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शिमला , 29 अगस्त [ विशाल सूद ] ! मंडी में हाल ही में आई भीषण बाढ़, कुल्लू जिले में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ से कीरतपुर-पंडोह- कुल्लू-मनाली कॉरिडोर को हुए नुकसान को देखते हुए, एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने एनएचएआई मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और शिमला स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ एक बैठक की। बैठक में स्थिति की समीक्षा की गई और हिमाचल प्रदेश में एनएच-21 के कीरतपुर-पंडोह- कुल्लू-मनाली खंड पर तत्काल जीर्णोद्धार/सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। जीर्णोद्धार कार्य में कुल्लू-मनाली खंड पर दस स्थान शामिल होंगे जो पूरी तरह से बह गए हैं और पाँच स्थान जो मूसलाधार बारिश/बाढ़ से आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप एनएच-21 के माध्यम से पर्यटन नगरी मनाली का राज्य के बाकी हिस्सों से संपर्क टूट गया है। हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की वैकल्पिक सड़क भी क्षतिग्रस्त हो गई है, इसलिए केवल हल्के वाहनों को हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (एचपीपीडब्ल्यूडी) मार्ग से होकर भेजा गया है। एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात द्वारा उपयोग की जा रही पीडब्ल्यूडी सड़क की तत्काल बहाली और रखरखाव के लिए हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (एचपीपीडब्ल्यूडी) को वित्तीय सहायता प्रदान करने का भी निर्णय लिया है। पहुँच की दुर्गमता को ध्यान में रखते हुए, एनएचएआई द्वारा तत्काल संपर्क बहाल करने के लिए अस्थायी बहाली के उपाय किए जाएँगे। इस उद्देश्य के लिए, तत्काल आवश्यक कार्यों के लिए एनएचएआई क्षेत्रीय कार्यालय, शिमला को पर्याप्त धनराशि स्वीकृत की गई है। साथ ही, एनएचएआई द्वारा साइट पर उपलब्ध रखरखाव ठेकेदार को भी तैनात कर दिया गया है, और राजमार्ग खंड की अस्थायी बहाली का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कीरतपुर-पंडोह-मनाली खंड पर बारिश/बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए अन्य स्थानों की स्थायी बहाली की जाएगी। स्थायी बहाली के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम चल रहा है। स्थायी बहाली के विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें सुरंगों का निर्माण, ऊँची संरचनाएँ और ढलान स्थिरीकरण शामिल हैं। अल्पकालिक सुधार के लिए एनएचएआई द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इन खंडों के दीर्घकालिक समाधान के लिए भी उपाय किए जा रहे हैं। भारी बारिश, बाढ़ और बादल फटने से पहाड़ी क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों को नुकसान पहुँचा है, जिससे परिवहन बाधित हुआ है और स्थानीय समुदाय प्रभावित हुए हैं। एनएचएआई इन संवेदनशील क्षेत्रों में शीघ्र बहाली सुनिश्चित करने और यात्रा एवं वाणिज्य पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए बहाली और सुरक्षा उपायों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
शिमला , 29 अगस्त [ विशाल सूद ] ! मंडी में हाल ही में आई भीषण बाढ़, कुल्लू जिले में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ से कीरतपुर-पंडोह- कुल्लू-मनाली कॉरिडोर को हुए नुकसान को देखते हुए, एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने एनएचएआई मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और शिमला स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ एक बैठक की। बैठक में स्थिति की समीक्षा की गई और हिमाचल प्रदेश में एनएच-21 के कीरतपुर-पंडोह- कुल्लू-मनाली खंड पर तत्काल जीर्णोद्धार/सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है।
जीर्णोद्धार कार्य में कुल्लू-मनाली खंड पर दस स्थान शामिल होंगे जो पूरी तरह से बह गए हैं और पाँच स्थान जो मूसलाधार बारिश/बाढ़ से आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप एनएच-21 के माध्यम से पर्यटन नगरी मनाली का राज्य के बाकी हिस्सों से संपर्क टूट गया है। हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की वैकल्पिक सड़क भी क्षतिग्रस्त हो गई है, इसलिए केवल हल्के वाहनों को हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (एचपीपीडब्ल्यूडी) मार्ग से होकर भेजा गया है। एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात द्वारा उपयोग की जा रही पीडब्ल्यूडी सड़क की तत्काल बहाली और रखरखाव के लिए हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (एचपीपीडब्ल्यूडी) को वित्तीय सहायता प्रदान करने का भी निर्णय लिया है।
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पहुँच की दुर्गमता को ध्यान में रखते हुए, एनएचएआई द्वारा तत्काल संपर्क बहाल करने के लिए अस्थायी बहाली के उपाय किए जाएँगे। इस उद्देश्य के लिए, तत्काल आवश्यक कार्यों के लिए एनएचएआई क्षेत्रीय कार्यालय, शिमला को पर्याप्त धनराशि स्वीकृत की गई है। साथ ही, एनएचएआई द्वारा साइट पर उपलब्ध रखरखाव ठेकेदार को भी तैनात कर दिया गया है, और राजमार्ग खंड की अस्थायी बहाली का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, कीरतपुर-पंडोह-मनाली खंड पर बारिश/बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए अन्य स्थानों की स्थायी बहाली की जाएगी। स्थायी बहाली के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम चल रहा है। स्थायी बहाली के विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें सुरंगों का निर्माण, ऊँची संरचनाएँ और ढलान स्थिरीकरण शामिल हैं। अल्पकालिक सुधार के लिए एनएचएआई द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इन खंडों के दीर्घकालिक समाधान के लिए भी उपाय किए जा रहे हैं।
भारी बारिश, बाढ़ और बादल फटने से पहाड़ी क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों को नुकसान पहुँचा है, जिससे परिवहन बाधित हुआ है और स्थानीय समुदाय प्रभावित हुए हैं। एनएचएआई इन संवेदनशील क्षेत्रों में शीघ्र बहाली सुनिश्चित करने और यात्रा एवं वाणिज्य पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए बहाली और सुरक्षा उपायों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
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