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शिमला , 01 फरवरी [ विशाल सूद ] हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने केंद्रीय बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रविवार को पेश किया गया केंद्रीय बजट हिमाचल प्रदेश के लिए बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है। इस बजट में न तो पहाड़ी राज्य हिमाचल की आर्थिक जरूरतों को समझा गया है और न ही उसकी विशिष्ट परिस्थितियों का ध्यान रखा गया है। नरेश चौहान ने कहा कि प्रदेश के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। 15वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट मिली थी और प्रदेश सरकार को उम्मीद थी कि इस बार भी केंद्र सरकार हिमाचल जैसे विशेष श्रेणी वाले राज्य को यह सहायता प्रदान करेगी। लेकिन बजट में इसका कोई प्रावधान नहीं किया गया, जिससे प्रदेश को सीधे तौर पर 40 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था के दो मुख्य आधार—बागवानी और पर्यटन—हैं, जिनका प्रदेश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान है। बावजूद इसके, केंद्रीय बजट में इन दोनों क्षेत्रों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। इसके साथ ही विदेशों से आने वाले सेब सहित अन्य उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर भी बजट पूरी तरह खामोश है, जिससे प्रदेश के बागवानों में भारी निराशा है। उन्होंने कहा ये बजट किसानों, बागवानों, कृषि मजदूरों और युवाओं के कल्याण के मामले में पूरी तरह खामोश है। नरेश चौहान ने कहा कि यह बजट न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि राज्यों के प्रति केंद्र सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। हिमाचल जैसे सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी राज्य की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस बजट से उत्पन्न परिस्थितियों का गंभीरता से आकलन करेगी और हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
शिमला , 01 फरवरी [ विशाल सूद ] हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने केंद्रीय बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रविवार को पेश किया गया केंद्रीय बजट हिमाचल प्रदेश के लिए बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है। इस बजट में न तो पहाड़ी राज्य हिमाचल की आर्थिक जरूरतों को समझा गया है और न ही उसकी विशिष्ट परिस्थितियों का ध्यान रखा गया है।
नरेश चौहान ने कहा कि प्रदेश के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। 15वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट मिली थी और प्रदेश सरकार को उम्मीद थी कि इस बार भी केंद्र सरकार हिमाचल जैसे विशेष श्रेणी वाले राज्य को यह सहायता प्रदान करेगी। लेकिन बजट में इसका कोई प्रावधान नहीं किया गया, जिससे प्रदेश को सीधे तौर पर 40 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
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उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था के दो मुख्य आधार—बागवानी और पर्यटन—हैं, जिनका प्रदेश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान है। बावजूद इसके, केंद्रीय बजट में इन दोनों क्षेत्रों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। इसके साथ ही विदेशों से आने वाले सेब सहित अन्य उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर भी बजट पूरी तरह खामोश है, जिससे प्रदेश के बागवानों में भारी निराशा है। उन्होंने कहा ये बजट किसानों, बागवानों, कृषि मजदूरों और युवाओं के कल्याण के मामले में पूरी तरह खामोश है।
नरेश चौहान ने कहा कि यह बजट न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि राज्यों के प्रति केंद्र सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। हिमाचल जैसे सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी राज्य की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस बजट से उत्पन्न परिस्थितियों का गंभीरता से आकलन करेगी और हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
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