जनता सरकार की विफलताओं की सज़ा क्यों भुगते, वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश का पक्ष रखने में पूरी नाकामी
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धर्मशाला , 07 फरवरी [ विशाल सूद ] ! धर्मशाला के विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने प्रदेश की वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज हिमाचल प्रदेश जिन आर्थिक और प्रशासनिक संकटों से गुजर रहा है, उसके लिए सीधे तौर पर सरकार के गलत फैसले और लापरवाह कार्यप्रणाली जिम्मेदार है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रदेश की जनता सरकार की गलतियों की सज़ा क्यों भुगते। सुधीर शर्मा ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वित्त आयोग जैसे संवैधानिक मंच के सामने प्रदेश का पक्ष मजबूती से रखने में सरकार पूरी तरह विफल रही। उन्होंने पूछा कि हिमाचल के हितों की पैरवी करने की जिम्मेदारी किसकी थी और वह जिम्मेदारी निभाने में कौन असफल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत और भ्रामक आंकड़े भेजकर प्रदेश की वास्तविक स्थिति को कमजोर रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसका खामियाजा आज आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) से जुड़ा निर्णय केवल हिमाचल तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए नीतिगत फैसला है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने भी इस निर्णय का स्वागत किया, लेकिन हिमाचल सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है और जनता को गुमराह कर रही है। पूर्व मंत्री ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने अपनी रिपोर्ट में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय वास्तविकता से अधिक दिखाई, जिससे कागजों में आर्थिक स्थिति बेहतर दर्शाई गई। साथ ही बीपीएल सूची से लाखों पात्र लोगों के नाम काटे गए, जिसका सीधा असर केंद्रीय सहायता और कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ा। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि प्रदेश को अपेक्षित सहायता नहीं मिल पाई और गरीब व मध्यम वर्ग प्रभावित हुआ। सुधीर शर्मा ने कहा कि मौजूदा प्रशासनिक ढांचे पर भरोसा करने के बजाय सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों को आगे कर गलत परंपरा शुरू की है। इससे कार्यरत अधिकारियों का मनोबल गिरा है और निर्णय प्रक्रिया भी कमजोर हुई है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब सक्षम अधिकारी मौजूद हैं तो रिटायर्ड अधिकारियों पर निर्भरता क्यों दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज “2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल” के दावे कर रहे हैं, वही प्रदेश को इस स्थिति तक लाने के जिम्मेदार हैं। आत्मनिर्भरता नारों और पोस्टरों से नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति, सही आंकड़ों और मजबूत इच्छाशक्ति से आती है। अंत में सुधीर शर्मा ने सरकार से मांग की कि वह अपने फैसलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे और प्रदेश की जनता के सामने एक स्पष्ट, विश्वसनीय और ईमानदार आर्थिक रोडमैप प्रस्तुत करे। उन्होंने कहा कि हिमाचल को आज आरोप नहीं, जवाब चाहिए — क्योंकि सत्ता विशेषाधिकार नहीं, जवाबदेही है।
धर्मशाला , 07 फरवरी [ विशाल सूद ] ! धर्मशाला के विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने प्रदेश की वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज हिमाचल प्रदेश जिन आर्थिक और प्रशासनिक संकटों से गुजर रहा है, उसके लिए सीधे तौर पर सरकार के गलत फैसले और लापरवाह कार्यप्रणाली जिम्मेदार है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रदेश की जनता सरकार की गलतियों की सज़ा क्यों भुगते।
सुधीर शर्मा ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वित्त आयोग जैसे संवैधानिक मंच के सामने प्रदेश का पक्ष मजबूती से रखने में सरकार पूरी तरह विफल रही। उन्होंने पूछा कि हिमाचल के हितों की पैरवी करने की जिम्मेदारी किसकी थी और वह जिम्मेदारी निभाने में कौन असफल रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत और भ्रामक आंकड़े भेजकर प्रदेश की वास्तविक स्थिति को कमजोर रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसका खामियाजा आज आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) से जुड़ा निर्णय केवल हिमाचल तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए नीतिगत फैसला है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने भी इस निर्णय का स्वागत किया, लेकिन हिमाचल सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है और जनता को गुमराह कर रही है।
पूर्व मंत्री ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने अपनी रिपोर्ट में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय वास्तविकता से अधिक दिखाई, जिससे कागजों में आर्थिक स्थिति बेहतर दर्शाई गई। साथ ही बीपीएल सूची से लाखों पात्र लोगों के नाम काटे गए, जिसका सीधा असर केंद्रीय सहायता और कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ा। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि प्रदेश को अपेक्षित सहायता नहीं मिल पाई और गरीब व मध्यम वर्ग प्रभावित हुआ।
सुधीर शर्मा ने कहा कि मौजूदा प्रशासनिक ढांचे पर भरोसा करने के बजाय सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों को आगे कर गलत परंपरा शुरू की है। इससे कार्यरत अधिकारियों का मनोबल गिरा है और निर्णय प्रक्रिया भी कमजोर हुई है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब सक्षम अधिकारी मौजूद हैं तो रिटायर्ड अधिकारियों पर निर्भरता क्यों दिखाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि जो लोग आज “2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल” के दावे कर रहे हैं, वही प्रदेश को इस स्थिति तक लाने के जिम्मेदार हैं। आत्मनिर्भरता नारों और पोस्टरों से नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति, सही आंकड़ों और मजबूत इच्छाशक्ति से आती है।
अंत में सुधीर शर्मा ने सरकार से मांग की कि वह अपने फैसलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे और प्रदेश की जनता के सामने एक स्पष्ट, विश्वसनीय और ईमानदार आर्थिक रोडमैप प्रस्तुत करे। उन्होंने कहा कि हिमाचल को आज आरोप नहीं, जवाब चाहिए — क्योंकि सत्ता विशेषाधिकार नहीं, जवाबदेही है।
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