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नालागढ़ ! 1982 से ट्रक यूनियन उद्योग जगत के साथ मिलकर उनके माल की ढुलाई करती है लेकिन गत दिनों बीबीएन के उद्योग संगठनों ने यूनियन पर जो संगीन आरोप लगाए हैं उनमें कोई आधार नहीं है। वास्तविकता कुछ और है जबकि सरकार व लोगों को कुछ और ही दिखाया जा रहा है। यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में ट्रक यूनियन नालागढ़ के अध्यक्ष विद्या रत्न चौधरी, ट्रक आपरेटर सोसाईटी के अध्यक्ष हरभजन चौधरी ,कोषाध्यक्ष वीर सिंह चंदेल व वरिष्ठ सदस्य ईश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि 2019 में डिस्काउंट कुछ शर्तो के साथ लागू किया था बीबीएनआईए उद्योग संघ के साथ न कि वो सीधी छूट थी। इसमें हमारे पहली शर्त थी इंडस्ट्री अपना डायरेक्ट लोड लम्बे रूट का माल यूनियन को देगी। किराये की अदाएगी पहुंच जमा होने के 7 दिन में सुनिश्चित होगा, जिन उद्योगों में अपने खुद के ट्रक डाले है उन्हें अपने माल का 70 प्रतिशत निष्पादन यूनियन के द्वारा किया जाएगा। इन शर्तो पर हमने बी बी एन आई के साथ इस तरह किराये पर डिस्काउंट देने पर सहमती प्रकट की थी लेकिन जब उद्योग संगठनों ने यह शर्तें ही पूरी नहीं की तो यह समझौता अपने आप उन्होने की तोड दिया हमने नहींं। हमारे रेट 10 से 12 फीसदी बढने थे लेकिन तब लॉकडाऊन लग गया और हमने देश हित में व सरकार के आग्रह पर उस समय जो जैसा था वैसे ही चलने दिया लेकिन अपनी जान पर खेल कर उद्यमियों का माल संबधित डैस्टीनेशन तक पहुंचाया। ट्रक यूनियन के अध्यक्ष विद्या रत्न चौधरी ने कहा कि अब सरकार द्वारा किश्तों में दी गयी रियायत अवधि भी अगस्त में समाप्त हो रही है इसलिए हमारे ऑपरेटर की किश्ते भी अदा नहीं हो पा रही है जिसकी वजह से ऑपरेटर्स द्वारा यूनियन मैनेजमेंट को इंडस्ट्री को दिया गया डिस्काउंट वापिस लेने का आग्रह किया किया इसी पर यूनियन मैनेजमेंट ने यह डिस्काउंट वापिस लेने का फैसला किया जबकि किराया एक पैसे भी नहीं बढा। उन्होने उद्योग संगठनों के तमाम आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि रेट 1982 में तय किये गए थे तब इंडस्ट्री शुरू ही हुयी थी उस समय कोई पैकेज नहीं था सरकार की मध्यस्था से रेट तय किये गए थे आज भी वही रेट चल रहे है उनमे कोई बडा बदलाव नहीं किया गया है। उद्योगपतियों द्वारा सरकार पर भी उंगली उठायी गयी की सरकार को यूनियन या इंडस्ट्री में से किसी का चुनाव करना होगा यह बयान बिलकुल गलत है। सरकार ने लोगो की भलाई के लिए हिमाचल में इंडस्ट्री को पैकेज दिया था जिससे हिमाचली लोगो को रोजगार मिल सके इसके इलावा स्थानीय लोगो ने अपनी जमीने ओने पौने दामो में वेचकर गाडियां डाली ताकि उनकी जीविका चल सके पर इंडस्ट्री ने अपनी गाडियां डालनी शुरू कर दी और हिमाचली लोगो को काम देने में आनाकानी करने लगे बही लोग आज यूनियन पर ऊँगली उठा रहे है। हम विकास के विरोधी नहीं है लेकिन सही बात ही बीबीएनआईए को सामने रखनी चाहिए। चौधरी विद्यारतन ने कहा स्टील इंडस्ट्री ने जो आरोप लगाया है वो पूरी तरह निराधार है क्योंकि स्टील इंडस्ट्री में अधिकतर उद्योगों के पास अपने अपनी गाडिया है बे सिर्फ बचा हुआ माल ही यूनियन को देते है। यूनियन को मु_ी भर लोगो की संस्था कहा गया जो कि निंदनीय है । जिस यूनियन से 10000 ट्रक मालिको और 50000 लोगो का घर चलता हो उसपर ऐसी टिपणी अस्वीकार्य है । यूनियन ने कहा कि उद्योगपतियों द्वारा अपने मौलिक अधिकारों की बात की जा रही है पर वे भूल रहे है की इस देश में हर व्यक्ति के मौलिक अधिकार बराबर है उसमे स्थानीय लोग भी आते है इंडस्ट्री आने से लोकल लोग सबसे ज्यादा भुगतने वाले हैं। वे प्रदूषण की मार झेल रहे है बाहरी कामगार आने से कही न कहीं इलाके की शान्ति में भी खलल पडा है। उद्योगपतियों को ऐसी टिपणी करने से पहले हरेक के मौलिक अधिकारों के बारे में सोचना चाहिए। इस अवसर हुई मीटींग में संस्था के प्रधान विद्या रत्तन, सोसाईटी के अध्यक्ष हरभजन सिंह, महासचिव जगदीश चंद , उपप्रधान जरनैल सिंह, कैशियर बीर सिंह चंदेल देवी शरण खुल्लर भाग सिंह चौधरी उपप्रधान स्वर्ण सिंह सैनी, ईश्वर सिंह ठाकुर व कार्यालय सचिव सुरजीत सैणी भी उपस्थित थे।
नालागढ़ ! 1982 से ट्रक यूनियन उद्योग जगत के साथ मिलकर उनके माल की ढुलाई करती है लेकिन गत दिनों बीबीएन के उद्योग संगठनों ने यूनियन पर जो संगीन आरोप लगाए हैं उनमें कोई आधार नहीं है। वास्तविकता कुछ और है जबकि सरकार व लोगों को कुछ और ही दिखाया जा रहा है। यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में ट्रक यूनियन नालागढ़ के अध्यक्ष विद्या रत्न चौधरी, ट्रक आपरेटर सोसाईटी के अध्यक्ष हरभजन चौधरी ,कोषाध्यक्ष वीर सिंह चंदेल व वरिष्ठ सदस्य ईश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि 2019 में डिस्काउंट कुछ शर्तो के साथ लागू किया था बीबीएनआईए उद्योग संघ के साथ न कि वो सीधी छूट थी। इसमें हमारे पहली शर्त थी इंडस्ट्री अपना डायरेक्ट लोड लम्बे रूट का माल यूनियन को देगी। किराये की अदाएगी पहुंच जमा होने के 7 दिन में सुनिश्चित होगा, जिन उद्योगों में अपने खुद के ट्रक डाले है उन्हें अपने माल का 70 प्रतिशत निष्पादन यूनियन के द्वारा किया जाएगा। इन शर्तो पर हमने बी बी एन आई के साथ इस तरह किराये पर डिस्काउंट देने पर सहमती प्रकट की थी लेकिन जब उद्योग संगठनों ने यह शर्तें ही पूरी नहीं की तो यह समझौता अपने आप उन्होने की तोड दिया हमने नहींं।
हमारे रेट 10 से 12 फीसदी बढने थे लेकिन तब लॉकडाऊन लग गया और हमने देश हित में व सरकार के आग्रह पर उस समय जो जैसा था वैसे ही चलने दिया लेकिन अपनी जान पर खेल कर उद्यमियों का माल संबधित डैस्टीनेशन तक पहुंचाया। ट्रक यूनियन के अध्यक्ष विद्या रत्न चौधरी ने कहा कि अब सरकार द्वारा किश्तों में दी गयी रियायत अवधि भी अगस्त में समाप्त हो रही है इसलिए हमारे ऑपरेटर की किश्ते भी अदा नहीं हो पा रही है जिसकी वजह से ऑपरेटर्स द्वारा यूनियन मैनेजमेंट को इंडस्ट्री को दिया गया डिस्काउंट वापिस लेने का आग्रह किया किया इसी पर यूनियन मैनेजमेंट ने यह डिस्काउंट वापिस लेने का फैसला किया जबकि किराया एक पैसे भी नहीं बढा। उन्होने उद्योग संगठनों के तमाम आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि रेट 1982 में तय किये गए थे तब इंडस्ट्री शुरू ही हुयी थी उस समय कोई पैकेज नहीं था सरकार की मध्यस्था से रेट तय किये गए थे आज भी वही रेट चल रहे है उनमे कोई बडा बदलाव नहीं किया गया है। उद्योगपतियों द्वारा सरकार पर भी उंगली उठायी गयी की सरकार को यूनियन या इंडस्ट्री में से किसी का चुनाव करना होगा यह बयान बिलकुल गलत है। सरकार ने लोगो की भलाई के लिए हिमाचल में इंडस्ट्री को पैकेज दिया था जिससे हिमाचली लोगो को रोजगार मिल सके इसके इलावा स्थानीय लोगो ने अपनी जमीने ओने पौने दामो में वेचकर गाडियां डाली ताकि उनकी जीविका चल सके पर इंडस्ट्री ने अपनी गाडियां डालनी शुरू कर दी और हिमाचली लोगो को काम देने में आनाकानी करने लगे बही लोग आज यूनियन पर ऊँगली उठा रहे है। हम विकास के विरोधी नहीं है लेकिन सही बात ही बीबीएनआईए को सामने रखनी चाहिए। चौधरी विद्यारतन ने कहा स्टील इंडस्ट्री ने जो आरोप लगाया है वो पूरी तरह निराधार है क्योंकि स्टील इंडस्ट्री में अधिकतर उद्योगों के पास अपने अपनी गाडिया है बे सिर्फ बचा हुआ माल ही यूनियन को देते है।
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यूनियन को मु_ी भर लोगो की संस्था कहा गया जो कि निंदनीय है । जिस यूनियन से 10000 ट्रक मालिको और 50000 लोगो का घर चलता हो उसपर ऐसी टिपणी अस्वीकार्य है । यूनियन ने कहा कि उद्योगपतियों द्वारा अपने मौलिक अधिकारों की बात की जा रही है पर वे भूल रहे है की इस देश में हर व्यक्ति के मौलिक अधिकार बराबर है उसमे स्थानीय लोग भी आते है इंडस्ट्री आने से लोकल लोग सबसे ज्यादा भुगतने वाले हैं। वे प्रदूषण की मार झेल रहे है बाहरी कामगार आने से कही न कहीं इलाके की शान्ति में भी खलल पडा है।
उद्योगपतियों को ऐसी टिपणी करने से पहले हरेक के मौलिक अधिकारों के बारे में सोचना चाहिए। इस अवसर हुई मीटींग में संस्था के प्रधान विद्या रत्तन, सोसाईटी के अध्यक्ष हरभजन सिंह, महासचिव जगदीश चंद , उपप्रधान जरनैल सिंह, कैशियर बीर सिंह चंदेल देवी शरण खुल्लर भाग सिंह चौधरी उपप्रधान स्वर्ण सिंह सैनी, ईश्वर सिंह ठाकुर व कार्यालय सचिव सुरजीत सैणी भी उपस्थित थे।
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