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हमीरपुर , 11 फरवरी [ बिंदिया ठाकुर ] ! क़ृषि प्रोद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (ATMA) के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय जागरूकता शिविर का समापन ग्राम प्लाही, पंचायत जोल प्लाही में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इससे पूर्व पंचायत दाड़ला के गांव दाड़ला में शिविर का शुभारंभ भी विधायक कैप्टन रणजीत सिंह द्वारा किया गया था। दोनों कार्यक्रमों में किसानों की भारी उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र के किसान आज खेती के नए, सुरक्षित और टिकाऊ तरीकों को अपनाने के लिए जागरूक हो रहे हैं।कार्यक्रम के दौरान खंड तकनीकी प्रबंधक द्वारा विधायक कैप्टन रणजीत सिंह को शाल और टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि प्राकृतिक खेती को लेकर विधायक की सोच, उनके अनुभव और किसानों के प्रति उनके निरंतर सहयोग का प्रतीक भी था। खंड तकनीकी प्रबंधक ने किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व, इसके लाभ और इसे अपनाने की व्यावहारिक विधियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है, जबकि प्राकृतिक खेती से भूमि की सेहत बनी रहती है और उत्पादन भी सुरक्षित होता है। अपने संबोधन में विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने प्राकृतिक खेती को केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि जीवनशैली बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उगाया गया अन्न, फल और सब्जियां न केवल अधिक पौष्टिक होती हैं, बल्कि इससे मानव जीवन भी स्वस्थ और दीर्घायु बनता है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा, “मुझे सेवानिवृत्त हुए आज लगभग 20 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन मैंने आज तक यूरिया का इस्तेमाल नहीं किया। प्राकृतिक तरीके से उगाया गया भोजन ही मेरी सेहत का आधार है।” विधायक ने किसानों से आग्रह किया कि वे रासायनिक खेती से होने वाले तात्कालिक लाभ के बजाय प्राकृतिक खेती के दीर्घकालिक फायदों को समझें। उन्होंने कहा कि आज कई बीमारियों की जड़ हमारे भोजन में मिल रहे रसायन हैं। यदि किसान प्राकृतिक खेती अपनाते हैं तो न केवल उनकी आमदनी स्थिर होगी, बल्कि समाज को भी स्वस्थ भोजन मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार और विभाग किसानों के साथ खड़े हैं और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम के अंत में किसानों को कृषि संबंधी सामग्री भी उपलब्ध करवाई गई, जिससे वे प्राकृतिक खेती की शुरुआत या विस्तार कर सकें। किसानों ने भी विधायक के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती से लागत कम होती है और बाजार में इसके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। कई किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ी है। यह दो दिवसीय जागरूकता शिविर केवल एक कार्यक्रम भर नहीं था, बल्कि सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में खेती की दिशा बदलने की एक मजबूत पहल साबित हुआ। विधायक कैप्टन रणजीत सिंह का यह स्पष्ट संदेश रहा कि यदि किसान, विभाग और सरकार मिलकर कार्य करें तो प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसान आर्थिक रूप से मजबूत बन सकता है और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, पौष्टिक भोजन मिल सकता है। अंततः यह कहा जा सकता है कि प्राकृतिक खेती आज समय की आवश्यकता है और विधायक कैप्टन रणजीत सिंह जैसे जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर हिमाचल के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
हमीरपुर , 11 फरवरी [ बिंदिया ठाकुर ] ! क़ृषि प्रोद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (ATMA) के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय जागरूकता शिविर का समापन ग्राम प्लाही, पंचायत जोल प्लाही में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इससे पूर्व पंचायत दाड़ला के गांव दाड़ला में शिविर का शुभारंभ भी विधायक कैप्टन रणजीत सिंह द्वारा किया गया था।
दोनों कार्यक्रमों में किसानों की भारी उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र के किसान आज खेती के नए, सुरक्षित और टिकाऊ तरीकों को अपनाने के लिए जागरूक हो रहे हैं।कार्यक्रम के दौरान खंड तकनीकी प्रबंधक द्वारा विधायक कैप्टन रणजीत सिंह को शाल और टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि प्राकृतिक खेती को लेकर विधायक की सोच, उनके अनुभव और किसानों के प्रति उनके निरंतर सहयोग का प्रतीक भी था।
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खंड तकनीकी प्रबंधक ने किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व, इसके लाभ और इसे अपनाने की व्यावहारिक विधियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है, जबकि प्राकृतिक खेती से भूमि की सेहत बनी रहती है और उत्पादन भी सुरक्षित होता है।
अपने संबोधन में विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने प्राकृतिक खेती को केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि जीवनशैली बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उगाया गया अन्न, फल और सब्जियां न केवल अधिक पौष्टिक होती हैं, बल्कि इससे मानव जीवन भी स्वस्थ और दीर्घायु बनता है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा, “मुझे सेवानिवृत्त हुए आज लगभग 20 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन मैंने आज तक यूरिया का इस्तेमाल नहीं किया। प्राकृतिक तरीके से उगाया गया भोजन ही मेरी सेहत का आधार है।”
विधायक ने किसानों से आग्रह किया कि वे रासायनिक खेती से होने वाले तात्कालिक लाभ के बजाय प्राकृतिक खेती के दीर्घकालिक फायदों को समझें। उन्होंने कहा कि आज कई बीमारियों की जड़ हमारे भोजन में मिल रहे रसायन हैं। यदि किसान प्राकृतिक खेती अपनाते हैं तो न केवल उनकी आमदनी स्थिर होगी, बल्कि समाज को भी स्वस्थ भोजन मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार और विभाग किसानों के साथ खड़े हैं और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम के अंत में किसानों को कृषि संबंधी सामग्री भी उपलब्ध करवाई गई, जिससे वे प्राकृतिक खेती की शुरुआत या विस्तार कर सकें। किसानों ने भी विधायक के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती से लागत कम होती है और बाजार में इसके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। कई किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ी है।
यह दो दिवसीय जागरूकता शिविर केवल एक कार्यक्रम भर नहीं था, बल्कि सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में खेती की दिशा बदलने की एक मजबूत पहल साबित हुआ। विधायक कैप्टन रणजीत सिंह का यह स्पष्ट संदेश रहा कि यदि किसान, विभाग और सरकार मिलकर कार्य करें तो प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसान आर्थिक रूप से मजबूत बन सकता है और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, पौष्टिक भोजन मिल सकता है।
अंततः यह कहा जा सकता है कि प्राकृतिक खेती आज समय की आवश्यकता है और विधायक कैप्टन रणजीत सिंह जैसे जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर हिमाचल के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
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