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शिमला , 16 जनवरी [ विशाल सूद ] ! लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान को लेकर चल रहे विवाद के बीच उन्हें कैबिनेट में अपने ही सहयोगी शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का समर्थन मिल गया है। शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान रोहित ठाकुर ने साफ कहा कि विक्रमादित्य सिंह एक काबिल मंत्री हैं और मुख्यमंत्री को इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर सभी शंकाओं को दूर करना चाहिए, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि जहां तक अधिकारियों की बात है, तो बाहर से आए आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का भी प्रदेश के विकास में अहम योगदान रहता है। उन्होंने कहा कि यह उनकी निजी राय है कि जैसे दूसरे राज्यों के अधिकारी योगदान देते हैं, वैसे ही हिमाचल के अधिकारियों का तो नैतिक दायित्व और भी बढ़ जाता है। रोहित ठाकुर ने यह भी माना कि हर जगह सकारात्मक सोच वाले अधिकारी ही नहीं होते, कहीं-कहीं नकारात्मक सोच वाले अफसर भी मिल सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि विक्रमादित्य सिंह के बयान को लेकर कैबिनेट तक मामला ले जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य सिंह के मन में यदि कोई संशय है, तो मुख्यमंत्री को स्वयं हस्तक्षेप कर उसे दूर करना चाहिए, ताकि सरकार और प्रशासन के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे। गौरतलब है कि विक्रमादित्य सिंह के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और मंत्री-अफसर संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है। ऐसे में शिक्षा मंत्री का यह बयान कांग्रेस सरकार के भीतर उभर रही अलग-अलग राय को भी सामने लाता है।
शिमला , 16 जनवरी [ विशाल सूद ] ! लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान को लेकर चल रहे विवाद के बीच उन्हें कैबिनेट में अपने ही सहयोगी शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का समर्थन मिल गया है। शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान रोहित ठाकुर ने साफ कहा कि विक्रमादित्य सिंह एक काबिल मंत्री हैं और मुख्यमंत्री को इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर सभी शंकाओं को दूर करना चाहिए, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि जहां तक अधिकारियों की बात है, तो बाहर से आए आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का भी प्रदेश के विकास में अहम योगदान रहता है। उन्होंने कहा कि यह उनकी निजी राय है कि जैसे दूसरे राज्यों के अधिकारी योगदान देते हैं, वैसे ही हिमाचल के अधिकारियों का तो नैतिक दायित्व और भी बढ़ जाता है।
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रोहित ठाकुर ने यह भी माना कि हर जगह सकारात्मक सोच वाले अधिकारी ही नहीं होते, कहीं-कहीं नकारात्मक सोच वाले अफसर भी मिल सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि विक्रमादित्य सिंह के बयान को लेकर कैबिनेट तक मामला ले जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य सिंह के मन में यदि कोई संशय है, तो मुख्यमंत्री को स्वयं हस्तक्षेप कर उसे दूर करना चाहिए, ताकि सरकार और प्रशासन के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे।
गौरतलब है कि विक्रमादित्य सिंह के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और मंत्री-अफसर संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है। ऐसे में शिक्षा मंत्री का यह बयान कांग्रेस सरकार के भीतर उभर रही अलग-अलग राय को भी सामने लाता है।
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