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चम्बा ! द आर्ट आफ लिविंग के तत्वावधान में पहली अप्रैल को सजेगा भव्य आध्यात्मिक दरबार सदियों तक अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने सुरक्षित रखे थे ज्योतिर्लिंग के पावन अंश गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के मार्गदर्शन में ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां पूरी चंबा के ऐतिहासिक चौगान नंबर-दो में बुधवार यानी पहली अप्रैल को एक ऐसा आध्यात्मिक इतिहास रचा जाएगा, जिसका गवाह बनने के लिए श्रद्धालु हजारों वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे थे। भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव से जुड़े अत्यंत प्राचीन और पवित्र अवशेषों का भव्य पूजन एवं दर्शन कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। द आर्ट आफ लिविंग के तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह समागम श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के उस गौरवशाली अध्याय से रूबरू कराएगा, जिसे सदियों तक सहेज कर रखा गया था। विदेशी आक्रमणों के दौरान जब सोमनाथ मंदिर को क्षति पहुंचाई गई थी, तब समर्पित हिंदू पंडितों और अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर ज्योतिर्लिंग के टूटे हुए पावन अंशों को सुरक्षित बचा लिया था। इन अवशेषों को कई पीढ़ियों तक अत्यंत गोपनीयता और पूर्ण विधि-विधान के साथ संरक्षित रखा गया। हाल ही में इन दुर्लभ अवशेषों को आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर को सौंपा गया, जिनके मार्गदर्शन में अब इन्हें जन-कल्याण और दर्शन के लिए चंबा लाया जा रहा है।शाम चार बजे से शुरू होगा भक्ति का प्रवाह..कार्यक्रम का शुभारंभ शाम 4:00 बजे गुरुकुल के वेद बटुकों की ओर से किए जाने वाले मंगलकारी वेद मंत्रोच्चारण के साथ होगा। इसके बाद शाम 4:30 बजे एक विशेष वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धालुओं को मूल ज्योतिर्लिंग के इतिहास और गुरुदेव के आध्यात्मिक विजन से परिचित कराया जाएगा। शाम 4:45 बजे पूजा के महत्व और विधि पर प्रकाश डाला जाएगा, जिसके तुरंत बाद शाम 5:00 बजे मुख्य पूजा का भव्य शुभारंभ होगा। इस दौरान सामूहिक ध्यान (गाइडेड मेडिटेशन) के साथ-साथ दर्शन की कतारें लगेंगी और दिव्य सत्संग के माध्यम से पूरा वातावरण शिवमय हो जाएगा।संकल्प और साधना का संगम...आयोजकों के अनुसार, यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा के संचार का माध्यम है। श्रद्धालु यहां पूजा के साथ विशेष संकल्प भी ले सकेंगे। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के समय लिया गया संकल्प मन को एकाग्र कर आत्मिक शांति प्रदान करता है। गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर के अनुसार, ये अवशेष केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक हैं। -श्रद्धालुओं से अपील..आर्ट आफ लिविंग चंबा इकाई ने समस्त क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में चौगान नंबर-दो पहुंचकर इस ऐतिहासिक और दुर्लभ अवसर के सहभागी बनें। कार्यक्रम के संबंध में किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी के लिए इच्छुक श्रद्धालु दूरभाष पर आयोजकों से संपर्क कर सकते हैं। शिव भक्ति में डूबने और सनातन परंपरा से जुड़ने के लिए चंबा अब पूरी तरह तैयार है।
चम्बा ! द आर्ट आफ लिविंग के तत्वावधान में पहली अप्रैल को सजेगा भव्य आध्यात्मिक दरबार सदियों तक अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने सुरक्षित रखे थे ज्योतिर्लिंग के पावन अंश गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के मार्गदर्शन में ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां पूरी चंबा के ऐतिहासिक चौगान नंबर-दो में बुधवार यानी पहली अप्रैल को एक ऐसा आध्यात्मिक इतिहास रचा जाएगा, जिसका गवाह बनने के लिए श्रद्धालु हजारों वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे थे। भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव से जुड़े अत्यंत प्राचीन और पवित्र अवशेषों का भव्य पूजन एवं दर्शन कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। द आर्ट आफ लिविंग के तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह समागम श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के उस गौरवशाली अध्याय से रूबरू कराएगा, जिसे सदियों तक सहेज कर रखा गया था। विदेशी आक्रमणों के दौरान जब सोमनाथ मंदिर को क्षति पहुंचाई गई थी, तब समर्पित हिंदू पंडितों और अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर ज्योतिर्लिंग के टूटे हुए पावन अंशों को सुरक्षित बचा लिया था। इन अवशेषों को कई पीढ़ियों तक अत्यंत गोपनीयता और पूर्ण विधि-विधान के साथ संरक्षित रखा गया। हाल ही में इन दुर्लभ अवशेषों को आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर को सौंपा गया, जिनके मार्गदर्शन में अब इन्हें जन-कल्याण और दर्शन के लिए चंबा लाया जा रहा है।
शाम चार बजे से शुरू होगा भक्ति का प्रवाह..
कार्यक्रम का शुभारंभ शाम 4:00 बजे गुरुकुल के वेद बटुकों की ओर से किए जाने वाले मंगलकारी वेद मंत्रोच्चारण के साथ होगा। इसके बाद शाम 4:30 बजे एक विशेष वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धालुओं को मूल ज्योतिर्लिंग के इतिहास और गुरुदेव के आध्यात्मिक विजन से परिचित कराया जाएगा। शाम 4:45 बजे पूजा के महत्व और विधि पर प्रकाश डाला जाएगा, जिसके तुरंत बाद शाम 5:00 बजे मुख्य पूजा का भव्य शुभारंभ होगा। इस दौरान सामूहिक ध्यान (गाइडेड मेडिटेशन) के साथ-साथ दर्शन की कतारें लगेंगी और दिव्य सत्संग के माध्यम से पूरा वातावरण शिवमय हो जाएगा।
संकल्प और साधना का संगम...
आयोजकों के अनुसार, यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा के संचार का माध्यम है। श्रद्धालु यहां पूजा के साथ विशेष संकल्प भी ले सकेंगे। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के समय लिया गया संकल्प मन को एकाग्र कर आत्मिक शांति प्रदान करता है। गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर के अनुसार, ये अवशेष केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक हैं।
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श्रद्धालुओं से अपील..
आर्ट आफ लिविंग चंबा इकाई ने समस्त क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में चौगान नंबर-दो पहुंचकर इस ऐतिहासिक और दुर्लभ अवसर के सहभागी बनें। कार्यक्रम के संबंध में किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी के लिए इच्छुक श्रद्धालु दूरभाष पर आयोजकों से संपर्क कर सकते हैं। शिव भक्ति में डूबने और सनातन परंपरा से जुड़ने के लिए चंबा अब पूरी तरह तैयार है।
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