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हमीरपुर , 16 जनवरी [ बिंदिया ठाकुर ] ! आज सुजानपुर में हुआ कार्यक्रम अपने आप में ऐतिहासिक रहा। बाहर से बड़ी-बड़ी हस्तियां आईं, हिमाचल के राज्यपाल पहुंचे, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मौजूद रहे, कई विधायक और नेता मंच पर दिखे — यानी आयोजन पूरी तरह से हाई-प्रोफाइल रहा। लेकिन इसी भरे मंच पर तीन नामों की गैरमौजूदगी सबसे ज़्यादा चर्चा में रही — पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, हमीरपुर के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर और भाजपा के मजबूत चेहरे परमार ठाकुर। क्योंकि कार्यक्रम से पहले पूरे इलाके में यह दावा किया जा रहा था कि ये तीनों नेता जरूर आएंगे। पोस्टर, सोशल मीडिया और बातचीत में इनके आने की हवा बनाई गई, लेकिन कार्यक्रम में ये कहीं नजर नहीं आए। यही वजह है कि कार्यक्रम खत्म होते ही लोगों में एक ही सवाल गूंजता रहा — जब इतने बड़े नेता आ सकते हैं तो धूमल और अनुराग क्यों नहीं?राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह केवल व्यस्तता का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे सियासी संदेश छिपा हो सकता है। धूमल परिवार को हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की रीढ़ माना जाता है। अनुराग ठाकुर आज भी इस क्षेत्र का सबसे बड़ा चेहरा हैं। ऐसे में उनके बिना सुजानपुर में कोई बड़ा राजनीतिक या सामाजिक मंच सजना अपने आप में कई संकेत दे जाता है। खास बात यह भी रही कि पिछले कार्यक्रमों में सक्रिय रहे विपिन परमार ठाकुर भी इस बार मंच से दूर दिखे। इससे यह चर्चा और तेज हो गई कि क्या भाजपा के भीतर कुछ ठीक नहीं चल रहा? कार्यक्रम भले ही शानदार रहा हो, लेकिन धूमल–अनुराग की खाली कुर्सियों ने पूरे आयोजन पर राजनीतिक सवालों की लंबी छाया डाल दी है।
हमीरपुर , 16 जनवरी [ बिंदिया ठाकुर ] ! आज सुजानपुर में हुआ कार्यक्रम अपने आप में ऐतिहासिक रहा। बाहर से बड़ी-बड़ी हस्तियां आईं, हिमाचल के राज्यपाल पहुंचे, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मौजूद रहे, कई विधायक और नेता मंच पर दिखे — यानी आयोजन पूरी तरह से हाई-प्रोफाइल रहा।
लेकिन इसी भरे मंच पर तीन नामों की गैरमौजूदगी सबसे ज़्यादा चर्चा में रही — पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, हमीरपुर के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर और भाजपा के मजबूत चेहरे परमार ठाकुर। क्योंकि कार्यक्रम से पहले पूरे इलाके में यह दावा किया जा रहा था कि ये तीनों नेता जरूर आएंगे। पोस्टर, सोशल मीडिया और बातचीत में इनके आने की हवा बनाई गई, लेकिन कार्यक्रम में ये कहीं नजर नहीं आए।
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यही वजह है कि कार्यक्रम खत्म होते ही लोगों में एक ही सवाल गूंजता रहा — जब इतने बड़े नेता आ सकते हैं तो धूमल और अनुराग क्यों नहीं?राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह केवल व्यस्तता का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे सियासी संदेश छिपा हो सकता है। धूमल परिवार को हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की रीढ़ माना जाता है। अनुराग ठाकुर आज भी इस क्षेत्र का सबसे बड़ा चेहरा हैं।
ऐसे में उनके बिना सुजानपुर में कोई बड़ा राजनीतिक या सामाजिक मंच सजना अपने आप में कई संकेत दे जाता है। खास बात यह भी रही कि पिछले कार्यक्रमों में सक्रिय रहे विपिन परमार ठाकुर भी इस बार मंच से दूर दिखे। इससे यह चर्चा और तेज हो गई कि क्या भाजपा के भीतर कुछ ठीक नहीं चल रहा?
कार्यक्रम भले ही शानदार रहा हो, लेकिन धूमल–अनुराग की खाली कुर्सियों ने पूरे आयोजन पर राजनीतिक सवालों की लंबी छाया डाल दी है।
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