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शिमला , 07 फरवरी [ विशाल सूद ] ! कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने संभावित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि उत्पादों पर शून्य या न्यूनतम आयात शुल्क की चर्चाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि इस तरह के किसी भी निर्णय का सीधा असर देश के करोड़ों किसानों, बागवानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि बिना पारदर्शिता और व्यापक विमर्श के कृषि क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के हवाले किया गया, तो इसका खामियाज़ा भारतीय किसान को चुकाना पड़ेगा। कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि अमेरिका जैसे विकसित देश में कृषि पूरी तरह से भारी सब्सिडी, आधुनिक तकनीक और कॉरपोरेट नियंत्रण पर आधारित है, जबकि भारत की खेती आज भी छोटे और सीमांत किसानों के सहारे खड़ी है। ऐसे में विदेशी कृषि उत्पादों को शून्य शुल्क पर भारतीय बाज़ार में प्रवेश देना असमान प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा और घरेलू किसानों को सीधे नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी अनाज, दालें, तिलहन, फल-सब्ज़ियां और डेयरी उत्पाद कम या बिना शुल्क के भारत में आए, तो इससे स्थानीय बाजार में कीमतें गिरेंगी, किसानों की आय और घटेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से मौजूद आर्थिक संकट और गहराएगा। विशेष रूप से डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी तरह की ढील देश के लाखों पशुपालकों के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक न तो इस कथित व्यापार समझौते का कोई आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक किया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि किन-किन कृषि उत्पादों को इसके दायरे में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर अमेरिकी प्रशासन अपने किसानों को इस सौदे से होने वाले लाभों का भरोसा दिला रहा है, वहीं भारत सरकार अपने ही किसानों को अंधेरे में रखकर चुप्पी साधे हुए है। कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि लोकतंत्र में नीतिगत फैसले बंद कमरों में नहीं लिए जाते। ऐसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले संसद में चर्चा, राज्यों से परामर्श और किसान संगठनों की भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए। लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि कृषि और ग्रामीण भारत को केवल सौदेबाज़ी का माध्यम बनाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की और किसानों के हितों की रक्षा के लिए ठोस रुख नहीं अपनाया, तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार और सामाजिक स्थिरता पर देखने को मिलेंगे। कांग्रेस इस मुद्दे पर किसानों के साथ खड़ी है और किसी भी ऐसे फैसले का विरोध करेगी जो भारतीय कृषि को कमजोर करने वाला हो।
शिमला , 07 फरवरी [ विशाल सूद ] ! कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने संभावित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि उत्पादों पर शून्य या न्यूनतम आयात शुल्क की चर्चाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि इस तरह के किसी भी निर्णय का सीधा असर देश के करोड़ों किसानों, बागवानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि यदि बिना पारदर्शिता और व्यापक विमर्श के कृषि क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के हवाले किया गया, तो इसका खामियाज़ा भारतीय किसान को चुकाना पड़ेगा। कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि अमेरिका जैसे विकसित देश में कृषि पूरी तरह से भारी सब्सिडी, आधुनिक तकनीक और कॉरपोरेट नियंत्रण पर आधारित है, जबकि भारत की खेती आज भी छोटे और सीमांत किसानों के सहारे खड़ी है। ऐसे में विदेशी कृषि उत्पादों को शून्य शुल्क पर भारतीय बाज़ार में प्रवेश देना असमान प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा और घरेलू किसानों को सीधे नुकसान पहुंचाएगा।
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उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी अनाज, दालें, तिलहन, फल-सब्ज़ियां और डेयरी उत्पाद कम या बिना शुल्क के भारत में आए, तो इससे स्थानीय बाजार में कीमतें गिरेंगी, किसानों की आय और घटेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से मौजूद आर्थिक संकट और गहराएगा। विशेष रूप से डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी तरह की ढील देश के लाखों पशुपालकों के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक न तो इस कथित व्यापार समझौते का कोई आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक किया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि किन-किन कृषि उत्पादों को इसके दायरे में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर अमेरिकी प्रशासन अपने किसानों को इस सौदे से होने वाले लाभों का भरोसा दिला रहा है, वहीं भारत सरकार अपने ही किसानों को अंधेरे में रखकर चुप्पी साधे हुए है।
कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि लोकतंत्र में नीतिगत फैसले बंद कमरों में नहीं लिए जाते। ऐसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले संसद में चर्चा, राज्यों से परामर्श और किसान संगठनों की भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए। लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि कृषि और ग्रामीण भारत को केवल सौदेबाज़ी का माध्यम बनाकर पेश किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की और किसानों के हितों की रक्षा के लिए ठोस रुख नहीं अपनाया, तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार और सामाजिक स्थिरता पर देखने को मिलेंगे। कांग्रेस इस मुद्दे पर किसानों के साथ खड़ी है और किसी भी ऐसे फैसले का विरोध करेगी जो भारतीय कृषि को कमजोर करने वाला हो।
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