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शिमला , 29 जनवरी [ विशाल सूद ] ! पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की कुल 3616 ग्राम पंचायतों में से 655 ग्राम पंचायतों में दिसंबर माह के दौरान मनरेगा के तहत एक भी व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया। मंत्री ने बताया कि रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि प्रदेश की 77 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत एक रुपये का भी बजट खर्च नहीं किया गया, जो योजना के उद्देश्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह स्थिति केवल दिसंबर माह तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले छह महीनों के आंकड़े भी मनरेगा के कमजोर क्रियान्वयन की तस्वीर पेश करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार नवंबर माह में 750, अक्तूबर में 1175, सितंबर में 1015, अगस्त में 1055 तथा जुलाई में 623 ग्राम पंचायतें ऐसी रहीं, जहां मनरेगा के तहत एक भी कार्यदिवस का सृजन नहीं किया जा सका। वहीं, बजट खर्च के मामले में नवंबर में 79, अक्तूबर में 84, सितंबर में 83, अगस्त में 82 और जुलाई में 78 ग्राम पंचायतों ने शून्य व्यय दर्ज किया। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में इस तरह की लापरवाही अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे रिपोर्ट का विस्तृत विश्लेषण कर जिम्मेदारी तय करें तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को समय पर रोजगार मिले और पंचायत स्तर पर कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन हो।
शिमला , 29 जनवरी [ विशाल सूद ] ! पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की कुल 3616 ग्राम पंचायतों में से 655 ग्राम पंचायतों में दिसंबर माह के दौरान मनरेगा के तहत एक भी व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया।
मंत्री ने बताया कि रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि प्रदेश की 77 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत एक रुपये का भी बजट खर्च नहीं किया गया, जो योजना के उद्देश्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह स्थिति केवल दिसंबर माह तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले छह महीनों के आंकड़े भी मनरेगा के कमजोर क्रियान्वयन की तस्वीर पेश करते हैं।
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रिपोर्ट के अनुसार नवंबर माह में 750, अक्तूबर में 1175, सितंबर में 1015, अगस्त में 1055 तथा जुलाई में 623 ग्राम पंचायतें ऐसी रहीं, जहां मनरेगा के तहत एक भी कार्यदिवस का सृजन नहीं किया जा सका। वहीं, बजट खर्च के मामले में नवंबर में 79, अक्तूबर में 84, सितंबर में 83, अगस्त में 82 और जुलाई में 78 ग्राम पंचायतों ने शून्य व्यय दर्ज किया।
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में इस तरह की लापरवाही अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे रिपोर्ट का विस्तृत विश्लेषण कर जिम्मेदारी तय करें तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को समय पर रोजगार मिले और पंचायत स्तर पर कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन हो।
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