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शिमला , 07 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के जनजातीय समाज के नैसर्गिक, संवैधानिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा तथा भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शनिवार को शिमला में एक ऐतिहासिक जनजातीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन हिमालय जनजातीय लोक अधिकार महासंघ के गठन एवं कार्यकारिणी सदस्यों के चयन को लेकर आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता देव भगत नेगी ने की। सम्मेलन को संबोधित करते हुए महासंघ के महा सचिव भगत सिंह किन्नर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र—किन्नौर, लाहौल-स्पीति तथा चंबा जिले के पांगी-भरमौर—हजारों वर्षों से अपनी विशिष्ट सभ्यता, संस्कृति, भाषा, धर्म और परंपराओं को संरक्षित करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन जनजातीय क्षेत्रों एवं श्रमजीवी समाज के योगदान के बिना हिमाचल प्रदेश की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान अधूरी है। भगत सिंह किन्नर ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बदलते समय में जनजातीय समाज के समक्ष अनेक गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। संविधान प्रदत्त अधिकारों, विशेषकर आरक्षण व्यवस्था के विरुद्ध फैलाया जा रहा दुष्प्रचार जनजातीय समाज के लिए चिंताजनक है। साथ ही सरकारी एवं गैर-सरकारी सेवा क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ हो रहा भेदभाव भी एक कड़वी सच्चाई बनता जा रहा है। सम्मेलन में जनजातीय समाज के प्राकृतिक संसाधनों की बाहरी पूंजीवादी शक्तियों से रक्षा, पारंपरिक पहचान के संरक्षण तथा संवैधानिक अधिकारों की सुनिश्चितता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। महासंघ ने प्रदेश के सभी जनजातीय सामाजिक, सांस्कृतिक, युवा एवं महिला संगठनों तथा प्रबुद्ध बुद्धिजीवी वर्ग से एकजुट होकर जनजातीय आंदोलन को और सशक्त बनाने का आह्वान किया। अंत में लाहौल-स्पीति एवं पांगी-भरमौर से शिमला पहुंचकर सम्मेलन को सफल बनाने वाले समस्त भाई-बहनों का आभार व्यक्त किया गया। नव चयनित कार्यकारिणी सदस्यों एवं पदाधिकारियों ने इसे जनजातीय समाज के अस्तित्व, स्वाभिमान और भयमुक्त भविष्य के नवजागरण का शंखनाद बताया। सम्मेलन में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, महा सचिव भगत सिंह किन्नर, सचिव चमन नेगी एवं बाबू राम नेगी, कोषाध्यक्ष वीर भद्र सिंह नेगी तथा कार्यकारिणी सदस्य सूर्य किरण नेगी, रमेश चंद्र और हरीश शर्मा को चुना गया। इसके अतिरिक्त संतोष कुमारी नेगी, वीरभद्र सिंह नेगी, सूर्य किरण नेगी, हरीश शर्मा, एस.सी. नेगी, किरण नेगी, सुरेंद्र कुमार नेगी, यशपाल सिंह नेगी, विवेकानंद नेगी एवं चंद्र नेगी, ने सक्रिय सहयोग के लिए अपनी सहमति जताई।
शिमला , 07 फरवरी [ विशाल सूद ] ! हिमाचल प्रदेश के जनजातीय समाज के नैसर्गिक, संवैधानिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा तथा भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शनिवार को शिमला में एक ऐतिहासिक जनजातीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन हिमालय जनजातीय लोक अधिकार महासंघ के गठन एवं कार्यकारिणी सदस्यों के चयन को लेकर आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता देव भगत नेगी ने की।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए महासंघ के महा सचिव भगत सिंह किन्नर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र—किन्नौर, लाहौल-स्पीति तथा चंबा जिले के पांगी-भरमौर—हजारों वर्षों से अपनी विशिष्ट सभ्यता, संस्कृति, भाषा, धर्म और परंपराओं को संरक्षित करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन जनजातीय क्षेत्रों एवं श्रमजीवी समाज के योगदान के बिना हिमाचल प्रदेश की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान अधूरी है।
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भगत सिंह किन्नर ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बदलते समय में जनजातीय समाज के समक्ष अनेक गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। संविधान प्रदत्त अधिकारों, विशेषकर आरक्षण व्यवस्था के विरुद्ध फैलाया जा रहा दुष्प्रचार जनजातीय समाज के लिए चिंताजनक है। साथ ही सरकारी एवं गैर-सरकारी सेवा क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ हो रहा भेदभाव भी एक कड़वी सच्चाई बनता जा रहा है।
सम्मेलन में जनजातीय समाज के प्राकृतिक संसाधनों की बाहरी पूंजीवादी शक्तियों से रक्षा, पारंपरिक पहचान के संरक्षण तथा संवैधानिक अधिकारों की सुनिश्चितता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। महासंघ ने प्रदेश के सभी जनजातीय सामाजिक, सांस्कृतिक, युवा एवं महिला संगठनों तथा प्रबुद्ध बुद्धिजीवी वर्ग से एकजुट होकर जनजातीय आंदोलन को और सशक्त बनाने का आह्वान किया।
अंत में लाहौल-स्पीति एवं पांगी-भरमौर से शिमला पहुंचकर सम्मेलन को सफल बनाने वाले समस्त भाई-बहनों का आभार व्यक्त किया गया। नव चयनित कार्यकारिणी सदस्यों एवं पदाधिकारियों ने इसे जनजातीय समाज के अस्तित्व, स्वाभिमान और भयमुक्त भविष्य के नवजागरण का शंखनाद बताया।
सम्मेलन में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, महा सचिव भगत सिंह किन्नर, सचिव चमन नेगी एवं बाबू राम नेगी, कोषाध्यक्ष वीर भद्र सिंह नेगी तथा कार्यकारिणी सदस्य सूर्य किरण नेगी, रमेश चंद्र और हरीश शर्मा को चुना गया। इसके अतिरिक्त संतोष कुमारी नेगी, वीरभद्र सिंह नेगी, सूर्य किरण नेगी, हरीश शर्मा, एस.सी. नेगी, किरण नेगी, सुरेंद्र कुमार नेगी, यशपाल सिंह नेगी, विवेकानंद नेगी एवं चंद्र नेगी, ने सक्रिय सहयोग के लिए अपनी सहमति जताई।
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