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शिमला, 15 फरवरी [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनि भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराने लगी है और मरीजों को सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों में उपचाराधीन मरीजों को हिमकेयर, आयुष्मान और सहारा जैसी योजनाओं के बावजूद निशुल्क इलाज नहीं मिल रहा, क्योंकि सरकार की करोड़ों रुपये की देनदारियां लंबित पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार हिमकेयर योजना के तहत लगभग 400 करोड़ रुपये, आयुष्मान योजना के करीब 250 करोड़ रुपये और सहारा योजना के लगभग 120 करोड़ रुपये के भुगतान अटके हुए हैं। भुगतान में लगातार देरी के कारण अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है और कई जगहों पर वेंडरों ने सर्जिकल सामान की आपूर्ति रोक दी है। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है — ऑपरेशन टल रहे हैं, इलाज में देरी हो रही है और दवाइयों की कमी सामने आ रही है। संदीपनि भारद्वाज ने कहा कि सरकार की लापरवाही का खामियाजा गरीब और गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। कैंसर जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को हजारों रुपये के इंजेक्शन और दवाइयाँ बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं, जबकि दावा किया जाता है कि इन योजनाओं के तहत निशुल्क उपचार मिलता है। कई मामलों में अस्पतालों में दवाइयाँ “स्टॉक में नहीं” बताकर मरीजों को बाहर भेजा जा रहा है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख अस्पताल आईजीएमसी अस्पताल में भी उपचार महंगा कर दिया गया है। स्पेशल वार्ड, एमआरआई और PET स्कैन जैसी सुविधाओं के शुल्क बढ़ाए गए हैं, जिससे आम मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसी प्रकार धर्मशाला अस्पताल में भी पर्ची शुल्क, टेस्ट शुल्क और मेडिकल सर्टिफिकेट फीस बढ़ाकर जनता से वसूली शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार भुगतान करने में असमर्थ है, दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं की दरें बढ़ाकर जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रदेश की आर्थिक हालत कितनी कमजोर हो चुकी है और सरकार वित्तीय कुप्रबंधन से जूझ रही है।संदीपनि भारद्वाज ने यह भी कहा कि स्वयं स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया है कि पहले बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कार्ड बनाए गए, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए योजनाओं को सीमित करने और बंद करने की सोच रही थी, हालांकि सार्वजनिक दबाव के कारण पीछे हटना पड़ा। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था संकट में है और यदि समय रहते बकाया भुगतान नहीं किया गया तो अस्पतालों की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत सभी लंबित भुगतान जारी करे, अस्पतालों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए और मरीजों को योजनाओं का पूरा लाभ सुनिश्चित करे।अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाती रहेगी और कांग्रेस सरकार को जनता की पीड़ा का जवाब देना ही होगा।
शिमला, 15 फरवरी [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनि भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराने लगी है और मरीजों को सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों में उपचाराधीन मरीजों को हिमकेयर, आयुष्मान और सहारा जैसी योजनाओं के बावजूद निशुल्क इलाज नहीं मिल रहा, क्योंकि सरकार की करोड़ों रुपये की देनदारियां लंबित पड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार हिमकेयर योजना के तहत लगभग 400 करोड़ रुपये, आयुष्मान योजना के करीब 250 करोड़ रुपये और सहारा योजना के लगभग 120 करोड़ रुपये के भुगतान अटके हुए हैं। भुगतान में लगातार देरी के कारण अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है और कई जगहों पर वेंडरों ने सर्जिकल सामान की आपूर्ति रोक दी है। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है — ऑपरेशन टल रहे हैं, इलाज में देरी हो रही है और दवाइयों की कमी सामने आ रही है।
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संदीपनि भारद्वाज ने कहा कि सरकार की लापरवाही का खामियाजा गरीब और गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। कैंसर जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को हजारों रुपये के इंजेक्शन और दवाइयाँ बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं, जबकि दावा किया जाता है कि इन योजनाओं के तहत निशुल्क उपचार मिलता है। कई मामलों में अस्पतालों में दवाइयाँ “स्टॉक में नहीं” बताकर मरीजों को बाहर भेजा जा रहा है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख अस्पताल आईजीएमसी अस्पताल में भी उपचार महंगा कर दिया गया है। स्पेशल वार्ड, एमआरआई और PET स्कैन जैसी सुविधाओं के शुल्क बढ़ाए गए हैं, जिससे आम मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसी प्रकार धर्मशाला अस्पताल में भी पर्ची शुल्क, टेस्ट शुल्क और मेडिकल सर्टिफिकेट फीस बढ़ाकर जनता से वसूली शुरू कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार भुगतान करने में असमर्थ है, दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं की दरें बढ़ाकर जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रदेश की आर्थिक हालत कितनी कमजोर हो चुकी है और सरकार वित्तीय कुप्रबंधन से जूझ रही है।
संदीपनि भारद्वाज ने यह भी कहा कि स्वयं स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया है कि पहले बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कार्ड बनाए गए, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए योजनाओं को सीमित करने और बंद करने की सोच रही थी, हालांकि सार्वजनिक दबाव के कारण पीछे हटना पड़ा।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था संकट में है और यदि समय रहते बकाया भुगतान नहीं किया गया तो अस्पतालों की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत सभी लंबित भुगतान जारी करे, अस्पतालों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए और मरीजों को योजनाओं का पूरा लाभ सुनिश्चित करे।
अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाती रहेगी और कांग्रेस सरकार को जनता की पीड़ा का जवाब देना ही होगा।
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