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चम्बा , 18 दिसंबर [ शिवानी ] !हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में मंडी में अपने तीन वर्ष पूरे होने पर विकास की उपलब्धियों के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत चम्बा जिला के चुराह विधानसभा क्षेत्र की जुनास पंचायत के सुईला गांव में आज भी सवालों के घेरे में है। सड़क सुविधा से वंचित इन ग्रामीण लोगों का कहना है कि सरकार उनके गांव सुईला तक सड़क नहीं पहुंचती है गांव के सभी सैकड़ों लोग आने वाले पंचायत,चुनाव विधानसभा चुनाव के साथ लोकसभा का सीधे सीधे धमकी दे डाली है कि “रोड नहीं तो वोट नहीं” हम चुनावों का वहिष्कार करेंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। आज़ादी के सात दशक बाद भी सुईला गांव सहित लदेरू, लुटियास, सुखडू और पलनोटी जैसे आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण सड़क सुविधा से पूरी तरह वंचित हैं। विकास की मुख्यधारा से कटे इन गांवों में आज भी जीवन बेहद संघर्षपूर्ण बना हुआ है। सुईला गांव के ग्रामीण लोगों का कहना है कि सड़क न होने का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। गांव में यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए, तो उसे पीठ पर उठाकर या पालकी के सहारे कई किलोमीटर लंबे दुर्गम पहाड़ी रास्तों से मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। हालांकि गांव के इन ग्रामीणों लोगों ने अपनी जेब से एक स्ट्रेचर तक खरीद रखा है, लेकिन इलाज तक पहुंचने से पहले ही कई लोगों की रास्ते में मौत हो चुकी है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह सफर कई बार जानलेवा साबित हुआ है। इन लोगों ने बताया कि सुईला गांव में केवल प्राथमिक विद्यालय की सुविधा है। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। लौटते समय अक्सर अंधेरा हो जाता है और जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण गांव की अधिकांश बच्चियां दसवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं, जिससे उनके भविष्य पर भी संकट खड़ा हो गया है। सुईला गांव भारी बर्फबारी वाला क्षेत्र है। सर्दियों में बर्फ पड़ते ही यह इलाका कई महीनों तक पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट जाता है। न स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच पाती हैं और न ही प्रशासनिक मदद। ग्रामीणों का कहना है कि बर्फबारी के दौरान उनका जीवन पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहा होता है। सरकार और उनके इलाके के नेताओं के द्वारा दिए गए झूठे आश्वासन और लगातार हो रही अनदेखी से नाराज़ होकर सुईला गांव और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीणों ने बैठक कर हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है और साफ शब्दों में निर्णय के साथ चेतावनी भी दे डाली है कि यदि जल्द से सड़क निर्माण नहीं किया गया, तो वे पंचायत, विधानसभा और लोकसभा समेत सभी चुनावों का सैकड़ों ग्रामीण बहिष्कार करेंगे।इस बीच आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देवो देवी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के लिए तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। बर्फबारी के दौरान कई महिलाएं टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं से पूरी तरह वंचित रह जाती हैं। स्कूली छात्रों का कहना है कि स्कूल तक पहुंचने का रास्ता बेहद लंबा और खतरनाक है। वाहन सुविधा न होने के कारण उन्हें रोजाना जान जोखिम में डालकर पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सुईला गांव को शीघ्र सड़क मार्ग से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी उनकी आवाज़ नहीं सुनी गई, तो वे अपने आंदोलन को और तेज़ करेंगे।
चम्बा , 18 दिसंबर [ शिवानी ] !हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में मंडी में अपने तीन वर्ष पूरे होने पर विकास की उपलब्धियों के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत चम्बा जिला के चुराह विधानसभा क्षेत्र की जुनास पंचायत के सुईला गांव में आज भी सवालों के घेरे में है।
सड़क सुविधा से वंचित इन ग्रामीण लोगों का कहना है कि सरकार उनके गांव सुईला तक सड़क नहीं पहुंचती है गांव के सभी सैकड़ों लोग आने वाले पंचायत,चुनाव विधानसभा चुनाव के साथ लोकसभा का सीधे सीधे धमकी दे डाली है कि “रोड नहीं तो वोट नहीं” हम चुनावों का वहिष्कार करेंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
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आज़ादी के सात दशक बाद भी सुईला गांव सहित लदेरू, लुटियास, सुखडू और पलनोटी जैसे आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण सड़क सुविधा से पूरी तरह वंचित हैं। विकास की मुख्यधारा से कटे इन गांवों में आज भी जीवन बेहद संघर्षपूर्ण बना हुआ है। सुईला गांव के ग्रामीण लोगों का कहना है कि सड़क न होने का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
गांव में यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए, तो उसे पीठ पर उठाकर या पालकी के सहारे कई किलोमीटर लंबे दुर्गम पहाड़ी रास्तों से मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। हालांकि गांव के इन ग्रामीणों लोगों ने अपनी जेब से एक स्ट्रेचर तक खरीद रखा है, लेकिन इलाज तक पहुंचने से पहले ही कई लोगों की रास्ते में मौत हो चुकी है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह सफर कई बार जानलेवा साबित हुआ है।
इन लोगों ने बताया कि सुईला गांव में केवल प्राथमिक विद्यालय की सुविधा है। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। लौटते समय अक्सर अंधेरा हो जाता है और जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण गांव की अधिकांश बच्चियां दसवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं, जिससे उनके भविष्य पर भी संकट खड़ा हो गया है।
सुईला गांव भारी बर्फबारी वाला क्षेत्र है। सर्दियों में बर्फ पड़ते ही यह इलाका कई महीनों तक पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट जाता है। न स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच पाती हैं और न ही प्रशासनिक मदद।
ग्रामीणों का कहना है कि बर्फबारी के दौरान उनका जीवन पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहा होता है। सरकार और उनके इलाके के नेताओं के द्वारा दिए गए झूठे आश्वासन और लगातार हो रही अनदेखी से नाराज़ होकर सुईला गांव और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीणों ने बैठक कर हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है और साफ शब्दों में निर्णय के साथ चेतावनी भी दे डाली है कि यदि जल्द से सड़क निर्माण नहीं किया गया, तो वे पंचायत, विधानसभा और लोकसभा समेत सभी चुनावों का सैकड़ों ग्रामीण बहिष्कार करेंगे।
इस बीच आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देवो देवी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के लिए तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। बर्फबारी के दौरान कई महिलाएं टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं से पूरी तरह वंचित रह जाती हैं।
स्कूली छात्रों का कहना है कि स्कूल तक पहुंचने का रास्ता बेहद लंबा और खतरनाक है। वाहन सुविधा न होने के कारण उन्हें रोजाना जान जोखिम में डालकर पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सुईला गांव को शीघ्र सड़क मार्ग से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी उनकी आवाज़ नहीं सुनी गई, तो वे अपने आंदोलन को और तेज़ करेंगे।
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