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सिरमौर , 31 मार्च [ विशाल सूद ] : शिलाई विधानसभा क्षेत्र के कांटी मशवा अंतर्गत आने वाले गांव कुंअर-कुनेर में इन दिनों हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। यहां के ग्रामीण दहशत के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। आरोप है कि ऊपर पहाड़ों में हो रही ब्लास्टिंग और अवैध माइनिंग के चलते भारी मात्रा में मलबा गांव की ओर आ रहा है, जिससे खेत-खलिहान तबाह हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बड़े-बड़े पत्थर लगातार नीचे गिर रहे हैं, जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोग अपने ही घरों में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। “न जाने कब कोई पत्थर आकर जान-माल का नुकसान कर दे,” इसी डर के साथ लोग दिन-रात गुजार रहे हैं। गांव की महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने इस समस्या को लेकर उपायुक्त सिरमौर को शिकायत पत्र भी सौंपा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। इससे लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मलबे और पत्थरों के कारण न केवल उनकी खेती प्रभावित हो रही है, बल्कि गांव का प्राचीन मंदिर भी खतरे की जद में है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बड़ा नुकसान हो सकता है। मीडिया से बातचीत में ग्रामीणों ने कहा कि वे “घुट-घुट कर जीने को मजबूर” हैं और प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही। ग्रामीणों की मांग है कि पहाड़ों में हो रही अवैध माइनिंग पर तुरंत रोक लगाई जाए और ब्लास्टिंग गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई कर गांव की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब जागता है और इन भयभीत ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
सिरमौर , 31 मार्च [ विशाल सूद ] : शिलाई विधानसभा क्षेत्र के कांटी मशवा अंतर्गत आने वाले गांव कुंअर-कुनेर में इन दिनों हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। यहां के ग्रामीण दहशत के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। आरोप है कि ऊपर पहाड़ों में हो रही ब्लास्टिंग और अवैध माइनिंग के चलते भारी मात्रा में मलबा गांव की ओर आ रहा है, जिससे खेत-खलिहान तबाह हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बड़े-बड़े पत्थर लगातार नीचे गिर रहे हैं, जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोग अपने ही घरों में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। “न जाने कब कोई पत्थर आकर जान-माल का नुकसान कर दे,” इसी डर के साथ लोग दिन-रात गुजार रहे हैं।
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गांव की महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने इस समस्या को लेकर उपायुक्त सिरमौर को शिकायत पत्र भी सौंपा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। इससे लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मलबे और पत्थरों के कारण न केवल उनकी खेती प्रभावित हो रही है, बल्कि गांव का प्राचीन मंदिर भी खतरे की जद में है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बड़ा नुकसान हो सकता है।
मीडिया से बातचीत में ग्रामीणों ने कहा कि वे “घुट-घुट कर जीने को मजबूर” हैं और प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही। ग्रामीणों की मांग है कि पहाड़ों में हो रही अवैध माइनिंग पर तुरंत रोक लगाई जाए और ब्लास्टिंग गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई कर गांव की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब जागता है और इन भयभीत ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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