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शिमला , 11 मार्च [ विशाल सूद ] ! भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश कार्यसमिति सदस्य (IT विभाग) अरुष गुप्ता ने प्रदेश की वर्तमान सुक्खू सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पानी पर शुल्क लगाने के निर्णय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस जनविरोधी निर्णय की कठोरतम शब्दों में निंदा करते हुए इसे हिमाचल की स्वाभिमानी जनता की पीठ में छुरा घोंपने वाला कृत्य करार दिया। अरुष गुप्ता ने जारी प्रेस नोट में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर कांग्रेस सरकार को घेरा:1. वादों की अर्थी और 'झूठ' की राजनीतिसत्ता में आने से पहले कांग्रेस के नेताओं ने मंचों से चीख-चीख कर जनता को गुमराह किया था कि वे 'निशुल्क पानी' देंगे। लेकिन सत्ता का स्वाद चखते ही इस "ठग सरकार" के सुर बदल गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में APL से 100 रुपये और BPL परिवारों से 25 रुपये वसूलने का फरमान यह साबित करता है कि कांग्रेस के डीएनए में ही लूट और झूठ शामिल है। 2. भाजपा सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों पर कुठाराघातगुप्ता ने पूर्व की जयराम ठाकुर नीत भाजपा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों के दर्द को समझा था और उन्हें निशुल्क पानी की सुविधा प्रदान की थी। भाजपा का ध्येय सेवा था, लेकिन वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही उस जनकल्याणकारी योजना को बंद कर दिया। यह सरकार जनता को सुविधाएं देने के बजाय उनकी जेबों पर डाका डालने का काम कर रही है। 3. 'चोर' दरवाजे से जनता की जेब पर हमलाअरुष गुप्ता ने कड़े लहजे में कहा, "यह सरकार जनता की सेवा करने नहीं, बल्कि उन्हें निचोड़ने के लिए आई है। जो सरकार मुफ्त बिजली-पानी के नाम पर वोट मांगकर आई थी, आज वही सरकार पंचायतों के माध्यम से वसूली का नया 'टैक्स तंत्र' खड़ा कर रही है। यह हिमाचल की जनता के साथ सरेआम धोखाधड़ी है।" 4. ग्राम सभाओं का ढोंग बंद करे सरकारउन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि विशेष ग्राम सभाएं बुलाकर इस काले कानून को पारित कराने का जो नाटक रचा जा रहा है, प्रदेश की जागरूक जनता उसे सफल नहीं होने देगी। जल शक्ति विभाग के माध्यम से वसूली का यह आदेश कांग्रेस के अहंकार और दिवालियेपन का प्रतीक है। हिमाचल की जनता कांग्रेस के इस विश्वासघात को कभी नहीं भूलेगी। भाजपा इस जनविरोधी निर्णय के खिलाफ सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक उग्र आंदोलन करेगी। जनता के हक का पानी बेचने वाली इस 'लुटेरी सरकार' को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
शिमला , 11 मार्च [ विशाल सूद ] ! भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश कार्यसमिति सदस्य (IT विभाग) अरुष गुप्ता ने प्रदेश की वर्तमान सुक्खू सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पानी पर शुल्क लगाने के निर्णय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस जनविरोधी निर्णय की कठोरतम शब्दों में निंदा करते हुए इसे हिमाचल की स्वाभिमानी जनता की पीठ में छुरा घोंपने वाला कृत्य करार दिया।
अरुष गुप्ता ने जारी प्रेस नोट में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर कांग्रेस सरकार को घेरा:
1. वादों की अर्थी और 'झूठ' की राजनीति
सत्ता में आने से पहले कांग्रेस के नेताओं ने मंचों से चीख-चीख कर जनता को गुमराह किया था कि वे 'निशुल्क पानी' देंगे। लेकिन सत्ता का स्वाद चखते ही इस "ठग सरकार" के सुर बदल गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में APL से 100 रुपये और BPL परिवारों से 25 रुपये वसूलने का फरमान यह साबित करता है कि कांग्रेस के डीएनए में ही लूट और झूठ शामिल है।
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2. भाजपा सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों पर कुठाराघात
गुप्ता ने पूर्व की जयराम ठाकुर नीत भाजपा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों के दर्द को समझा था और उन्हें निशुल्क पानी की सुविधा प्रदान की थी। भाजपा का ध्येय सेवा था, लेकिन वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही उस जनकल्याणकारी योजना को बंद कर दिया। यह सरकार जनता को सुविधाएं देने के बजाय उनकी जेबों पर डाका डालने का काम कर रही है।
3. 'चोर' दरवाजे से जनता की जेब पर हमला
अरुष गुप्ता ने कड़े लहजे में कहा, "यह सरकार जनता की सेवा करने नहीं, बल्कि उन्हें निचोड़ने के लिए आई है। जो सरकार मुफ्त बिजली-पानी के नाम पर वोट मांगकर आई थी, आज वही सरकार पंचायतों के माध्यम से वसूली का नया 'टैक्स तंत्र' खड़ा कर रही है। यह हिमाचल की जनता के साथ सरेआम धोखाधड़ी है।"
4. ग्राम सभाओं का ढोंग बंद करे सरकार
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि विशेष ग्राम सभाएं बुलाकर इस काले कानून को पारित कराने का जो नाटक रचा जा रहा है, प्रदेश की जागरूक जनता उसे सफल नहीं होने देगी। जल शक्ति विभाग के माध्यम से वसूली का यह आदेश कांग्रेस के अहंकार और दिवालियेपन का प्रतीक है।
हिमाचल की जनता कांग्रेस के इस विश्वासघात को कभी नहीं भूलेगी। भाजपा इस जनविरोधी निर्णय के खिलाफ सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक उग्र आंदोलन करेगी। जनता के हक का पानी बेचने वाली इस 'लुटेरी सरकार' को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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