“आरडीजी पर भ्रम फैलाकर अपनी नाकामियां छिपा रही सरकार — ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ जैसी राजनीति”
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शिमला , 23 फरवरी [ विशाल सूद ] : भाजपा मुख्यप्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को “हिमाचल विद्रोही” कहना उनकी बौखलाहट और असंयमित भाषा का परिचायक है।उन्होंने कहा कि मंत्री जी के हालिया वक्तव्यों से प्रतीत होता है कि वे मानसिक संतुलन खो चुके हैं और समय-समय पर इसी प्रकार की आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते रहते हैं। उन्होंने सलाह दी कि मंत्री विपक्ष की चिंता छोड़कर सरकार चलाने और जनता की सेवा पर ध्यान दें। जमवाल ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के विषय पर सदन में तीन दिन विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपना पक्ष रखा और यह पूरा रिकॉर्ड का हिस्सा है। भाजपा ने कभी यह नहीं कहा कि ग्रांट बंद होनी चाहिए थी, बल्कि प्रश्न यह है कि यह बंद क्यों हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार वित्त आयोग के सामने अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में विफल रही और उसी का परिणाम यह स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग ने पहले ही ग्रांट में चरणबद्ध कमी का संकेत दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने न तो खर्चों में कटौती की और न ही आय बढ़ाने की ठोस योजना बनाई। इसके विपरीत सरकार ने सीपीएस नियुक्तियां, चेयरमैन-वाइस चेयरमैन, सलाहकार, ओएसडी और अतिरिक्त विधि अधिकारियों की नियुक्तियां कर खर्चों का बोझ बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सरकार मित्रों को लाभ पहुंचाने में व्यस्त है और अपनी नाकामियों का ठीकरा भाजपा पर फोड़ना चाहती है। राकेश जमवाल ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार हिमाचल की सहायता कर रही है और हाल ही में आपदा राहत के लिए लगभग ₹286 करोड़ की राशि भी जारी की गई है, लेकिन राज्य सरकार इसका आभार मानने के बजाय केंद्र पर ही आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में प्रदेश का कर्ज 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और इसके बावजूद सरकार 2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल के दावे कर रही है, जो उसके बयानों के स्पष्ट विरोधाभास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सदन में भी मुख्यमंत्री से पूछा कि बढ़ते कर्ज के बावजूद आत्मनिर्भरता कैसे संभव होगी, लेकिन सरकार स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई। जमवाल ने आरोप लगाया कि मंत्रियों को अभद्र भाषा के लिए खुली छूट दी गई है, जिसके कारण सार्वजनिक मंचों पर भी इस प्रकार की टिप्पणियां हो रही हैं। अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेशहित के मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाती रहेगी और सरकार को चाहिए कि वह विपक्ष पर अनर्गल आरोप लगाने के बजाय अपनी नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार करे।
शिमला , 23 फरवरी [ विशाल सूद ] : भाजपा मुख्यप्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को “हिमाचल विद्रोही” कहना उनकी बौखलाहट और असंयमित भाषा का परिचायक है।उन्होंने कहा कि मंत्री जी के हालिया वक्तव्यों से प्रतीत होता है कि वे मानसिक संतुलन खो चुके हैं और समय-समय पर इसी प्रकार की आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते रहते हैं। उन्होंने सलाह दी कि मंत्री विपक्ष की चिंता छोड़कर सरकार चलाने और जनता की सेवा पर ध्यान दें।
जमवाल ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के विषय पर सदन में तीन दिन विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपना पक्ष रखा और यह पूरा रिकॉर्ड का हिस्सा है। भाजपा ने कभी यह नहीं कहा कि ग्रांट बंद होनी चाहिए थी, बल्कि प्रश्न यह है कि यह बंद क्यों हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार वित्त आयोग के सामने अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में विफल रही और उसी का परिणाम यह स्थिति बनी।
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उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग ने पहले ही ग्रांट में चरणबद्ध कमी का संकेत दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने न तो खर्चों में कटौती की और न ही आय बढ़ाने की ठोस योजना बनाई। इसके विपरीत सरकार ने सीपीएस नियुक्तियां, चेयरमैन-वाइस चेयरमैन, सलाहकार, ओएसडी और अतिरिक्त विधि अधिकारियों की नियुक्तियां कर खर्चों का बोझ बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सरकार मित्रों को लाभ पहुंचाने में व्यस्त है और अपनी नाकामियों का ठीकरा भाजपा पर फोड़ना चाहती है।
राकेश जमवाल ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार हिमाचल की सहायता कर रही है और हाल ही में आपदा राहत के लिए लगभग ₹286 करोड़ की राशि भी जारी की गई है, लेकिन राज्य सरकार इसका आभार मानने के बजाय केंद्र पर ही आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में प्रदेश का कर्ज 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और इसके बावजूद सरकार 2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल के दावे कर रही है, जो उसके बयानों के स्पष्ट विरोधाभास को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने सदन में भी मुख्यमंत्री से पूछा कि बढ़ते कर्ज के बावजूद आत्मनिर्भरता कैसे संभव होगी, लेकिन सरकार स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई। जमवाल ने आरोप लगाया कि मंत्रियों को अभद्र भाषा के लिए खुली छूट दी गई है, जिसके कारण सार्वजनिक मंचों पर भी इस प्रकार की टिप्पणियां हो रही हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेशहित के मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाती रहेगी और सरकार को चाहिए कि वह विपक्ष पर अनर्गल आरोप लगाने के बजाय अपनी नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार करे।
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