90 प्रतिशत पेट का हिस्सा लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से निकाला,उतर भारत मे पहली बार हुई ऐसी ऑपरेशन,
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शिमला , 11 फरवरी [ विशाल सूद ] ! स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) ने एक बार फिर जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सर्जरी विभाग की टीम ने 44 वर्षीय पेट के कैंसर से ग्रसित मरीज का ऑपरेशन कर 90 प्रतिशत पेट का हिस्सा लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से निकालकर उसका पुनर्निर्माण किया। लगभग छह घंटे तक चली यह सर्जरी सफल रही और मरीज की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।उतर भारत मे पहली तरह का ये ऑपरेशन है। अब तक आईजीएमसी में लैप्रोस्कोपी के माध्यम से अधिकतम 50 प्रतिशत पेट निकालने की सर्जरी की गई थी। पहली बार 90 प्रतिशत पेट हटाने जैसी जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है, जो चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। आइजीएमसी के एमएस डॉ राहुल राव ने कहा कि इंदिरा गाँधी मैडिकल कॉलेज शिमला में सर्जरी विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यहां पेट के कैंसर के लिये पहली बार पूर्ण रूप से लैप्रोस्कोपी नियर टोटल गैस्ट्रैक्टॉमी सफलतापूर्वक की गई है। यह ऑपरेशन शिमला की 44 वर्षीय महिला मरीज का 2 फरवरी 2026 को किया गया। यह उपलब्धि आई०जी०एम०सी० के इतिहास में एक मील का पत्थर है। इस तरह की जटिल सर्जरी आमतौर पर बडे निजी अस्पतालों में की जाती है। उत्तर भारत में सरकारी अस्पताल में की गई यह पहली सर्जरी है। यह ऑपरेशन युनिट विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ० वेद शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया है। इस तरह की जटिल शल्य चिकित्सा सफलता के संबंध में यह भी सहर्ष सूचित किया जाता है कि उक्त जटिल सर्जरी आई०जी०एम०सी० चिकित्सा संस्थान में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा मशीनों व उपकरणों के नवीनीकरण अथवा नये व एडवांस सैटअप के फलस्वरूप इस तरह के सफल ऑपरेशन संभव हो पा रहे है, जो कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह "सुक्खु" हिमाचल प्रदेश सरकार की दूरदर्शी सोच व चिकित्सा संस्थानों के प्रति आधुनिक मशीनों के लिये किये जा रहे प्रयासों के फलस्वरूप ही संभव हो पाया है। डॉ० विपन के शर्मा, सहायक प्रोफेसर सर्जिकल गैस्ट्रोएंटोलॉजी ने कहा कि 44 वर्षीय पेट के कैंसर से ग्रसित मरीज का ऑपरेशन कर 90 प्रतिशत पेट का हिस्सा लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से निकालकर उसका पुनर्निर्माण किया। लगभग छह घंटे तक चली यह सर्जरी सफल रही और मरीज की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।उन्होंने कहा कि मरीज पिछले कई महीनों से पेट दर्द, लगातार वजन घटने और खाने में परेशानी जैसी समस्याओं से परेशान था। विस्तृत जांच के बाद उसमें उन्नत अवस्था के गैस्ट्रिक कैंसर की पुष्टि हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों, एनेस्थीसिया टीम और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की संयुक्त टीम बनाई गई। पूरी रणनीति और सावधानी के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। यूनिट हैड डॉ वैद शर्मा ने बताया कि लैप्रोस्कोपिक तकनीक से इतने बड़े हिस्से की सर्जरी करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। इस विधि में छोटे-छोटे चीरे लगाकर ऑपरेशन किया जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है, दर्द कम रहता है और मरीज जल्दी स्वस्थ होता है।
शिमला , 11 फरवरी [ विशाल सूद ] ! स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) ने एक बार फिर जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सर्जरी विभाग की टीम ने 44 वर्षीय पेट के कैंसर से ग्रसित मरीज का ऑपरेशन कर 90 प्रतिशत पेट का हिस्सा लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से निकालकर उसका पुनर्निर्माण किया। लगभग छह घंटे तक चली यह सर्जरी सफल रही और मरीज की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।उतर भारत मे पहली तरह का ये ऑपरेशन है।
अब तक आईजीएमसी में लैप्रोस्कोपी के माध्यम से अधिकतम 50 प्रतिशत पेट निकालने की सर्जरी की गई थी। पहली बार 90 प्रतिशत पेट हटाने जैसी जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है, जो चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
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आइजीएमसी के एमएस डॉ राहुल राव ने कहा कि इंदिरा गाँधी मैडिकल कॉलेज शिमला में सर्जरी विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यहां पेट के कैंसर के लिये पहली बार पूर्ण रूप से लैप्रोस्कोपी नियर टोटल गैस्ट्रैक्टॉमी सफलतापूर्वक की गई है। यह ऑपरेशन शिमला की 44 वर्षीय महिला मरीज का 2 फरवरी 2026 को किया गया।
यह उपलब्धि आई०जी०एम०सी० के इतिहास में एक मील का पत्थर है। इस तरह की जटिल सर्जरी आमतौर पर बडे निजी अस्पतालों में की जाती है। उत्तर भारत में सरकारी अस्पताल में की गई यह पहली सर्जरी है। यह ऑपरेशन युनिट विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ० वेद शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया है।
इस तरह की जटिल शल्य चिकित्सा सफलता के संबंध में यह भी सहर्ष सूचित किया जाता है कि उक्त जटिल सर्जरी आई०जी०एम०सी० चिकित्सा संस्थान में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा मशीनों व उपकरणों के नवीनीकरण अथवा नये व एडवांस सैटअप के फलस्वरूप इस तरह के सफल ऑपरेशन संभव हो पा रहे है, जो कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह "सुक्खु" हिमाचल प्रदेश सरकार की दूरदर्शी सोच व चिकित्सा संस्थानों के प्रति आधुनिक मशीनों के लिये किये जा रहे प्रयासों के फलस्वरूप ही संभव हो पाया है।
डॉ० विपन के शर्मा, सहायक प्रोफेसर सर्जिकल गैस्ट्रोएंटोलॉजी ने कहा कि 44 वर्षीय पेट के कैंसर से ग्रसित मरीज का ऑपरेशन कर 90 प्रतिशत पेट का हिस्सा लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से निकालकर उसका पुनर्निर्माण किया। लगभग छह घंटे तक चली यह सर्जरी सफल रही और मरीज की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।उन्होंने कहा कि मरीज पिछले कई महीनों से पेट दर्द, लगातार वजन घटने और खाने में परेशानी जैसी समस्याओं से परेशान था।
विस्तृत जांच के बाद उसमें उन्नत अवस्था के गैस्ट्रिक कैंसर की पुष्टि हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों, एनेस्थीसिया टीम और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की संयुक्त टीम बनाई गई। पूरी रणनीति और सावधानी के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
यूनिट हैड डॉ वैद शर्मा ने बताया कि लैप्रोस्कोपिक तकनीक से इतने बड़े हिस्से की सर्जरी करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। इस विधि में छोटे-छोटे चीरे लगाकर ऑपरेशन किया जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है, दर्द कम रहता है और मरीज जल्दी स्वस्थ होता है।
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