कैबिनेट में निर्णयों की भरमार, ज़मीन पर क्रियान्वयन शून्य—कांग्रेस मंत्रियों के दावे खोखले
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शिमला , 19 जनवरी [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक के बाद कांग्रेस के एक मंत्री द्वारा दिए गए बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सुक्खू सरकार प्रदेश की जनता को लंबी-चौड़ी घोषणाओं और आंकड़ों के जाल में उलझाकर अपनी नाकामियों को छिपाने का प्रयास कर रही है। कैबिनेट में 50 से अधिक एजेंडे गिनाने से शासन सफल नहीं हो जाता, असली कसौटी ज़मीन पर काम दिखाना है, जिसमें यह सरकार पूरी तरह विफल रही है। सुरेश कश्यप ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में पद सृजन, कैंसर डिपार्टमेंट खोलने, तकनीकी स्टाफ की भर्ती और नर्सों की आयु सीमा बढ़ाने जैसे फैसले सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार यह बताए कि पिछले दो वर्षों में स्वास्थ्य संस्थानों की बदहाली, डॉक्टरों की भारी कमी और मरीजों की बढ़ती परेशानियों के लिए कौन ज़िम्मेदार है? आज पद स्वीकृत करने की बात की जा रही है, जबकि पहले से स्वीकृत पद वर्षों से खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग में मामलों के अंबार, तहसीलदारों और पटवारियों की कमी सरकार की प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। अब सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनः रखने का निर्णय इस बात का स्वीकारोक्ति है कि सरकार समय पर भर्ती करने में पूरी तरह नाकाम रही है। यदि पहले ही स्थायी भर्तियां की गई होतीं, तो आज यह अस्थायी और भ्रमित फैसले लेने की नौबत ही नहीं आती। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एयर कनेक्टिविटी, जिपलाइन, हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और जियोथर्मल एनर्जी जैसे विषयों पर वर्षों से केवल योजनाएं बन रही हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। सरकार यह स्पष्ट करे कि जब प्रदेश कर्ज़ में डूबा है, तो इन परियोजनाओं के लिए संसाधन कहां से आएंगे और इनका लाभ आम जनता तक कब पहुंचेगा? सुरेश कश्यप ने सोशल सिक्योरिटी पेंशन, आंगनवाड़ी/क्रेच वर्कर्स और औद्योगिक नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार केवल संशोधन और विस्तार की बातें कर रही है, जबकि भुगतान में देरी, अनिश्चितता और बेरोज़गारी की समस्या जस की तस बनी हुई है। घोषणाएं सरकार की मंशा नहीं, बल्कि उसकी विफलता छिपाने का माध्यम बन गई हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों, डिज़ास्टर एक्ट और प्रशासनिक असमंजस पर सरकार की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक ओर हाईकोर्ट के आदेशों की बात की जाती है, दूसरी ओर अंदरखाने फैसलों को टाला जा रहा है। यह कांग्रेस सरकार की दिशाहीनता और निर्णयहीनता को दर्शाता है। सुरेश कश्यप ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश की जनता को यह स्पष्ट करना चाहती है कि कांग्रेस सरकार का हर फैसला केवल प्रेस नोट तक सीमित है। जब तक इन निर्णयों का ठोस और समयबद्ध क्रियान्वयन नहीं होगा, तब तक यह सब केवल दिखावा है। भाजपा इन खोखले दावों और विफलताओं को जनता के बीच पूरी मजबूती से उजागर करती रहेगी।
शिमला , 19 जनवरी [ विशाल सूद ] ! भाजपा प्रदेश पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक के बाद कांग्रेस के एक मंत्री द्वारा दिए गए बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सुक्खू सरकार प्रदेश की जनता को लंबी-चौड़ी घोषणाओं और आंकड़ों के जाल में उलझाकर अपनी नाकामियों को छिपाने का प्रयास कर रही है।
कैबिनेट में 50 से अधिक एजेंडे गिनाने से शासन सफल नहीं हो जाता, असली कसौटी ज़मीन पर काम दिखाना है, जिसमें यह सरकार पूरी तरह विफल रही है। सुरेश कश्यप ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में पद सृजन, कैंसर डिपार्टमेंट खोलने, तकनीकी स्टाफ की भर्ती और नर्सों की आयु सीमा बढ़ाने जैसे फैसले सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार यह बताए कि पिछले दो वर्षों में स्वास्थ्य संस्थानों की बदहाली, डॉक्टरों की भारी कमी और मरीजों की बढ़ती परेशानियों के लिए कौन ज़िम्मेदार है? आज पद स्वीकृत करने की बात की जा रही है, जबकि पहले से स्वीकृत पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
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उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग में मामलों के अंबार, तहसीलदारों और पटवारियों की कमी सरकार की प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। अब सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनः रखने का निर्णय इस बात का स्वीकारोक्ति है कि सरकार समय पर भर्ती करने में पूरी तरह नाकाम रही है। यदि पहले ही स्थायी भर्तियां की गई होतीं, तो आज यह अस्थायी और भ्रमित फैसले लेने की नौबत ही नहीं आती।
पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एयर कनेक्टिविटी, जिपलाइन, हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और जियोथर्मल एनर्जी जैसे विषयों पर वर्षों से केवल योजनाएं बन रही हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। सरकार यह स्पष्ट करे कि जब प्रदेश कर्ज़ में डूबा है, तो इन परियोजनाओं के लिए संसाधन कहां से आएंगे और इनका लाभ आम जनता तक कब पहुंचेगा?
सुरेश कश्यप ने सोशल सिक्योरिटी पेंशन, आंगनवाड़ी/क्रेच वर्कर्स और औद्योगिक नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार केवल संशोधन और विस्तार की बातें कर रही है, जबकि भुगतान में देरी, अनिश्चितता और बेरोज़गारी की समस्या जस की तस बनी हुई है। घोषणाएं सरकार की मंशा नहीं, बल्कि उसकी विफलता छिपाने का माध्यम बन गई हैं।
उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों, डिज़ास्टर एक्ट और प्रशासनिक असमंजस पर सरकार की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक ओर हाईकोर्ट के आदेशों की बात की जाती है, दूसरी ओर अंदरखाने फैसलों को टाला जा रहा है। यह कांग्रेस सरकार की दिशाहीनता और निर्णयहीनता को दर्शाता है।
सुरेश कश्यप ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश की जनता को यह स्पष्ट करना चाहती है कि कांग्रेस सरकार का हर फैसला केवल प्रेस नोट तक सीमित है। जब तक इन निर्णयों का ठोस और समयबद्ध क्रियान्वयन नहीं होगा, तब तक यह सब केवल दिखावा है। भाजपा इन खोखले दावों और विफलताओं को जनता के बीच पूरी मजबूती से उजागर करती रहेगी।
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