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शिमला ! पैट अध्यापक संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नरायण हिमराल महासचिव आत्माराम कोषाध्यक्ष गुरदीप सिंह वरिष्ट उपाध्यक्ष संजय चौधरी विपिन कौशल सलाहकार व उपाध्यक्ष नेकराम पण्डयार संजय ठाकूर रमेश फौजी मदन शर्मा ज्ञान ठाकूर महिला विंग से रेखा ठाकूर लीला शर्मा मीना शर्मा दवेन्द्र मुलख राज हौशियार सिह ठाकूर अनु पुरटा नवीन बरोटा खुबराम धर्मप्रकाश राजू इत्यादि सम्पूर्ण पूर्व कार्यकारणी ने सरकार के माध्यम से विभाग द्वारा नियमितिकरण की अधिसूचना जारी होने पर हैरानी जताई है तथा सरकार के रवैया ठीक न होने के कारण पैट अध्यापको के भविष्य के साथ खिलवाड करने के आरोप लगाए है संघ के पूर्व अध्यक्ष नरायण हिमराल ने कहा है कि सुफ्रीम कोर्ट के निर्णय आने के चार महीने बीत जाने के बाद भी विभाग ने जो देरी की है उससे स्पष्ट होता है कि सरकार मे अफसरशाही की तानाशाही चरम सीमा पर है तथा प्रदेश के कर्मचारियो के साथ भेदभाव कर रहे है पूर्व अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा है कि सरकार के माध्यम से जो अधिसूचना जारी हुई है इसका प्रदेश के पैट अध्यापक विरोध करते है .बता दे की पैट अध्यापक पिछले सत्रह सालो से दूरदराज की पाठशालाओ मे कम वेतन पर सेवाए दे रहे है पिछले तीन वर्ष पहले उक्त अध्यापको को नियमित पे स्केल तथा स्थानांतरण नीति मैडिकल लीव इन्क्रीमैंट जैसी सुविधाए पहले से ही मिल रही थी परन्तु भाजपा सरकार आने के तुरन्त बाद पैट अध्यापको के साथ सौतेला ब्यवहार करके सरकार ने इन्क्रीमैंट रोक दी थी जिससे की सरकार की मंशा साफ दिख रही थी 25जून को कैबिनेंट ने पैट अध्यापको को नियमितिकरण की प्रक्रियाओ को शिक्षा विभाग व वित विभाग के साथ मैटर को कलीयर करके 15 दिन का समय कैबिनेट के द्वारा विभाग को दिया गया था जिसका विभाग के कान पर जू तक नही रेंगी उल्टा मामेले को निदेशक प्रारम्भिक विभाग के हवाले कर दिया हैरानी तो उस समय हुई जब विभाग के पास उक्त अध्यापको का डाटा तक उपलब्ध नही था उसके पश्चात दोबारा से मामले को उलझा दिया तथा आनन फानन मे अधिसूचना निकाल दी जिसका पैट अध्यापक विरोध करते है संघ ने कहा है की बीजेपी सरकार ने वर्ष 2011 मे भी पैट अध्यापको के साथ भेदभाव किया था उस समय 1325 ग्रामीण विधा उपास्को को नियमित कर दिया था जबकी पैट अध्यापको के साथ भेदभाव किया गया था एक समय था जब जयराम सरकार विपक्ष मे थे तो उस समय विधानसभा मे उक्त अध्यापको के पक्ष मे जयराम जी स्वंम नियमितिकरण की पैरवी करते थे तथा विभिन्न प्रकार के तथ्य सामने रख कर नियमित करने की बात करते थे आज जब स्वंम सता मे है तो आज कथनी और करनी मे अन्तर स्पष्ट दिख रहा है .आज के समय की बात संघ ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार ने तुरन्त प्रभाव से अधिसूचना रद नही कि तो सम्पूर्ण पैट अध्यापक सडको पर उतर कर धरना प्रदर्शन करेगे जिसकी पूर्ण जिम्मेवारी जयराम सरकार की होगी बताते चले की पैट अध्यापक व ग्रामीण विधा उपास्क 2006 मे एक ही कैटेगिरी थी तथा जिसकी लिखित मे अधिसूचना निकाली गई थी परन्तु सता परिवर्तन होने के बाद प्रदेश मे भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी और 2011 मे बीजेपी के द्वारा रखे गए विधाउपास्को को बिना कंडीशन के नियमित कर दिया गया था .उस समय भी उक्त अध्यापको के साथ भेदभाव किया गया था .
शिमला ! पैट अध्यापक संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नरायण हिमराल महासचिव आत्माराम कोषाध्यक्ष गुरदीप सिंह वरिष्ट उपाध्यक्ष संजय चौधरी विपिन कौशल सलाहकार व उपाध्यक्ष नेकराम पण्डयार संजय ठाकूर रमेश फौजी मदन शर्मा ज्ञान ठाकूर महिला विंग से रेखा ठाकूर लीला शर्मा मीना शर्मा दवेन्द्र मुलख राज हौशियार सिह ठाकूर अनु पुरटा नवीन बरोटा खुबराम धर्मप्रकाश राजू इत्यादि सम्पूर्ण पूर्व कार्यकारणी ने सरकार के माध्यम से विभाग द्वारा नियमितिकरण की अधिसूचना जारी होने पर हैरानी जताई है तथा सरकार के रवैया ठीक न होने के कारण पैट अध्यापको के भविष्य के साथ खिलवाड करने के आरोप लगाए है संघ के पूर्व अध्यक्ष नरायण हिमराल ने कहा है कि सुफ्रीम कोर्ट के निर्णय आने के चार महीने बीत जाने के बाद भी विभाग ने जो देरी की है उससे स्पष्ट होता है कि सरकार मे अफसरशाही की तानाशाही चरम सीमा पर है तथा प्रदेश के कर्मचारियो के साथ भेदभाव कर रहे है पूर्व अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा है कि सरकार के माध्यम से जो अधिसूचना जारी हुई है इसका प्रदेश के पैट अध्यापक विरोध करते है .बता दे की पैट अध्यापक पिछले सत्रह सालो से दूरदराज की पाठशालाओ मे कम वेतन पर सेवाए दे रहे है पिछले तीन वर्ष पहले उक्त अध्यापको को नियमित पे स्केल तथा स्थानांतरण नीति मैडिकल लीव इन्क्रीमैंट जैसी सुविधाए पहले से ही मिल रही थी परन्तु भाजपा सरकार आने के तुरन्त बाद पैट अध्यापको के साथ सौतेला ब्यवहार करके सरकार ने इन्क्रीमैंट रोक दी थी जिससे की सरकार की मंशा साफ दिख रही थी 25जून को कैबिनेंट ने पैट अध्यापको को नियमितिकरण की प्रक्रियाओ को शिक्षा विभाग व वित विभाग के साथ मैटर को कलीयर करके 15 दिन का समय कैबिनेट के द्वारा विभाग को दिया गया था जिसका विभाग के कान पर जू तक नही रेंगी उल्टा मामेले को निदेशक प्रारम्भिक विभाग के हवाले कर दिया हैरानी तो उस समय हुई जब विभाग के पास उक्त अध्यापको का डाटा तक उपलब्ध नही था उसके पश्चात दोबारा से मामले को उलझा दिया तथा आनन फानन मे अधिसूचना निकाल दी जिसका पैट अध्यापक विरोध करते है संघ ने कहा है की बीजेपी सरकार ने वर्ष 2011 मे भी पैट अध्यापको के साथ भेदभाव किया था उस समय 1325 ग्रामीण विधा उपास्को को नियमित कर दिया था जबकी पैट अध्यापको के साथ भेदभाव किया गया था एक समय था जब जयराम सरकार विपक्ष मे थे तो उस समय विधानसभा मे उक्त अध्यापको के पक्ष मे जयराम जी स्वंम नियमितिकरण की पैरवी करते थे तथा विभिन्न प्रकार के तथ्य सामने रख कर नियमित करने की बात करते थे आज जब स्वंम सता मे है तो आज कथनी और करनी मे अन्तर स्पष्ट दिख रहा है .आज के समय की बात संघ ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार ने तुरन्त प्रभाव से अधिसूचना रद नही कि तो सम्पूर्ण पैट अध्यापक सडको पर उतर कर धरना प्रदर्शन करेगे जिसकी पूर्ण जिम्मेवारी जयराम सरकार की होगी बताते चले की पैट अध्यापक व ग्रामीण विधा उपास्क 2006 मे एक ही कैटेगिरी थी तथा जिसकी लिखित मे अधिसूचना निकाली गई थी परन्तु सता परिवर्तन होने के बाद प्रदेश मे भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी और 2011 मे बीजेपी के द्वारा रखे गए विधाउपास्को को बिना कंडीशन के नियमित कर दिया गया था .उस समय भी उक्त अध्यापको के साथ भेदभाव किया गया था .
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