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सोलन , 30 नवंबर [ विशाल सूद ] : भारतीय जनता पार्टी प्रदेश संयोजक रेहड़ी-फ़ड़ी तथा झुग्गी-झोंपड़ी प्रकोष्ठ के तरसेम भारती ने आज एक प्रेस वक्तव्य जारी करते हुए कहा: "प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, हमारे रेहड़ी-पटरी वाले भाई-बहनों के लिए केवल एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मविश्वास का आधार बनी है। इस योजना के माध्यम से, उन्हें साहूकारों के जाल से मुक्ति मिली है और वे देश के आत्मनिर्भरता के अभियान में सीधे भागीदार बन रहे हैं। ऋण सीमा में वृद्धि सरकार की उनकी बेहतरी के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।" भारती ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि' (पीएम स्वनिधि) योजना, देश के रेहड़ी-पटरी (स्ट्रीट वेंडर्स) वालों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह योजना उन्हें आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, जिससे वे सम्मान के साथ अपना कारोबार चला रहे हैं और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार कर रहे हैं। बिना गारंटी के ऋण: यह योजना रेहड़ी-पटरी वालों को बिना किसी गारंटी के किफ़ायती कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराती है, जिससे वे साहूकारों के ऊँचे ब्याज़ से बचते हैं।बढ़ी हुई ऋण सीमा: हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना का पुनर्गठन करते हुए ऋण की सीमा बढ़ा दी है। पहली किस्त: ₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 की गई। दूसरी किस्त: ₹20,000 से बढ़ाकर ₹25,000 की गई। तीसरी किस्त: ₹50,000 बनी रहेगी। इस प्रकार, पात्र विक्रेता अब कुल ₹90,000 तक का ऋण प्राप्त कर सकते हैं। ब्याज़ सब्सिडी और डिजिटल प्रोत्साहन: समय पर ऋण चुकाने पर 7% की दर से ब्याज़ सब्सिडी मिलती है। डिजिटल लेन-देन (Digital Transactions) करने पर प्रति वर्ष ₹1,200 तक कैशबैक का प्रोत्साहन भी दिया जाता है। विस्तारित अवधि: इस योजना की अवधि को 31 मार्च, 2030 तक बढ़ा दिया गया है, जिसका कुल परिव्यय ₹7,332 करोड़ है। बड़ा लक्ष्य: पुनर्गठित योजना का लक्ष्य 50 लाख नए लाभार्थियों सहित 1.15 करोड़ स्ट्रीट वेंडर्स को लाभ पहुँचाना है। भारती ने ज़ोर देकर कहा कि आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के संयुक्त प्रयासों से क्रियान्वित यह योजना, कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुए रेहड़ी-पटरी वालों के कारोबार को फ़िर से पटरी पर लाने में सहायक सिद्ध हुई है। यह केवल एक ऋण योजना नहीं है, अपितु देश के असंगठित क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण वर्ग को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने और उन्हें डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने का एक सफ़ल प्रयास है। अब तक, 68 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी वाले इस योजना का लाभ उठाकर अपने कारोबार को नई गति दे चुके हैं। उन्होंने अंत में कहा कि सरकार का यह कदम 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना को दर्शाते हुए, छोटे से छोटे व्यवसायी को भी राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
सोलन , 30 नवंबर [ विशाल सूद ] : भारतीय जनता पार्टी प्रदेश संयोजक रेहड़ी-फ़ड़ी तथा झुग्गी-झोंपड़ी प्रकोष्ठ के तरसेम भारती ने आज एक प्रेस वक्तव्य जारी करते हुए कहा: "प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, हमारे रेहड़ी-पटरी वाले भाई-बहनों के लिए केवल एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मविश्वास का आधार बनी है। इस योजना के माध्यम से, उन्हें साहूकारों के जाल से मुक्ति मिली है और वे देश के आत्मनिर्भरता के अभियान में सीधे भागीदार बन रहे हैं। ऋण सीमा में वृद्धि सरकार की उनकी बेहतरी के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।"
भारती ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि' (पीएम स्वनिधि) योजना, देश के रेहड़ी-पटरी (स्ट्रीट वेंडर्स) वालों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह योजना उन्हें आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, जिससे वे सम्मान के साथ अपना कारोबार चला रहे हैं और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार कर रहे हैं।
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बिना गारंटी के ऋण: यह योजना रेहड़ी-पटरी वालों को बिना किसी गारंटी के किफ़ायती कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराती है, जिससे वे साहूकारों के ऊँचे ब्याज़ से बचते हैं।बढ़ी हुई ऋण सीमा: हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना का पुनर्गठन करते हुए ऋण की सीमा बढ़ा दी है।
पहली किस्त: ₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 की गई।
दूसरी किस्त: ₹20,000 से बढ़ाकर ₹25,000 की गई।
तीसरी किस्त: ₹50,000 बनी रहेगी।
इस प्रकार, पात्र विक्रेता अब कुल ₹90,000 तक का ऋण प्राप्त कर सकते हैं।
ब्याज़ सब्सिडी और डिजिटल प्रोत्साहन:
समय पर ऋण चुकाने पर 7% की दर से ब्याज़ सब्सिडी मिलती है।
डिजिटल लेन-देन (Digital Transactions) करने पर प्रति वर्ष ₹1,200 तक कैशबैक का प्रोत्साहन भी दिया जाता है।
विस्तारित अवधि: इस योजना की अवधि को 31 मार्च, 2030 तक बढ़ा दिया गया है, जिसका कुल परिव्यय ₹7,332 करोड़ है।
बड़ा लक्ष्य: पुनर्गठित योजना का लक्ष्य 50 लाख नए लाभार्थियों सहित 1.15 करोड़ स्ट्रीट वेंडर्स को लाभ पहुँचाना है।
भारती ने ज़ोर देकर कहा कि आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के संयुक्त प्रयासों से क्रियान्वित यह योजना, कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुए रेहड़ी-पटरी वालों के कारोबार को फ़िर से पटरी पर लाने में सहायक सिद्ध हुई है। यह केवल एक ऋण योजना नहीं है, अपितु देश के असंगठित क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण वर्ग को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने और उन्हें डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने का एक सफ़ल प्रयास है।
अब तक, 68 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी वाले इस योजना का लाभ उठाकर अपने कारोबार को नई गति दे चुके हैं। उन्होंने अंत में कहा कि सरकार का यह कदम 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना को दर्शाते हुए, छोटे से छोटे व्यवसायी को भी राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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