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बिलासपुर, 10 फरवरी: नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) जिला केंद्र बिलासपुर द्वारा “सेफर इंटरनेट डे-2026” के अवसर पर राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), बिलासपुर में एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन संयुक्त निदेशक (आईटी) एवं जिला सूचना अधिकारी (डीआईओ) एनआईसी बिलासपुर राकेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यशाला में राकेश कुमार ने इंटरनेट सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, साइबर स्वच्छता तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सुरक्षित और उत्तरदायी उपयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने एआई से जुड़े बढ़ते जोखिमों, विशेष रूप से डीपफेक वीडियो, ऑडियो और इमेज की पहचान के तरीकों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने भारत में हाल ही में सामने आए एआई खतरों, साइबर धोखाधड़ी, साइबर गिरफ्तारी और साइबर हमलों के वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत किए। साइबर दुनिया में प्रचलित विभिन्न प्रकार के खतरों जैसे फिशिंग, विशिंग, स्मिशिंग, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग तथा बैंकिंग एवं ओटीपी धोखाधड़ी के बारे में विस्तार से बताया और उनसे बचाव के उपाय सुझाए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल वैध ( HTTPS/SSL प्रमाणित) वेबसाइटों का ही उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दो-कारक प्रमाणीकरण अनिवार्य रूप से सक्रिय रखने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि सभी ऐप केवल आधिकारिक एंड्रॉइड-आईओएस ऐप स्टोर से ही डाउनलोड किए जाएं तथा कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल उपकरणों के ऑपरेटिंग सिस्टम और एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट रखा जाए। कार्यशाला में साइबर खतरों को कम करने के उपायों के साथ-साथ डेटा उल्लंघन की स्थिति में रिपोर्टिंग के आवश्यक कदमों पर भी चर्चा की गई।इस अवसर पर आईटीआई बिलासपुर के प्रधानाचार्य ओंकार सिंह, अनुदेशकगण, एनआईसी इंजीनियर विवेक गुप्ता, श्याम कौशल तथा लगभग 150 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यशाला में राकेश कुमार ने इंटरनेट सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, साइबर स्वच्छता तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सुरक्षित और उत्तरदायी उपयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने एआई से जुड़े बढ़ते जोखिमों, विशेष रूप से डीपफेक वीडियो, ऑडियो और इमेज की पहचान के तरीकों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
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उन्होंने भारत में हाल ही में सामने आए एआई खतरों, साइबर धोखाधड़ी, साइबर गिरफ्तारी और साइबर हमलों के वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत किए। साइबर दुनिया में प्रचलित विभिन्न प्रकार के खतरों जैसे फिशिंग, विशिंग, स्मिशिंग, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग तथा बैंकिंग एवं ओटीपी धोखाधड़ी के बारे में विस्तार से बताया और उनसे बचाव के उपाय सुझाए।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल वैध ( HTTPS/SSL प्रमाणित) वेबसाइटों का ही उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दो-कारक प्रमाणीकरण अनिवार्य रूप से सक्रिय रखने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि सभी ऐप केवल आधिकारिक एंड्रॉइड-आईओएस ऐप स्टोर से ही डाउनलोड किए जाएं तथा कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल उपकरणों के ऑपरेटिंग सिस्टम और एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट रखा जाए।
कार्यशाला में साइबर खतरों को कम करने के उपायों के साथ-साथ डेटा उल्लंघन की स्थिति में रिपोर्टिंग के आवश्यक कदमों पर भी चर्चा की गई।
इस अवसर पर आईटीआई बिलासपुर के प्रधानाचार्य ओंकार सिंह, अनुदेशकगण, एनआईसी इंजीनियर विवेक गुप्ता, श्याम कौशल तथा लगभग 150 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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