जनरल साहब का अपमान, बड़े नेताओं का बहिष्कार, खाली कुर्सियों ने बताई कार्यक्रम की हकीकत
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हमीरपुर , 17 जनवरी [ विशाल सूद ] ! सैनिकों के सम्मान के नाम पर आयोजित समारोह वास्तव में एक राजनीतिक मंच बनकर रह गया, जहाँ न सम्मान की भावना दिखी और न ही सैनिकों के प्रति संवेदनशीलता। यह आरोप युवा कांग्रेस नेता उदय कुमार ने पूर्व विधायक राजिंदर राणा व उनके द्वारा संचालित सर्व कल्याणकारी संस्था पर लगाए। उदय कुमार ने कहा कि जिस जनरल साहब के नाम पर पूरे समारोह का प्रचार किया गया, उनका नाम निमंत्रण पत्र में सबसे नीचे दर्ज किया गया। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर वायरल किए गए पोस्टरों से उनका फोटो तक गायब रखा गया और कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई होल्डिंग्स में भी उनका चित्र सबसे अंत में लगाया गया, जो कि सैनिकों के सम्मान के साथ सीधा मज़ाक है। उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि जिस वाहन में सम्मानपूर्वक राज्यपाल महोदय को मंच तक लाया गया, उसी वाहन में जनरल साहब को स्थान तक नहीं दिया गया। यह घटना पूर्व विधायक की मानसिकता और सैनिकों के प्रति उनके दोहरे रवैये को उजागर करती है। उदय कुमार ने आरोप लगाया कि यह तथाकथित सैनिक सम्मान समारोह पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा हुआ था। भाजपा नेताओं को बुलाया गया, लेकिन प्रदेश व केंद्र स्तर के कई बड़े नेताओं ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाना ही उचित समझा। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर, भोरंज से पूर्व विधायक अनिल धीमान, बड़सर से पूर्व विधायक बलदेव शर्मा, पूर्व चेयरमैन नवीन शर्मा, पूर्व विधायक उर्मिल ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, विपिन परमार जैसे कई दिग्गज नेताओं ने कार्यक्रम का खुला बहिष्कार किया। भीड़ जुटाने के मामले में भी संस्था और भाजपा दोनों पूरी तरह विफल रहे। 10 हजार की भीड़ का दावा करने वाले आयोजकों को मात्र 3560 कुर्सियों तक सीमित होना पड़ा, जिनमें से आधी से अधिक कुर्सियां स्थानीय जनता की बेरुखी के कारण खाली रहीं। हालात ऐसे बने कि विधायक आशीष शर्मा, सुधीर शर्मा और आईडी लखपाल को भीड़ जुटाने के लिए मोर्चा संभालना पड़ा, तब जाकर कुछ कुर्सियां भर पाईं। उदय कुमार ने कहा कि सैनिकों के सम्मान में भी घोर पक्षपात किया गया। पूर्व विधायक राजिंदर राणा ने अपने सात चहेतों को महामहिम राज्यपाल से सम्मानित करवाया, जबकि अन्य सैनिकों को बागों में पुरस्कार बांटकर औपचारिकता निभा दी गई। नेता प्रतिपक्ष और राजा लक्ष्य राज मेवाड़ के संबोधन तक आते-आते आधी से ज्यादा जनता पंडाल छोड़ चुकी थी। खाली कुर्सियों को संबोधित करना इस कार्यक्रम की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है, पिछली बार भी जनता पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के संबोधन के बाद पंडाल छोड़कर चली गई थी। शायद इसी डर से इस बार पूर्व विधायक ने उनका नाम निमंत्रण पत्र में शामिल करना भी उचित नहीं समझा। उदय कुमार ने साफ कहा कि यह पूरा कार्यक्रम पूरी तरह विफल रहा। स्थानीय जनता ने इसे नकार दिया, मजबूरी में बाहर से लोगों को बुलाना पड़ा। सैनिक सम्मान के नाम पर किया गया यह राजनीतिक आयोजन जनता और सैनिकों — दोनों की भावनाओं से खिलवाड़ है, जिसे सुजानपुर की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
हमीरपुर , 17 जनवरी [ विशाल सूद ] ! सैनिकों के सम्मान के नाम पर आयोजित समारोह वास्तव में एक राजनीतिक मंच बनकर रह गया, जहाँ न सम्मान की भावना दिखी और न ही सैनिकों के प्रति संवेदनशीलता। यह आरोप युवा कांग्रेस नेता उदय कुमार ने पूर्व विधायक राजिंदर राणा व उनके द्वारा संचालित सर्व कल्याणकारी संस्था पर लगाए।
उदय कुमार ने कहा कि जिस जनरल साहब के नाम पर पूरे समारोह का प्रचार किया गया, उनका नाम निमंत्रण पत्र में सबसे नीचे दर्ज किया गया। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर वायरल किए गए पोस्टरों से उनका फोटो तक गायब रखा गया और कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई होल्डिंग्स में भी उनका चित्र सबसे अंत में लगाया गया, जो कि सैनिकों के सम्मान के साथ सीधा मज़ाक है।
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उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि जिस वाहन में सम्मानपूर्वक राज्यपाल महोदय को मंच तक लाया गया, उसी वाहन में जनरल साहब को स्थान तक नहीं दिया गया। यह घटना पूर्व विधायक की मानसिकता और सैनिकों के प्रति उनके दोहरे रवैये को उजागर करती है।
उदय कुमार ने आरोप लगाया कि यह तथाकथित सैनिक सम्मान समारोह पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा हुआ था। भाजपा नेताओं को बुलाया गया, लेकिन प्रदेश व केंद्र स्तर के कई बड़े नेताओं ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाना ही उचित समझा। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर, भोरंज से पूर्व विधायक अनिल धीमान, बड़सर से पूर्व विधायक बलदेव शर्मा, पूर्व चेयरमैन नवीन शर्मा, पूर्व विधायक उर्मिल ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, विपिन परमार जैसे कई दिग्गज नेताओं ने कार्यक्रम का खुला बहिष्कार किया।
भीड़ जुटाने के मामले में भी संस्था और भाजपा दोनों पूरी तरह विफल रहे। 10 हजार की भीड़ का दावा करने वाले आयोजकों को मात्र 3560 कुर्सियों तक सीमित होना पड़ा, जिनमें से आधी से अधिक कुर्सियां स्थानीय जनता की बेरुखी के कारण खाली रहीं। हालात ऐसे बने कि विधायक आशीष शर्मा, सुधीर शर्मा और आईडी लखपाल को भीड़ जुटाने के लिए मोर्चा संभालना पड़ा, तब जाकर कुछ कुर्सियां भर पाईं।
उदय कुमार ने कहा कि सैनिकों के सम्मान में भी घोर पक्षपात किया गया। पूर्व विधायक राजिंदर राणा ने अपने सात चहेतों को महामहिम राज्यपाल से सम्मानित करवाया, जबकि अन्य सैनिकों को बागों में पुरस्कार बांटकर औपचारिकता निभा दी गई।
नेता प्रतिपक्ष और राजा लक्ष्य राज मेवाड़ के संबोधन तक आते-आते आधी से ज्यादा जनता पंडाल छोड़ चुकी थी। खाली कुर्सियों को संबोधित करना इस कार्यक्रम की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है, पिछली बार भी जनता पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के संबोधन के बाद पंडाल छोड़कर चली गई थी। शायद इसी डर से इस बार पूर्व विधायक ने उनका नाम निमंत्रण पत्र में शामिल करना भी उचित नहीं समझा।
उदय कुमार ने साफ कहा कि यह पूरा कार्यक्रम पूरी तरह विफल रहा। स्थानीय जनता ने इसे नकार दिया, मजबूरी में बाहर से लोगों को बुलाना पड़ा। सैनिक सम्मान के नाम पर किया गया यह राजनीतिक आयोजन जनता और सैनिकों — दोनों की भावनाओं से खिलवाड़ है, जिसे सुजानपुर की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
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