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लाहौल , 02 फरवरी [ विशाल सूद ] ! जनजातीय जिला लाहौल घाटी के यंगला गांव में लोक निर्माण विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। गांव निवासी प्रदीप मालपा की माता जी गंभीर रूप से बीमार थीं और चलने में बिल्कुल असमर्थ थीं। यंगला गांव की संपर्क सड़क बंद होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को मरीज को कंधों पर उठाकर गौंधला अस्पताल तक पहुंचाने के लिए मजबूर होना पड़ा। परिजनों के अनुसार दो दिन पहले प्रदीप मालपा ने लोक निर्माण विभाग के जेई से यंगला संपर्क सड़क को खोलने का आग्रह किया था, लेकिन विभाग की मशीन सड़क पर मात्र 100 मीटर भी आगे नहीं बढ़ पाई। सड़क खुलने के इंतजार में गंभीर हालत में मरीज को दो दिन तक घर में ही रखना पड़ा, जिससे उसकी स्थिति और बिगड़ती चली गई। ग्रामीणों ने इस संबंध में एसडीओ और विभागीय अधिकारियों से भी बात की, लेकिन किसी ने भी इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। आरोप है कि अधिकारियों की अनदेखी और मनमानी के चलते ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। आखिरकार मजबूरी में गांव के लोगों ने बीमार महिला को अपने कंधों पर उठाकर गौंधला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मरीज को तुरंत कुल्लू रेफर कर दिया। इस घटना से लाहौल घाटी में लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क खोली जाती, तो मरीज को इस तरह जान जोखिम में डालकर नहीं ले जाना पड़ता।
लाहौल , 02 फरवरी [ विशाल सूद ] ! जनजातीय जिला लाहौल घाटी के यंगला गांव में लोक निर्माण विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। गांव निवासी प्रदीप मालपा की माता जी गंभीर रूप से बीमार थीं और चलने में बिल्कुल असमर्थ थीं। यंगला गांव की संपर्क सड़क बंद होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को मरीज को कंधों पर उठाकर गौंधला अस्पताल तक पहुंचाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
परिजनों के अनुसार दो दिन पहले प्रदीप मालपा ने लोक निर्माण विभाग के जेई से यंगला संपर्क सड़क को खोलने का आग्रह किया था, लेकिन विभाग की मशीन सड़क पर मात्र 100 मीटर भी आगे नहीं बढ़ पाई। सड़क खुलने के इंतजार में गंभीर हालत में मरीज को दो दिन तक घर में ही रखना पड़ा, जिससे उसकी स्थिति और बिगड़ती चली गई।
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ग्रामीणों ने इस संबंध में एसडीओ और विभागीय अधिकारियों से भी बात की, लेकिन किसी ने भी इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। आरोप है कि अधिकारियों की अनदेखी और मनमानी के चलते ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
आखिरकार मजबूरी में गांव के लोगों ने बीमार महिला को अपने कंधों पर उठाकर गौंधला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मरीज को तुरंत कुल्लू रेफर कर दिया।
इस घटना से लाहौल घाटी में लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क खोली जाती, तो मरीज को इस तरह जान जोखिम में डालकर नहीं ले जाना पड़ता।
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