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शिमला , 31 मार्च [ विशाल सूद ] ! चेस्टर हिल प्रोजेक्ट्स मामले में अधिकारियों में छिड़ी आपसी जंग को विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि सीएस संजय गुप्ता पर गंभीर आरोप लगे हैं और अब सीएस ने अपनी सफाई में कुछ अन्य अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं जिन पर मुख्यमंत्री ने चुप्पी साधी है और मामले की जानकारी न होने की बात कह रहे हैं जबकि सरकार के संरक्षण के बिना इतना बड़ा भ्रष्टाचार नहीं हो सकता। भाजपा विधायकों ने भी दो बार सदन में मुद्दा उठाया और सरकार से जवाब मांगा कि 118 का उल्लंघन हुआ है। बेनामी डील का आरोप लग रहा है। एसडीएम स्तर के अधिकारी ने विस्तृत जांच के बाद निर्णय दिया है। सबसे बड़े अधिकारी से जुड़ा मामला हैं इसलिए सदन को बताया जाए कि मामला क्या है? अब पत्रकारों से मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि उन्हें तो इस विषय की जानकारी नहीं हैं। मैं नहीं मानता कि उन्हें यह बात पता नहीं हैं। सूबे के मुखिया को अपने सबसे बड़े ब्यूरोक्रेट के बारे में जानकारी नहीं हैं। कैसे सरकार चल रही है। आखिर इस खामोशी का क्या कारण हैं? मुख्यमंत्री की इस बेबसी का क्या कारण हैं? आख़िर वह कुछ बोलने की स्थिति में क्यों नहीं हैं? क्या कारण हैं कि इतने बड़े मामले में वह जानकारी न होने का बहाना बना रहे हैं? इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए क्योंकि आरोप सीएस पर पर है और अब उन्होंने अन्य अधिकारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं।मुख्यमंत्री पूरी तरह कंप्रोमाइज़्ड हैं। इसलिए वह कार्रवाई नहीं कर पा रहे है। जब सुक्खू जी विपक्ष में थे तो एक सीएस के ऊपर आरोप लगा रह थे, भ्रष्ट बता रहे थे, जिसे हमारी सरकार ने हटाया लेकिन सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ने उसे अपना प्रिंसिपल एडवाइजर लगा दिया।
शिमला , 31 मार्च [ विशाल सूद ] ! चेस्टर हिल प्रोजेक्ट्स मामले में अधिकारियों में छिड़ी आपसी जंग को विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि सीएस संजय गुप्ता पर गंभीर आरोप लगे हैं और अब सीएस ने अपनी सफाई में कुछ अन्य अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं जिन पर मुख्यमंत्री ने चुप्पी साधी है और मामले की जानकारी न होने की बात कह रहे हैं जबकि सरकार के संरक्षण के बिना इतना बड़ा भ्रष्टाचार नहीं हो सकता।
भाजपा विधायकों ने भी दो बार सदन में मुद्दा उठाया और सरकार से जवाब मांगा कि 118 का उल्लंघन हुआ है। बेनामी डील का आरोप लग रहा है। एसडीएम स्तर के अधिकारी ने विस्तृत जांच के बाद निर्णय दिया है। सबसे बड़े अधिकारी से जुड़ा मामला हैं इसलिए सदन को बताया जाए कि मामला क्या है? अब पत्रकारों से मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि उन्हें तो इस विषय की जानकारी नहीं हैं। मैं नहीं मानता कि उन्हें यह बात पता नहीं हैं।
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सूबे के मुखिया को अपने सबसे बड़े ब्यूरोक्रेट के बारे में जानकारी नहीं हैं। कैसे सरकार चल रही है। आखिर इस खामोशी का क्या कारण हैं? मुख्यमंत्री की इस बेबसी का क्या कारण हैं? आख़िर वह कुछ बोलने की स्थिति में क्यों नहीं हैं? क्या कारण हैं कि इतने बड़े मामले में वह जानकारी न होने का बहाना बना रहे हैं? इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए क्योंकि आरोप सीएस पर पर है और अब उन्होंने अन्य अधिकारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं।मुख्यमंत्री पूरी तरह कंप्रोमाइज़्ड हैं। इसलिए वह कार्रवाई नहीं कर पा रहे है। जब सुक्खू जी विपक्ष में थे तो एक सीएस के ऊपर आरोप लगा रह थे, भ्रष्ट बता रहे थे, जिसे हमारी सरकार ने हटाया लेकिन सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ने उसे अपना प्रिंसिपल एडवाइजर लगा दिया।
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