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करसोग ! करंट से एक हाथ गंवा देने के बाद भी करसोग की अंजना ठाकुर ने हिम्मत नहीं हारी। सेट पास करने के बाद अंजना ने पहले प्रयास में ही वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद सीएसआईआर की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ ) में अपनी जगह बना ली है। जमा दो की पढ़ाई पांगणा स्कूल से की और करसोग कॉलेज से बीएससी की। अब विवि में एमएससी कर रही हैं। अंजना ठाकुर का सपना प्रोफेसर बनना है। अंजना ठाकुर जब बीएससी के चौथे सेमेस्टर में थी। तब करंट से एक हाथ खोना पड़ा। लेकिन, अंजना ने हिम्मत नहीं हारी। माता चिंता देवी, पिता हंसराज और भाई गंगेश के सहयोग से अंजना को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैजल, वनस्पति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. देसराज ठाकुर ने अंजना ठाकुर की सफलता पर बधाई दी है।
करसोग ! करंट से एक हाथ गंवा देने के बाद भी करसोग की अंजना ठाकुर ने हिम्मत नहीं हारी। सेट पास करने के बाद अंजना ने पहले प्रयास में ही वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद सीएसआईआर की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ ) में अपनी जगह बना ली है। जमा दो की पढ़ाई पांगणा स्कूल से की और करसोग कॉलेज से बीएससी की। अब विवि में एमएससी कर रही हैं।
अंजना ठाकुर का सपना प्रोफेसर बनना है। अंजना ठाकुर जब बीएससी के चौथे सेमेस्टर में थी। तब करंट से एक हाथ खोना पड़ा। लेकिन, अंजना ने हिम्मत नहीं हारी। माता चिंता देवी, पिता हंसराज और भाई गंगेश के सहयोग से अंजना को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैजल, वनस्पति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. देसराज ठाकुर ने अंजना ठाकुर की सफलता पर बधाई दी है।
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