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चम्बा ! सामाजिक कार्यकर्ता एवं डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी मनीष सरीन ने चंबा को रेल संपर्क से जोड़ने को लेकर संसद में दिए गए हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सरीन ने डॉ. राजीव भारद्वाज को सीधे तौर पर घेरते हुए कहा कि बार-बार इस मुद्दे को उठाना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि क्षेत्र के वास्तविक विकास की दिशा से ध्यान भटकाने वाला भी है।सरीन ने अपने विस्तृत बयान में कहा कि चंबा जैसे दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्र में रेलवे लाइन बिछाना अत्यंत महंगा, तकनीकी रूप से जटिल और लंबी अवधि तक चलने वाला प्रोजेक्ट है। “ऐसे प्रोजेक्ट्स की लागत हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है और इसके पूरा होने में कई दशक लग सकते हैं। ऐसे में बार-बार इस मुद्दे को उठाना केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाता है,” उन्होंने कहा।उन्होंने सवाल उठाया कि जब क्षेत्र को आज, अभी और तुरंत बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता है, तब ऐसे प्रोजेक्ट्स पर जोर क्यों दिया जा रहा है जिनका लाभ आने वाली कई पीढ़ियों को भी शायद समय पर न मिल पाए। सरीन ने कहा कि “लोगों को जमीनी स्तर पर बदलाव चाहिए, न कि कागजों में चलने वाली योजनाएं।” सरीन ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब समय आ गया है कि डलहौजी और आसपास के क्षेत्रों के लिए एयरस्ट्रिप निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने इसे “व्यावहारिक, लागत के लिहाज से संतुलित और समयबद्ध समाधान” बताते हुए कहा कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो इस परियोजना को कुछ ही वर्षों में पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हवाई संपर्क स्थापित होने से डलहौजी–चंबा क्षेत्र में पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। “डलहौजी, खज्जियार और चंबा जैसे पर्यटन स्थलों तक तेज और सुविधाजनक पहुंच बनने से देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है,” सरीन ने कहा। सरीन ने अपने बयान में मेडिकल ट्रांसपोर्टेशन के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच एक बड़ी चुनौती है। “आपातकालीन स्थितियों में कई बार मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनकी जान पर बन आती है। अगर एयरस्ट्रिप और हवाई सुविधा उपलब्ध हो, तो गंभीर मरीजों को तुरंत बड़े अस्पतालों तक पहुंचाया जा सकता है, जो जीवन रक्षक साबित होगा,” उन्होंने कहा। रेल परियोजना पर तीखा प्रहार करते हुए सरीन ने कहा कि आज के समय में लोग धीमी और लंबी यात्रा करने वाले साधनों को प्राथमिकता नहीं देते। “कोई भी व्यक्ति घंटों तक पहाड़ी रास्तों से गुजरती धीमी ट्रेन में बैठना पसंद नहीं करेगा, जब उसके पास तेज और सुविधाजनक विकल्प मौजूद हों। आज के दौर में एयर ट्रैवल ही सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला माध्यम बन चुका है,” उन्होंने जोड़ा।सरीन ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को पहले भी कई बार राज्य सरकार, केंद्र सरकार और स्वयं सांसद डॉ. भारद्वाज के समक्ष उठाया है, लेकिन इस दिशा में अब तक ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि “व्यावहारिक समाधान होने के बावजूद उन पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि वास्तव में डलहौजी–चंबा क्षेत्र को पिछड़ेपन से बाहर निकालना है, तो कनेक्टिविटी को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। “एयरस्ट्रिप इस क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यह न केवल समय बचाएगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी,” उन्होंने कहा।अंत में सरीन ने नीति-निर्माताओं से अपील करते हुए कहा कि वे “दशकों तक खिंचने वाली अव्यावहारिक परियोजनाओं” से आगे बढ़कर ऐसे फैसले लें जो कम समय में धरातल पर उतरें और सीधे तौर पर जनता को लाभ पहुंचाएं। “क्षेत्र को वायदों की नहीं, बल्कि निर्णायक और दूरदर्शी फैसलों की जरूरत है ।
चम्बा ! सामाजिक कार्यकर्ता एवं डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी मनीष सरीन ने चंबा को रेल संपर्क से जोड़ने को लेकर संसद में दिए गए हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सरीन ने डॉ. राजीव भारद्वाज को सीधे तौर पर घेरते हुए कहा कि बार-बार इस मुद्दे को उठाना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि क्षेत्र के वास्तविक विकास की दिशा से ध्यान भटकाने वाला भी है।सरीन ने अपने विस्तृत बयान में कहा कि चंबा जैसे दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्र में रेलवे लाइन बिछाना अत्यंत महंगा, तकनीकी रूप से जटिल और लंबी अवधि तक चलने वाला प्रोजेक्ट है। “ऐसे प्रोजेक्ट्स की लागत हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है और इसके पूरा होने में कई दशक लग सकते हैं। ऐसे में बार-बार इस मुद्दे को उठाना केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाता है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब क्षेत्र को आज, अभी और तुरंत बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता है, तब ऐसे प्रोजेक्ट्स पर जोर क्यों दिया जा रहा है जिनका लाभ आने वाली कई पीढ़ियों को भी शायद समय पर न मिल पाए। सरीन ने कहा कि “लोगों को जमीनी स्तर पर बदलाव चाहिए, न कि कागजों में चलने वाली योजनाएं।”
सरीन ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब समय आ गया है कि डलहौजी और आसपास के क्षेत्रों के लिए एयरस्ट्रिप निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने इसे “व्यावहारिक, लागत के लिहाज से संतुलित और समयबद्ध समाधान” बताते हुए कहा कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो इस परियोजना को कुछ ही वर्षों में पूरा किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि हवाई संपर्क स्थापित होने से डलहौजी–चंबा क्षेत्र में पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। “डलहौजी, खज्जियार और चंबा जैसे पर्यटन स्थलों तक तेज और सुविधाजनक पहुंच बनने से देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है,” सरीन ने कहा।
सरीन ने अपने बयान में मेडिकल ट्रांसपोर्टेशन के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच एक बड़ी चुनौती है। “आपातकालीन स्थितियों में कई बार मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनकी जान पर बन आती है। अगर एयरस्ट्रिप और हवाई सुविधा उपलब्ध हो, तो गंभीर मरीजों को तुरंत बड़े अस्पतालों तक पहुंचाया जा सकता है, जो जीवन रक्षक साबित होगा,” उन्होंने कहा। रेल परियोजना पर तीखा प्रहार करते हुए सरीन ने कहा कि आज के समय में लोग धीमी और लंबी यात्रा करने वाले साधनों को प्राथमिकता नहीं देते। “कोई भी व्यक्ति घंटों तक पहाड़ी रास्तों से गुजरती धीमी ट्रेन में बैठना पसंद नहीं करेगा, जब उसके पास तेज और सुविधाजनक विकल्प मौजूद हों। आज के दौर में एयर ट्रैवल ही सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला माध्यम बन चुका है,” उन्होंने जोड़ा।सरीन ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को पहले भी कई बार राज्य सरकार, केंद्र सरकार और स्वयं सांसद डॉ. भारद्वाज के समक्ष उठाया है, लेकिन इस दिशा में अब तक ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि “व्यावहारिक समाधान होने के बावजूद उन पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि वास्तव में डलहौजी–चंबा क्षेत्र को पिछड़ेपन से बाहर निकालना है, तो कनेक्टिविटी को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। “एयरस्ट्रिप इस क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यह न केवल समय बचाएगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी,” उन्होंने कहा।अंत में सरीन ने नीति-निर्माताओं से अपील करते हुए कहा कि वे “दशकों तक खिंचने वाली अव्यावहारिक परियोजनाओं” से आगे बढ़कर ऐसे फैसले लें जो कम समय में धरातल पर उतरें और सीधे तौर पर जनता को लाभ पहुंचाएं। “क्षेत्र को वायदों की नहीं, बल्कि निर्णायक और दूरदर्शी फैसलों की जरूरत है ।
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