महिला कामगारों समेत मजदूर नेता प्रदीप ने डीसी कार्यालय के बाहर किया धरना प्रदर्शन, एसडीएम के आदेशों के बाद भी कंपनी ने वापस नहीं रखी महिलाएं।
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सिरमौर , 22 जनवरी [ विशाल सूद ] ! औद्योगिक क्षेत्र पांवटा साहिब के गोंदपुर में एक निजी कंपनी द्वारा महिलाओं को बिना नोटिस कंपनी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था जिसके बाद आज परेशान महिला कामगारों ने मजदूर नेता प्रदीप कुमार की अगुवाई में डीसी कार्यालय नाहन के बाहर धरना प्रदर्शन किया। मीडिया से बात करते हुए मजदूर नेता प्रदीप कुमार ने बताया कि यहां एक निजी कंपनी ने महिला कामगारों को बिना नोटिस कंपनी से बाहर कर दिया है कई बार इस मामले में लेबर इंस्पेक्टर समेत एसडीएम को भी शिकायत सौंपी गई लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया है। आज परेशान महिला कामगारों ने डीसी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया हैं। उनकी मांग है कि कंपनी प्रबंधन की मनमर्जी रोकी जाए। प्रशासन मामले में हस्ताक्षर करें और निकाले गए कामगारों को दोबारा कंपनी में काम पर रखा जाए। वहीं महिला कामगारों ने कहा कि 15 वर्षों बाद कंपनी ने बिना नोटिस के उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है जिससे उन्हें अब भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि अगर कंपनी ने उन्हें रखना नहीं है तो जो इतने सालों का उनका हिसाब बनता है वो महिलाओं को अदा कर दिया जाए।
सिरमौर , 22 जनवरी [ विशाल सूद ] ! औद्योगिक क्षेत्र पांवटा साहिब के गोंदपुर में एक निजी कंपनी द्वारा महिलाओं को बिना नोटिस कंपनी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था जिसके बाद आज परेशान महिला कामगारों ने मजदूर नेता प्रदीप कुमार की अगुवाई में डीसी कार्यालय नाहन के बाहर धरना प्रदर्शन किया।
मीडिया से बात करते हुए मजदूर नेता प्रदीप कुमार ने बताया कि यहां एक निजी कंपनी ने महिला कामगारों को बिना नोटिस कंपनी से बाहर कर दिया है कई बार इस मामले में लेबर इंस्पेक्टर समेत एसडीएम को भी शिकायत सौंपी गई लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया है। आज परेशान महिला कामगारों ने डीसी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया हैं। उनकी मांग है कि कंपनी प्रबंधन की मनमर्जी रोकी जाए। प्रशासन मामले में हस्ताक्षर करें और निकाले गए कामगारों को दोबारा कंपनी में काम पर रखा जाए।
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वहीं महिला कामगारों ने कहा कि 15 वर्षों बाद कंपनी ने बिना नोटिस के उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है जिससे उन्हें अब भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि अगर कंपनी ने उन्हें रखना नहीं है तो जो इतने सालों का उनका हिसाब बनता है वो महिलाओं को अदा कर दिया जाए।
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