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शिमला , 19 जनवरी [ विशाल सूद ] ! केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीपीआरआई), शिमला में आज “आलू की वैज्ञानिक खेती” विषय पर पांच दिवसीय छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण 19 से 23 जनवरी, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य छात्रों को आधुनिक आलू उत्पादन तकनीकों की व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना है। इस कार्यक्रम में सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी और विज्ञान विश्वविद्यालय, प्रयागराज, यूपी के पच्चीस स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र की शुरुआत डॉ. आलोक कुमार, प्रमुख, सामाजिक विज्ञान प्रभाग द्वारा स्वागत उद्बोधन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करने के साथ हुई। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर आलू उत्पादन की उत्पादकता, लाभप्रदता और स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अनुसंधान और खेत स्तर के अनुप्रयोग के बीच सेतु बताया। मुख्य अतिथि, डॉ. बृजेश सिंह, निदेशक, ICAR-CPRI, शिमला ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने भारत में एक प्रमुख खाद्य और नकदी फसल के रूप में आलू के महत्व को रेखांकित किया और जलवायु परिवर्तन, कीटों, बीमारियों और बाजार प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. सिंह ने छात्रों को प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान में उपलब्ध वैज्ञानिक ज्ञान और संस्थागत विशेषज्ञता का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिक आलू की खेती के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाएगा, जिसमें उन्नत किस्में, बीज उत्पादन, फसल प्रबंधन प्रथाएं और हालिया तकनीकी प्रगति शामिल हैं, जिसका उद्देश्य कृषि और बागवानी क्षेत्रों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करना है। कार्यक्रम का समापन डॉ. दलामु, वरिष्ठ वैज्ञानिक, ICAR-CPRI, शिमला द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके समर्थन और सहयोग के लिए गणमान्य व्यक्तियों, प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस सत्र में डॉ. प्यनबियांगलांग, डॉ जगदेव शर्मा, डॉ सोम दत्त, डॉ विनय सागर, डॉ तनुजा, डॉ हेमंत, डॉ अविनाश, डॉ अनिल चौधरी, डॉ योगेश और डॉ कैलाश नागा ने भाग लिया।
शिमला , 19 जनवरी [ विशाल सूद ] ! केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीपीआरआई), शिमला में आज “आलू की वैज्ञानिक खेती” विषय पर पांच दिवसीय छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण 19 से 23 जनवरी, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य छात्रों को आधुनिक आलू उत्पादन तकनीकों की व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना है। इस कार्यक्रम में सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी और विज्ञान विश्वविद्यालय, प्रयागराज, यूपी के पच्चीस स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत डॉ. आलोक कुमार, प्रमुख, सामाजिक विज्ञान प्रभाग द्वारा स्वागत उद्बोधन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करने के साथ हुई। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर आलू उत्पादन की उत्पादकता, लाभप्रदता और स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अनुसंधान और खेत स्तर के अनुप्रयोग के बीच सेतु बताया।
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मुख्य अतिथि, डॉ. बृजेश सिंह, निदेशक, ICAR-CPRI, शिमला ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने भारत में एक प्रमुख खाद्य और नकदी फसल के रूप में आलू के महत्व को रेखांकित किया और जलवायु परिवर्तन, कीटों, बीमारियों और बाजार प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. सिंह ने छात्रों को प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान में उपलब्ध वैज्ञानिक ज्ञान और संस्थागत विशेषज्ञता का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिक आलू की खेती के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाएगा, जिसमें उन्नत किस्में, बीज उत्पादन, फसल प्रबंधन प्रथाएं और हालिया तकनीकी प्रगति शामिल हैं, जिसका उद्देश्य कृषि और बागवानी क्षेत्रों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करना है।
कार्यक्रम का समापन डॉ. दलामु, वरिष्ठ वैज्ञानिक, ICAR-CPRI, शिमला द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके समर्थन और सहयोग के लिए गणमान्य व्यक्तियों, प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस सत्र में डॉ. प्यनबियांगलांग, डॉ जगदेव शर्मा, डॉ सोम दत्त, डॉ विनय सागर, डॉ तनुजा, डॉ हेमंत, डॉ अविनाश, डॉ अनिल चौधरी, डॉ योगेश और डॉ कैलाश नागा ने भाग लिया।
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