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शिमला , 06 फरवरी [ विशाल सूद ] ! डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने आज राज्यसभा में नकली बीज कंपनियों के विरूद्ध कार्रवाई और दंड से संबंधित मामला उठाया। उन्होनें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री से पूछा कि नकली बीजों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई और दंड सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा क्या उपाय किये गये हैं तथा पारम्परिक बीज प्रणाली की सुरक्षा किस प्रकार की जायेगी। यह सुनिश्चित करने के लिए बाजार में केवल अधिकृत लोग ही काम कर सकें सभी बीज कंपनियों, डीलरों और पौधशालाओं के अनिवार्य पंजीकरण के लिए क्या मानदंड होंगे ? क्या आपातकालीन स्थितियों के दौरान मूल्य वृद्धि को रेाकने के लिए वाणिज्यिक या मुख्य बीजों के मूल्य को विनियमित करने के लिए कोई तंत्र होगा और छोटे किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले सस्ते बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सार्वजनिक क्षेत्र अनुसंधान को सुदृढ़ करने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं ? कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने बताया कि बीजों की गुणवत्ता को विनियमित करने और नकली बीजों की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 और बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 राज्य सरकारों को बीज की दुकानों का निरीक्षण करने, सैंपल लेने और लाइसेंस रद्द करने, स्टाॅक जब्त करने, बिक्री रोकने के आदेश जारी करने और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने सहित प्रवर्तन कार्रवाई के लिए बीज निरीक्षकों की नियुक्ति करने का अधिकार देते हैं। इसके अलावा, भारत सरकार ने सीड ऑथेंटिकेशन, ट्रेसेबिलिटी और हौलिस्टिक इन्वेंटरी (साथी) पोर्टल भी लाॅन्च किया ताकि आपूर्ति श्रृंखला में बीजों की एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित की जा सके, पारदर्शिता बढ़ाई जा सके और नकली/निम्न स्तर के बीजों के प्रचलन को रोकने में मदद मिल सके। केन्द्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि बीज व्यवसाय प्रचालित करने वाले किसी भी व्यक्ति, बीज कंपनी और फर्म को बीज (नियत्रंण) आदेश 1983 के खंड 3 के तहत संबंधित राज्य सरकार से बीज विक्रेता लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त बागवानी नर्सरियों का पंजीकरण और विनियम संबंधित राज्य द्वारा नर्सरी अधिनियमों के तहत किया जाता है। उन्होनें कहा कि भारत सरकार ने बीटी काॅटन हाइब्रिड बीजों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कपास बीज मूल्य (नियत्रंण) आदेश 2015 जारी किया है और बीटी काॅटन बीजों के अधिकतम विक्रय मूल्य प्रति वर्ष निर्धारित किए जाते हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा सार्वजनिक क्षेत्र को बीज संबंधी अनुसंधान गतिविधियों नामत अधिक उपज वाली, स्ट्रेस टाॅरलेंट एवं जलवायु अनुकूल बीजों तथा विभिन्न कृषि जलवायु परिस्थितियों के लिए अनुकूल बायो फोर्टिफाईड किस्मों के विकास, किसानो को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ बीज इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा किसानो को किफायती कीमतों पर बीज उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और सार्वजनिक क्षेत्र की कार्यान्वयन एजेंसियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत ब्रीडर सीड की खरीद, गुणवत्तापूर्ण बीजों के वितरण, बीज इन्फ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, कार्यनीतिक अनुकूल अनुसंधान परियोजना के लिए सहायता और नई अधिक उपज वाली किस्मों की मिनीकिट के निशुल्क वितरण सहित बीज संबंधी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इन उपायों से उत्पादकता बढ़ती है और खेती की लागत कम करने में मदद मिलती है।
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