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कांगड़ा , 19 मार्च [ विशाल सूद ] ! शक्तिपीठ ज्वालामुखी में आज चैत्र नवरात्रों व हिंदू नव बर्ष का भव्य आगाज किया गया। पहले दिन सुबह 5 बजे से ही दरवार के कपाट भक्तो के लिए खोल दिये गए। शक्तिपीठ में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। 5 बजे सुबह आरती के बाद श्रद्धालु व स्थानीय लोग दर्शन के लिए जा सके और नवरात्रि व जागरण करने वाले माता की ज्योति अपने साथ लेकर गए। मेले के पहले दिन पूरे मंदिर परिसर व गर्भ गृह को रंग बिरंगी लाइट्स व फूलों से सजाया गया है।मां के जयकारों से मां का दरबार गूंज उठा और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी, होमगार्ड, पुलिसकर्मी और बलंटियर तैनात किए गए हैं और जगह जगह पर पुलिस का पहरा है। मन्दिर में श्रद्धालुओं की सुख सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। शहर में जगह जगह ड्रोन के जरिये नजर रखी जा रही है। सुरक्षा की दृष्टि से शहर को 7 सेक्टर में बांटा गया है और 150 पुलिस जवान व अतिरिक्त होमगार्ड्स व्यवस्था के लिए तैनात किए गए हैं, 80 सीसीटीवी व 60 अतिरिक्त अस्थाई कर्मी भी मन्दिर में सेवाएं दे रहे है।पुजारी व न्यास सदस्य पुजारी अविनेद्र शर्मा ने बताया कि आज से चैत्र नवरात्रों का भव्य आगाज हो गया है जोकि 27 मार्च तक चलेगा और आज ही हिन्दू नव बर्ष का भी शुभ आरम्भ हुआ है। पहले दिन काफी संख्या में श्रद्धालुओं व स्थानीय निवासियों ने माता ज्वाला की पवित्र ज्योतियो के दर्शन किये और माता की ज्योति लेकर घरों में स्थापित की हैं। इन नवरात्रो का ज्वालाजी में बिशेष महत्व है और देश के कोने कोने से लोग यहाँ पहुँच कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा अखंड ज्योति से जागरण व घर मे घट स्थापना करते हैं। वहीं बाहरी राज्यों से आये श्रद्धालुओ ने बताया की आज चैत्र नवरात्रो के पहले दिन माता ज्वालामुखी के दर्शनों का आशीर्वाद मिला व प्रसाशन के प्रबंध पुख्ता हैँ। वहीं आज चैत्र नवरात्र के पहले दिन वाइस चाँसलर सेंट्रल यूनिवर्सिटी हिमाचल एस पी बंसल ने भी माता ज्वालामुखी का आशीर्वाद लिया और बताया की आज पहले दिन माता रानी का आशीर्वाद लिया और मंदिर प्रसाशन के सभी इंतजाम बेहतर हैँ, भीड़ होने के बाबजूद सभी को लाइनों में दर्शन करवाए जाये रहे हैँ। मंदिर मार्ग वाहनों के लिए प्रतिबंधित है और पैदल बस स्टैंड से आते हुए माता के दर्शन करने का अलोलिक अनुभव हुआ।
कांगड़ा , 19 मार्च [ विशाल सूद ] ! शक्तिपीठ ज्वालामुखी में आज चैत्र नवरात्रों व हिंदू नव बर्ष का भव्य आगाज किया गया। पहले दिन सुबह 5 बजे से ही दरवार के कपाट भक्तो के लिए खोल दिये गए। शक्तिपीठ में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली।
5 बजे सुबह आरती के बाद श्रद्धालु व स्थानीय लोग दर्शन के लिए जा सके और नवरात्रि व जागरण करने वाले माता की ज्योति अपने साथ लेकर गए। मेले के पहले दिन पूरे मंदिर परिसर व गर्भ गृह को रंग बिरंगी लाइट्स व फूलों से सजाया गया है।मां के जयकारों से मां का दरबार गूंज उठा और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी, होमगार्ड, पुलिसकर्मी और बलंटियर तैनात किए गए हैं और जगह जगह पर पुलिस का पहरा है। मन्दिर में श्रद्धालुओं की सुख सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। शहर में जगह जगह ड्रोन के जरिये नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा की दृष्टि से शहर को 7 सेक्टर में बांटा गया है और 150 पुलिस जवान व अतिरिक्त होमगार्ड्स व्यवस्था के लिए तैनात किए गए हैं, 80 सीसीटीवी व 60 अतिरिक्त अस्थाई कर्मी भी मन्दिर में सेवाएं दे रहे है।पुजारी व न्यास सदस्य पुजारी अविनेद्र शर्मा ने बताया कि आज से चैत्र नवरात्रों का भव्य आगाज हो गया है जोकि 27 मार्च तक चलेगा और आज ही हिन्दू नव बर्ष का भी शुभ आरम्भ हुआ है।
पहले दिन काफी संख्या में श्रद्धालुओं व स्थानीय निवासियों ने माता ज्वाला की पवित्र ज्योतियो के दर्शन किये और माता की ज्योति लेकर घरों में स्थापित की हैं। इन नवरात्रो का ज्वालाजी में बिशेष महत्व है और देश के कोने कोने से लोग यहाँ पहुँच कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा अखंड ज्योति से जागरण व घर मे घट स्थापना करते हैं।
वहीं बाहरी राज्यों से आये श्रद्धालुओ ने बताया की आज चैत्र नवरात्रो के पहले दिन माता ज्वालामुखी के दर्शनों का आशीर्वाद मिला व प्रसाशन के प्रबंध पुख्ता हैँ। वहीं आज चैत्र नवरात्र के पहले दिन वाइस चाँसलर सेंट्रल यूनिवर्सिटी हिमाचल एस पी बंसल ने भी माता ज्वालामुखी का आशीर्वाद लिया और बताया की आज पहले दिन माता रानी का आशीर्वाद लिया और मंदिर प्रसाशन के सभी इंतजाम बेहतर हैँ, भीड़ होने के बाबजूद सभी को लाइनों में दर्शन करवाए जाये रहे हैँ।
मंदिर मार्ग वाहनों के लिए प्रतिबंधित है और पैदल बस स्टैंड से आते हुए माता के दर्शन करने का अलोलिक अनुभव हुआ।
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