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शिमला , 07 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! कड़क वर्दी, हाथ में डंडा और चेहरे पर अनुशासन का सख्त पहरा—आम तौर पर पुलिस की यही तस्वीर हमारे जेहन में उभरती है। लेकिन हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इस धारणा को बदलते हुए अपने जवानों के भीतर छिपे 'संवेदनशील कलाकार' को दुनिया के सामने पेश किया है। शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में सजी एक अनूठी चित्रकला प्रदर्शनी ने यह साबित कर दिया है कि कानून के रखवालों के सीने में भी एक कोमल और रचनात्मक दिल धड़कता है। इस विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान द्वारा किया गया, जहाँ प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। महापौर सुरेंद्र चौहान ने जवानों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस का यह 'दूसरा चेहरा' वाकई सुखद है। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों ने 'चिट्टा' (नशा) जैसे सामाजिक अभिशाप को कैनवास पर बहुत ही मार्मिक ढंग से उकेरा है। पेंटिंग्स में प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती है। महापौर ने घोषणा की कि आने वाले समय में 'शिमला हाट' में पुलिस कलाकारों को विशेष स्थान दिया जाएगा ताकि उनकी कला को स्थाई मंच मिल सके। उन्होंने कहा कि इस पहल के सूत्रधार DGP अशोक तिवारी ने नेतृत्व की नई परिभाषा पेश की। उन्होंने कहा कि पुलिस लीडरशिप का काम केवल ड्यूटी करवाना या कल्याणकारी योजनाएं चलाना ही नहीं है, बल्कि अपने विभाग के सदस्यों की छिपी हुई प्रतिभा को पहचानना और उसे मंच देना भी है। DGP अशोक तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि जनता को यह जानना जरूरी है कि पुलिस केवल डंडा या बंदूक चलाना ही नहीं जानती; उनके पास भी भावनाएं और रचनात्मकता है। पिछले कुछ महीनों से हम उन जवानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं जो हैंडीक्राफ्ट, ऑयल पेंटिंग और वॉटर कलर जैसी विधाओं में माहिर हैं।मेयर के सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए DGP ने सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कलाकार अपनी कृतियों को व्यावसायिक रूप से बेचना चाहते हैं, तो विभाग इस पर गंभीरता से विचार करेगा और उचित निर्णय लेगा।
शिमला , 07 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! कड़क वर्दी, हाथ में डंडा और चेहरे पर अनुशासन का सख्त पहरा—आम तौर पर पुलिस की यही तस्वीर हमारे जेहन में उभरती है। लेकिन हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इस धारणा को बदलते हुए अपने जवानों के भीतर छिपे 'संवेदनशील कलाकार' को दुनिया के सामने पेश किया है। शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में सजी एक अनूठी चित्रकला प्रदर्शनी ने यह साबित कर दिया है कि कानून के रखवालों के सीने में भी एक कोमल और रचनात्मक दिल धड़कता है।
इस विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान द्वारा किया गया, जहाँ प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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महापौर सुरेंद्र चौहान ने जवानों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस का यह 'दूसरा चेहरा' वाकई सुखद है। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों ने 'चिट्टा' (नशा) जैसे सामाजिक अभिशाप को कैनवास पर बहुत ही मार्मिक ढंग से उकेरा है। पेंटिंग्स में प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती है। महापौर ने घोषणा की कि आने वाले समय में 'शिमला हाट' में पुलिस कलाकारों को विशेष स्थान दिया जाएगा ताकि उनकी कला को स्थाई मंच मिल सके।
उन्होंने कहा कि इस पहल के सूत्रधार DGP अशोक तिवारी ने नेतृत्व की नई परिभाषा पेश की। उन्होंने कहा कि पुलिस लीडरशिप का काम केवल ड्यूटी करवाना या कल्याणकारी योजनाएं चलाना ही नहीं है, बल्कि अपने विभाग के सदस्यों की छिपी हुई प्रतिभा को पहचानना और उसे मंच देना भी है।
DGP अशोक तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि जनता को यह जानना जरूरी है कि पुलिस केवल डंडा या बंदूक चलाना ही नहीं जानती; उनके पास भी भावनाएं और रचनात्मकता है। पिछले कुछ महीनों से हम उन जवानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं जो हैंडीक्राफ्ट, ऑयल पेंटिंग और वॉटर कलर जैसी विधाओं में माहिर हैं।मेयर के सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए DGP ने सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कलाकार अपनी कृतियों को व्यावसायिक रूप से बेचना चाहते हैं, तो विभाग इस पर गंभीरता से विचार करेगा और उचित निर्णय लेगा।
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