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चम्बा ! बचत भवन चंबा में शनिवार को न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ की कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन किया गया। इस मौके पर बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सुनील जरियाल ने की । बैठक में पुरानी पेंशन बहा ली के लिए सरकार के समक्ष अपनी मांग को और प्रभावी रूप से रखने बारे और विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले महासंघ के पदाधिकारियों द्वारा पुरानी पेंशन बहाली के लिए चर्चा की गई। बैठक में खंड स्तर पर महिला विंग का गठन करने , सभी विभागों के साथियों को एकजुट करने बारे चर्चा की गई। जिलाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने सभी विधायकों के माध्यम से मांग सदन में उठाने के लिए कहा था कि जिस तरह हिमाचल सरकार ने पूरे देश में सबसे पहले ओपीएस को बंद करके एनपीएस को लागू करने का निर्णय लिया था वो एक निंदनीय फैसला था । अब सरकार को चाहिए कि वो पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करे। प्रदेश सरकार पूरी तरह स्वतंत्र है और पुरानी पेंशन लागु करने के लिए उन्हें केंद्र की स्वीकृति की कोई आवश्यकता नही है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को 2004 से ही एनपीएस को लागू करने या ना करने के लिए स्वतंत्र रखा था। किसी प्रकार की कोई बाध्यता राज्य पर नही थी कि वह एनपीएस को लागू करें ही करें। जिलाध्यक्ष ने ये भी बताया की जहां पूरे देश में केंद्र सरकार ने अपने केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए 2004 से एनपीएस को लागू किया था।
चम्बा ! बचत भवन चंबा में शनिवार को न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ की कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन किया गया। इस मौके पर बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सुनील जरियाल ने की । बैठक में पुरानी पेंशन बहा ली के लिए सरकार के समक्ष अपनी मांग को और प्रभावी रूप से रखने बारे और विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले महासंघ के पदाधिकारियों द्वारा पुरानी पेंशन बहाली के लिए चर्चा की गई।
बैठक में खंड स्तर पर महिला विंग का गठन करने , सभी विभागों के साथियों को एकजुट करने बारे चर्चा की गई। जिलाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने सभी विधायकों के माध्यम से मांग सदन में उठाने के लिए कहा था कि जिस तरह हिमाचल सरकार ने पूरे देश में सबसे पहले ओपीएस को बंद करके एनपीएस को लागू करने का निर्णय लिया था वो एक निंदनीय फैसला था ।
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अब सरकार को चाहिए कि वो पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करे। प्रदेश सरकार पूरी तरह स्वतंत्र है और पुरानी पेंशन लागु करने के लिए उन्हें केंद्र की स्वीकृति की कोई आवश्यकता नही है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को 2004 से ही एनपीएस को लागू करने या ना करने के लिए स्वतंत्र रखा था।
किसी प्रकार की कोई बाध्यता राज्य पर नही थी कि वह एनपीएस को लागू करें ही करें। जिलाध्यक्ष ने ये भी बताया की जहां पूरे देश में केंद्र सरकार ने अपने केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए 2004 से एनपीएस को लागू किया था।
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