सुक्खू सरकार जनता के बीच जाने से घबरा रही है, संभावित हार के डर से चुनावों को लगातार टाल रही कांग्रेस : भाजपा विधायक
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सोलन , 04 फरवरी [ विशाल सूद ] ! भाजपा नेता एवं विधायक रणधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव टालने के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एसएलपी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रणधीर शर्मा ने कहा कि इस एसएलपी से यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस पार्टी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव करवाना ही नहीं चाहती और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का हर संभव प्रयास कर रही है। रणधीर शर्मा ने कहा कि हमारे संविधान में स्पष्ट व्यवस्था है कि चाहे पंचायती राज संस्थाएं हों, शहरी निकाय हों, विधानसभा हो या लोकसभा—हर संस्था के चुनाव पांच वर्षों के भीतर अनिवार्य रूप से करवाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। लेकिन वर्तमान सुक्खू सरकार शुरू से ही इन चुनावों को टालने की साजिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पहले चुनाव टालने के लिए संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग से टकराव लिया, आयोग के निर्देशों की पालना नहीं की, अधिसूचनाओं को नजरअंदाज किया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास किया। रणधीर शर्मा ने कहा कि जब एक जनहित याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्णय दिया कि 30 अप्रैल 2026 तक पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव करवाए जाएं, तब भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उस निर्णय पर टिप्पणी कर न्यायालय की अवमानना जैसा आचरण किया। अब सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर यह सरकार फिर चुनावों को टालने की कोशिश कर रही है। भाजपा विधायक ने कहा कि इससे साफ साबित होता है कि सुक्खू सरकार लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती। इसका रवैया तानाशाहीपूर्ण है और यह सरकार पंचायती राज तथा शहरी निकाय चुनावों को टालने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है। रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार तीन वर्षों में प्रदेश में कोई जनहित का कार्य नहीं कर पाई। न कोई विकास कार्य हुए, न कोई नई जनकल्याणकारी योजना शुरू हुई। उल्टा पिछली भाजपा सरकार के समय चल रहे विकास कार्य ठप कर दिए गए, खोले गए संस्थान बंद कर दिए गए और कई जनकल्याणकारी योजनाओं को समाप्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार चुनावी वादे तो दूर, चुनावी गारंटियां तक पूरी नहीं कर पाई। इसलिए अब यह सरकार जनता के बीच जाने से घबरा रही है। संभावित हार को देखकर कांग्रेस सरकार बार-बार चुनावों को टालने का प्रयास कर रही है। रणधीर शर्मा ने कहा कि यह भी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को हटाकर प्रशासक नियुक्त कर दिए हैं, जो पूर्णतः अलोकतांत्रिक, गैर-संवैधानिक और जनता के अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस लोकतंत्र विरोधी, तानाशाहीपूर्ण और चुनाव टालने वाली नीति की कड़े शब्दों में निंदा करती है और मांग करती है कि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव तुरंत करवाए जाएं ताकि जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिल सके।
सोलन , 04 फरवरी [ विशाल सूद ] ! भाजपा नेता एवं विधायक रणधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव टालने के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एसएलपी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रणधीर शर्मा ने कहा कि इस एसएलपी से यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस पार्टी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव करवाना ही नहीं चाहती और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का हर संभव प्रयास कर रही है।
रणधीर शर्मा ने कहा कि हमारे संविधान में स्पष्ट व्यवस्था है कि चाहे पंचायती राज संस्थाएं हों, शहरी निकाय हों, विधानसभा हो या लोकसभा—हर संस्था के चुनाव पांच वर्षों के भीतर अनिवार्य रूप से करवाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। लेकिन वर्तमान सुक्खू सरकार शुरू से ही इन चुनावों को टालने की साजिश कर रही है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पहले चुनाव टालने के लिए संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग से टकराव लिया, आयोग के निर्देशों की पालना नहीं की, अधिसूचनाओं को नजरअंदाज किया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास किया।
रणधीर शर्मा ने कहा कि जब एक जनहित याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्णय दिया कि 30 अप्रैल 2026 तक पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव करवाए जाएं, तब भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उस निर्णय पर टिप्पणी कर न्यायालय की अवमानना जैसा आचरण किया। अब सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर यह सरकार फिर चुनावों को टालने की कोशिश कर रही है।
भाजपा विधायक ने कहा कि इससे साफ साबित होता है कि सुक्खू सरकार लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती। इसका रवैया तानाशाहीपूर्ण है और यह सरकार पंचायती राज तथा शहरी निकाय चुनावों को टालने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है।
रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार तीन वर्षों में प्रदेश में कोई जनहित का कार्य नहीं कर पाई। न कोई विकास कार्य हुए, न कोई नई जनकल्याणकारी योजना शुरू हुई। उल्टा पिछली भाजपा सरकार के समय चल रहे विकास कार्य ठप कर दिए गए, खोले गए संस्थान बंद कर दिए गए और कई जनकल्याणकारी योजनाओं को समाप्त कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार चुनावी वादे तो दूर, चुनावी गारंटियां तक पूरी नहीं कर पाई। इसलिए अब यह सरकार जनता के बीच जाने से घबरा रही है। संभावित हार को देखकर कांग्रेस सरकार बार-बार चुनावों को टालने का प्रयास कर रही है।
रणधीर शर्मा ने कहा कि यह भी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को हटाकर प्रशासक नियुक्त कर दिए हैं, जो पूर्णतः अलोकतांत्रिक, गैर-संवैधानिक और जनता के अधिकारों का हनन है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस लोकतंत्र विरोधी, तानाशाहीपूर्ण और चुनाव टालने वाली नीति की कड़े शब्दों में निंदा करती है और मांग करती है कि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव तुरंत करवाए जाएं ताकि जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिल सके।
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