31 मार्च तक सभी राजस्व प्रविष्टियां होंगी दुरुस्त, पूर्व सरकार की तुलना में तीन साल में वर्तमान सरकार ने की 3800 करोड़ की अधिक राजस्व प्राप्तियां- राजेश धर्माणी
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शिमला , 09 जनवरी [ विशाल सूद ] ! 2026 में सुक्खू सरकार का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सरकार गांव के द्वार’ प्रदेश के सभी जिलों और सभी विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत मंत्री, वरिष्ठ विधायक और पार्टी पदाधिकारी पंचायत स्तर पर जाकर आम जनता की समस्याएं सुनेंगे और मौके पर ही उनके समाधान के निर्देश देंगे।शिमला सचिवालय में पत्रकार वार्ता कर हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा एवं नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि 2 जनवरी को राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में इस कार्यक्रम का शेड्यूल दोबारा जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया था कि शासन को जनता के द्वार तक ले जाया जाएगा जिलावार मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस दौरान धर्मानी ने कहा कि अक्टूबर 2023 में शुरू किए गए विशेष राजस्व अभियान के तहत दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश में 5 लाख 10 हजार से अधिक राजस्व मामलों का निपटारा किया गया।इनमें करीब 4.24 लाख म्यूटेशन, 2.50 लाख बंटवारे (पार्टिशन), 47 हजार सीमांकन और 12,896 राजस्व प्रविष्टि सुधार के मामले शामिल हैं। भूमि विवादों के कारण वर्षों तक मामले अदालतों में चलते रहते हैं और कई बार आपराधिक प्रकरण भी उत्पन्न हो जाते हैं। सरकार का उद्देश्य इन मामलों को प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध ढंग से सुलझाना है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब प्रदेश में हर महीने दो दिन राजस्व लोक अदालतें लगेंगी। इसके अलावा प्रत्येक सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को म्यूटेशन, पार्टिशन और राजस्व प्रविष्टियों के सुधार के लिए विशेष अदालतों का आयोजन किया जाएगा। हर सप्ताह शनिवार को मामलों की समीक्षा होगी। एसडीएम डीसी को रिपोर्ट देंगे, इसके बाद एसीएस राजस्व द्वारा राजस्व मंत्री को ब्रीफिंग दी जाएगी और फिर हर महीने के अंतिम सोमवार को मुख्यमंत्री स्तर पर पूरी समीक्षा की जाएगी।31 मार्च 2026 तक सभी लंबित प्रविष्टियां ठीक होंगी। इस दौरान राजेश धर्माणी ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों की चलते 1 अप्रैल 2023 से 30 सितंबर 2025 के बीच राज्य को 36,683 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछली सरकार की समान अवधि की तुलना में लगभग 3,800 करोड़ रुपये अधिक है।टेंडर प्रक्रिया में सुधार से 5,408 करोड़ रुपये, जबकि 2023-24 में स्टेट एक्साइज ड्यूटी और वैट से 867 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि हुई। धर्माणी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक हिमाचल प्रदेश को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाना है। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है।नई टाउनशिप को लेकर विपक्ष के आरोपों पर मंत्री ने कहा कि यह एक लंबी और पारदर्शी प्रक्रिया है। सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट किया जा रहा है और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। पिछली भाजपा सरकार के दौरान जमीन आवंटन में बड़े घोटाले हुए, जबकि वर्तमान सरकार पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता दे रही है।
शिमला , 09 जनवरी [ विशाल सूद ] ! 2026 में सुक्खू सरकार का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सरकार गांव के द्वार’ प्रदेश के सभी जिलों और सभी विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत मंत्री, वरिष्ठ विधायक और पार्टी पदाधिकारी पंचायत स्तर पर जाकर आम जनता की समस्याएं सुनेंगे और मौके पर ही उनके समाधान के निर्देश देंगे।शिमला सचिवालय में पत्रकार वार्ता कर हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा एवं नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि 2 जनवरी को राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में इस कार्यक्रम का शेड्यूल दोबारा जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया था कि शासन को जनता के द्वार तक ले जाया जाएगा जिलावार मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस दौरान धर्मानी ने कहा कि अक्टूबर 2023 में शुरू किए गए विशेष राजस्व अभियान के तहत दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश में 5 लाख 10 हजार से अधिक राजस्व मामलों का निपटारा किया गया।इनमें करीब 4.24 लाख म्यूटेशन, 2.50 लाख बंटवारे (पार्टिशन), 47 हजार सीमांकन और 12,896 राजस्व प्रविष्टि सुधार के मामले शामिल हैं।
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भूमि विवादों के कारण वर्षों तक मामले अदालतों में चलते रहते हैं और कई बार आपराधिक प्रकरण भी उत्पन्न हो जाते हैं। सरकार का उद्देश्य इन मामलों को प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध ढंग से सुलझाना है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब प्रदेश में हर महीने दो दिन राजस्व लोक अदालतें लगेंगी। इसके अलावा प्रत्येक सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को म्यूटेशन, पार्टिशन और राजस्व प्रविष्टियों के सुधार के लिए विशेष अदालतों का आयोजन किया जाएगा।
हर सप्ताह शनिवार को मामलों की समीक्षा होगी। एसडीएम डीसी को रिपोर्ट देंगे, इसके बाद एसीएस राजस्व द्वारा राजस्व मंत्री को ब्रीफिंग दी जाएगी और फिर हर महीने के अंतिम सोमवार को मुख्यमंत्री स्तर पर पूरी समीक्षा की जाएगी।31 मार्च 2026 तक सभी लंबित प्रविष्टियां ठीक होंगी।
इस दौरान राजेश धर्माणी ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों की चलते 1 अप्रैल 2023 से 30 सितंबर 2025 के बीच राज्य को 36,683 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछली सरकार की समान अवधि की तुलना में लगभग 3,800 करोड़ रुपये अधिक है।टेंडर प्रक्रिया में सुधार से 5,408 करोड़ रुपये, जबकि 2023-24 में स्टेट एक्साइज ड्यूटी और वैट से 867 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि हुई।
धर्माणी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक हिमाचल प्रदेश को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाना है। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है।नई टाउनशिप को लेकर विपक्ष के आरोपों पर मंत्री ने कहा कि यह एक लंबी और पारदर्शी प्रक्रिया है। सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट किया जा रहा है और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। पिछली भाजपा सरकार के दौरान जमीन आवंटन में बड़े घोटाले हुए, जबकि वर्तमान सरकार पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता दे रही है।
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