें शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सीबीएसई के अंतर्गत संचालित किया जाएगा, जिसके लिए प्रति विद्यालय लगभग ₹45,000 खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर यह निर्णय किस आधार पर लिया गया और क्या इसके लिए कोई व्यापक शैक्षणिक या प्रशासनिक अध्ययन किया गया है। जमवाल ने कहा कि करीब 151 ऐसे विद्यालय, जो पहले हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से जुड़े थे, उन्हें सीबीएसई में शामिल करना सीधे तौर पर अपने ही बोर्ड को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्या हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से पढ़ा हुआ विद्यार्थी किसी भी स्तर पर सीबीएसई के विद्यार्थियों से कम है, जबकि हकीकत यह है कि प्रदेश के छात्र वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विश्वसनीय संस्था रही है, जिसने प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की है, लेकिन सरकार का यह कदम इसके अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस निर्णय से लगभग 450पेंशनर्स, 350 कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है, लेकिन सरकार ने उनके लिए कोई स्पष्ट नीति तक नहीं बनाई है, जो सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। जमवाल ने आरोप लगाया कि शिक्षक वर्ग इस फैसले के खिलाफ लगातार विरोध जता रहा है, लेकिन सरकार उनकी आवाज को सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि जब एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम पहले से ही हिमाचल प्रदेश बोर्ड और सीबीएसई दोनों में समान रूप से लागू है, तो केवल बोर्ड बदलने का कोई औचित्य नहीं बनता। वही शिक्षक, वही सिलेबस और वही विद्यार्थी होने के बावजूद यह बदलाव केवल दिखावा और भ्रम पैदा करने का प्रयास है। जमवाल ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर उन विद्यालयों को सीबीएसई से जोड़ रही है जहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और अधिक छात्र संख्या है, ताकि धीरे-धीरे हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को कमजोर कर समाप्त किया जा सके। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में प्रदेश का अपना शिक्षा बोर्ड अस्तित्व के संकट में पहुंच जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी और प्रदेश के हितों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा।
शिमला , 30 मार्च [ विशाल सूद ] ! सुंदरनगर से भाजपा के विधायक व मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार के फैसलों पर जोरदार हमला बोलते हुए इसे हिमाचल के अपने शिक्षा बोर्ड को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का निर्णय बिना किसी ठोस अध्ययन और दूरदर्शिता के जल्दबाजी में लिया गया है, जिसका खामियाजा आने वाले समय में प्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षा तंत्र को भुगतना पड़ेगा।
सदन में सरकार द्वारा दिए गए जवाब का हवाला देते हुए जमवाल ने कहा कि प्रदेश के लगभग 151 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को सीबीएसई से जोड़ा जा रहा है और इन्हें शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सीबीएसई के अंतर्गत संचालित किया जाएगा, जिसके लिए प्रति विद्यालय लगभग ₹45,000 खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर यह निर्णय किस आधार पर लिया गया और क्या इसके लिए कोई व्यापक शैक्षणिक या प्रशासनिक अध्ययन किया गया है।
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जमवाल ने कहा कि करीब 151 ऐसे विद्यालय, जो पहले हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से जुड़े थे, उन्हें सीबीएसई में शामिल करना सीधे तौर पर अपने ही बोर्ड को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्या हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से पढ़ा हुआ विद्यार्थी किसी भी स्तर पर सीबीएसई के विद्यार्थियों से कम है, जबकि हकीकत यह है कि प्रदेश के छात्र वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विश्वसनीय संस्था रही है, जिसने प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की है, लेकिन सरकार का यह कदम इसके अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस निर्णय से लगभग 450पेंशनर्स, 350 कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है, लेकिन सरकार ने उनके लिए कोई स्पष्ट नीति तक नहीं बनाई है, जो सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। जमवाल ने आरोप लगाया कि शिक्षक वर्ग इस फैसले के खिलाफ लगातार विरोध जता रहा है, लेकिन सरकार उनकी आवाज को सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि जब एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम पहले से ही हिमाचल प्रदेश बोर्ड और सीबीएसई दोनों में समान रूप से लागू है, तो केवल बोर्ड बदलने का कोई औचित्य नहीं बनता। वही शिक्षक, वही सिलेबस और वही विद्यार्थी होने के बावजूद यह बदलाव केवल दिखावा और भ्रम पैदा करने का प्रयास है।
जमवाल ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर उन विद्यालयों को सीबीएसई से जोड़ रही है जहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और अधिक छात्र संख्या है, ताकि धीरे-धीरे हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को कमजोर कर समाप्त किया जा सके। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में प्रदेश का अपना शिक्षा बोर्ड अस्तित्व के संकट में पहुंच जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी और प्रदेश के हितों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा।
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