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चम्बा ! आज राजकीय महाविद्यालय चम्बा की राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर "संकल्प 2025-26" के सातवें एवम अंतिम दिन के कार्यक्रम का आयोजन हुआ । उक्त जानकारी देते हुए कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर अविनाश ने कहा कि सातवें दिन सर्वप्रथम स्वयंसेवी मनीषा द्वारा दिन का सुविचार "*धन से हम जीवन की सारी सुख सुविधा तो हासिल कर सकते हैँ पर जीवन में सुकून केवल अच्छे कर्मों से ही आता हैँ*" प्रस्तुत किया व उसका वर्णन किया। स्वयंसेवी निखिल गौतम द्वारा छठे दिन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। स्वयंसेवी नीरज ने अपनी स्वरचित कविता *पहलगांव* सबके समक्ष प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवी शिवानी द्वारा समाज में युवा नेतृत्व एवं युवाओं का राष्ट्र निर्माण में योगदान विषय पर विशेष व्याख्यान रखा। इसके बाद एन एस एस गीत "उठें समाज के लिए उठें- उठें, जगें स्वराष्ट्र के लिए जगें जगें, स्वयं सजें वसुंधरा संवार दें" गाकर दिन की शुरुआत की । उक्त जानकारी देते हुए कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर अविनाश ने कहा कि समापन समारोह के दौरान प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय चम्बा प्रोफेसर राकेश राठौर जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके इलावा *प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय तीसा प्रोफेसर परविंदर कुमार, डॉ मनेश वर्मा, डॉ शैली महाजन, सेवानिवृत अधीक्षक ग्रेड 1 मोनिका ठाकुर, अधीक्षक ग्रेड 1 मनमोहन सिंह, रविन्द्र सिंह, हितेश सलवानिया, लेखाकार प्रीतम, अक्षय कुमार* ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की । एकता ने मुस्कुराओ विषय पर अपने विचार रखे। सर्वप्रथम एन एस एस लक्ष्य गीत से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । उसके उपरांत मुख्यातिथि व अन्य अतिथियों द्वारा मां शारदा की प्रतिमा के सम्मुख पुष्पार्पण करके औपचारिक शुभारम्भ किया । इसके बाद कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर संतोष देवी द्वारा मुख्यातिथि व विशिष्ट अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया। चुना लोन द्वारा स्वरचित कविता, कृतिका का नारी पर वक्तव्य सभी को मन्त्रमुग्ध कर गया। इसके उपरांत पंजाबी लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से सब मन्त्रमुग्ध हो गए । हिमानी द्वारा सात दिनों का ब्यौरा अपने शब्दों और कविता के माध्यम से "अब अलविदा कहने का वक्त आ गया" रखा गया । कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर अविनाश द्वारा सात दिनों का लेखा- जोखा शिविर प्रतिवेदन के माध्यम से रखा । इसके उपरांत स्वयंसेवियों ने हिमाचली लोक नृत्य कर के सभी को नाचने पर मजबूर कर दिया। चुना लोन की भावनात्मक कविता ने सभी को भावुक कर दिया । अदिति के चमब्याली लोक गीतों की झड़ी ने सभी का खूब मनोरंजन किया। अमृता का लोक गीत *"माये नी मेरिये शिमले री राहें चम्बा कितनी की दूर"* सभी को बहुत भाया । अपने सम्बोधन में मुख्यातिथि द्वारा सबसे पहले सात दिवसीय विशेष शिविर के सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई दी । उन्होंने स्वयंसेवियों द्वारा सृजनात्मक गतिविधियों की खूब प्रशंसा की व कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के लक्ष्य प्राप्ति के लिए आप सब का समर्पण प्रशंसनीय है । आप सब इस महाविद्यालय के विकास के आधार स्तम्भ हैं । उन्होंने कहा कि हम साक्षर बनें, साक्षरता का प्रकाश फैलाएं तभी साक्षर भारत व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना की जा सकती है । नाशखोरी अन्य सामाजिक कुरीतियों को दूर भगाएँ । सफलता क्या है, मानसिक प्रसन्नता क्या है, खुश कैसे रहें, मन की खुराक मन को देते रहें , स्वस्थ रहें, स्वस्थ भारत होगा तभी आत्मनिर्भर भारत बनेगा। सच्ची खुशी हमें तब मिलेगी जब हम दूसरों के लिए कुछ करेंगे, दूसरों की भलाई करेंगे। जीवन में मुस्कुराना बहुत आवश्यक है । हमें संस्कारित भारत बनाना है । आंतरिक और बाहरी स्वच्छता को अपनाएं । सत्य एक है, उसको पाने के मार्ग अलग अलग हैं। अनुशासन एवं संयम को आत्मसात करें । उन्होंने कहा मानव शरीर पेड़ की भांति है। समय का सदुपयोग करें। सभी के सुख में सुखी और सभी के दुख में दुःख महसूस करें। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा को आत्मसात करने का सभी से आह्वान किया। अंत में स्वयंसेवियों द्वारा बेहतरीन *ग़दयाली नाटी* प्रस्तुत की गई जिस पर सभी उपस्थित जनमानस झूमते हुए नज़र आये ।प्रोफेसर संतोष द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया । प्रोफेसर अविनाश व प्रोफेसर संतोष द्वारा मुख्यातिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया । मुख्यातिथि द्वारा सभी अतिथियों व उत्कृष्ठ स्वयंसेवियों को समृति चिन्ह देकर सम्मनित किया गया । स्वयंसेवियों में शिवानी, खेम राज, अखिल, आश्विन, निखिल ठाकुर, बिंदिया, हिमानी, कुमारी पलक, जीतेन्द्र नेगी व विनायक* उत्कृष्ठ स्वंयमेसवी चुने गए। इसके इलावा समूह कप्तान में *कार्तिक, नीरज, तमन्ना, लतू तथा उप कप्तानों में अक्षिता, पायल, आदित्य, निखिल गौतम को भी उत्कृष्ट कार्यों के लिय सम्मानित किया गया । अतिथि स्वयंसेवियों में विशाल, चुना लोन और पिंकू को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय तीसा प्रोफेसर परविंदर कुमार, डॉ मनेश वर्मा, डॉ शैली महाजन, सेवानिवृत अधीक्षक ग्रेड 1 मोनिका ठाकुर, अधीक्षक ग्रेड 1 मनमोहन सिंह, रविन्द्र सिंह, हितेश सलवानिया, अक्षय कुमार, लेखाकार प्रीतम व कार्यक्रम अधिकारियों में प्रोफेसर अविनाश, प्रोफेसर संतोष व स्वयंसेवी उपस्थित रहे।
चम्बा ! आज राजकीय महाविद्यालय चम्बा की राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर "संकल्प 2025-26" के सातवें एवम अंतिम दिन के कार्यक्रम का आयोजन हुआ । उक्त जानकारी देते हुए कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर अविनाश ने कहा कि सातवें दिन सर्वप्रथम स्वयंसेवी मनीषा द्वारा दिन का सुविचार "*धन से हम जीवन की सारी सुख सुविधा तो हासिल कर सकते हैँ पर जीवन में सुकून केवल अच्छे कर्मों से ही आता हैँ*" प्रस्तुत किया व उसका वर्णन किया।
स्वयंसेवी निखिल गौतम द्वारा छठे दिन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। स्वयंसेवी नीरज ने अपनी स्वरचित कविता *पहलगांव* सबके समक्ष प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवी शिवानी द्वारा समाज में युवा नेतृत्व एवं युवाओं का राष्ट्र निर्माण में योगदान विषय पर विशेष व्याख्यान रखा। इसके बाद एन एस एस गीत "उठें समाज के लिए उठें- उठें, जगें स्वराष्ट्र के लिए जगें जगें, स्वयं सजें वसुंधरा संवार दें" गाकर दिन की शुरुआत की ।
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उक्त जानकारी देते हुए कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर अविनाश ने कहा कि समापन समारोह के दौरान प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय चम्बा प्रोफेसर राकेश राठौर जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इसके इलावा *प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय तीसा प्रोफेसर परविंदर कुमार, डॉ मनेश वर्मा, डॉ शैली महाजन, सेवानिवृत अधीक्षक ग्रेड 1 मोनिका ठाकुर, अधीक्षक ग्रेड 1 मनमोहन सिंह, रविन्द्र सिंह, हितेश सलवानिया, लेखाकार प्रीतम, अक्षय कुमार* ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की । एकता ने मुस्कुराओ विषय पर अपने विचार रखे।
सर्वप्रथम एन एस एस लक्ष्य गीत से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । उसके उपरांत मुख्यातिथि व अन्य अतिथियों द्वारा मां शारदा की प्रतिमा के सम्मुख पुष्पार्पण करके औपचारिक शुभारम्भ किया ।
इसके बाद कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर संतोष देवी द्वारा मुख्यातिथि व विशिष्ट अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया। चुना लोन द्वारा स्वरचित कविता, कृतिका का नारी पर वक्तव्य सभी को मन्त्रमुग्ध कर गया। इसके उपरांत पंजाबी लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से सब मन्त्रमुग्ध हो गए । हिमानी द्वारा सात दिनों का ब्यौरा अपने शब्दों और कविता के माध्यम से "अब अलविदा कहने का वक्त आ गया" रखा गया । कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर अविनाश द्वारा सात दिनों का लेखा- जोखा शिविर प्रतिवेदन के माध्यम से रखा । इसके उपरांत स्वयंसेवियों ने हिमाचली लोक नृत्य कर के सभी को नाचने पर मजबूर कर दिया।
चुना लोन की भावनात्मक कविता ने सभी को भावुक कर दिया । अदिति के चमब्याली लोक गीतों की झड़ी ने सभी का खूब मनोरंजन किया। अमृता का लोक गीत *"माये नी मेरिये शिमले री राहें चम्बा कितनी की दूर"* सभी को बहुत भाया ।
अपने सम्बोधन में मुख्यातिथि द्वारा सबसे पहले सात दिवसीय विशेष शिविर के सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई दी । उन्होंने स्वयंसेवियों द्वारा सृजनात्मक गतिविधियों की खूब प्रशंसा की व कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के लक्ष्य प्राप्ति के लिए आप सब का समर्पण प्रशंसनीय है । आप सब इस महाविद्यालय के विकास के आधार स्तम्भ हैं । उन्होंने कहा कि हम साक्षर बनें, साक्षरता का प्रकाश फैलाएं तभी साक्षर भारत व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना की जा सकती है । नाशखोरी अन्य सामाजिक कुरीतियों को दूर भगाएँ । सफलता क्या है, मानसिक प्रसन्नता क्या है, खुश कैसे रहें, मन की खुराक मन को देते रहें , स्वस्थ रहें, स्वस्थ भारत होगा तभी आत्मनिर्भर भारत बनेगा। सच्ची खुशी हमें तब मिलेगी जब हम दूसरों के लिए कुछ करेंगे, दूसरों की भलाई करेंगे। जीवन में मुस्कुराना बहुत आवश्यक है । हमें संस्कारित भारत बनाना है । आंतरिक और बाहरी स्वच्छता को अपनाएं । सत्य एक है, उसको पाने के मार्ग अलग अलग हैं। अनुशासन एवं संयम को आत्मसात करें । उन्होंने कहा मानव शरीर पेड़ की भांति है। समय का सदुपयोग करें। सभी के सुख में सुखी और सभी के दुख में दुःख महसूस करें। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा को आत्मसात करने का सभी से आह्वान किया।
अंत में स्वयंसेवियों द्वारा बेहतरीन *ग़दयाली नाटी* प्रस्तुत की गई जिस पर सभी उपस्थित जनमानस झूमते हुए नज़र आये ।प्रोफेसर संतोष द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया । प्रोफेसर अविनाश व प्रोफेसर संतोष द्वारा मुख्यातिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया । मुख्यातिथि द्वारा सभी अतिथियों व उत्कृष्ठ स्वयंसेवियों को समृति चिन्ह देकर सम्मनित किया गया । स्वयंसेवियों में शिवानी, खेम राज, अखिल, आश्विन, निखिल ठाकुर, बिंदिया, हिमानी, कुमारी पलक, जीतेन्द्र नेगी व विनायक* उत्कृष्ठ स्वंयमेसवी चुने गए। इसके इलावा समूह कप्तान में *कार्तिक, नीरज, तमन्ना, लतू तथा उप कप्तानों में अक्षिता, पायल, आदित्य, निखिल गौतम को भी उत्कृष्ट कार्यों के लिय सम्मानित किया गया । अतिथि स्वयंसेवियों में विशाल, चुना लोन और पिंकू को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय तीसा प्रोफेसर परविंदर कुमार, डॉ मनेश वर्मा, डॉ शैली महाजन, सेवानिवृत अधीक्षक ग्रेड 1 मोनिका ठाकुर, अधीक्षक ग्रेड 1 मनमोहन सिंह, रविन्द्र सिंह, हितेश सलवानिया, अक्षय कुमार, लेखाकार प्रीतम व कार्यक्रम अधिकारियों में प्रोफेसर अविनाश, प्रोफेसर संतोष व स्वयंसेवी उपस्थित रहे।
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