- विज्ञापन (Article Top Ad) -
शिमला , 30 जनवरी [ विशाल सूद ] ! भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के लोकल कमेटी मंडी द्वारा गांधी चौक में केंद्र सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया।इस दौरान मार्क्सवादी के लोकल कमेटी सचिव सुरेश सरवाल ने कहा कि भाजपा-नेतृत्व वाली केंद्र सरकार संसद में ‘विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी–जी राम जी, 2025’ बिल को संसद में पारित कर दिया है। इस विधेयक का नाम ही इसके असली इरादों को उजागर करता है। खोखले नारों की आड़ में मेहनतकश ग्रामीणों के संघर्ष से हासिल ‘काम के अधिकार’- मनरेगा को कमजोर करने की खतरनाक साज़िश रची जा रही है। यह बिल मांग-आधारित अधिकार को एक सरकारी योजना में बदलकर राज्यों पर वित्तीय बोझ डालता है। बजट कटौती, मजदूरी में देरी और प्रशासनिक बाधाओं के बाद यह सबसे बड़ा हमला है। मजदूर-विरोधी, कॉरपोरेट-परस्त इस कानून के खिलाफ सड़कों पर एकजुट संघर्ष किया जाएगा। क्योंकि यह देश के करोड़ ग्रामीणों को प्रभावित करने वाला कानून है इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से कमजोर हो जाएगी और ग्रामीण लोग बेरोजगारी की और अधिक मार झेलेंगे। केंद्र सरकार ने इस कानून के तहत अपनी जिम्मेवारी से भी पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। इस कानून के तहत केंद्र 60% हिस्सेदारी व राज्य को 40% हिस्सेदारी देनी होगी। जो की संभव नहीं है पहले ही मनरेगा की बजट में लगातार कटौती कर मनरेगा को कमजोर किया गया और वादे किए जा रहे हैं कि 125 दिन रोजगार दिया जाएगा। अभी सरकारी आंकड़े पिछले सालों की औसतन 45 दिन का ही रोजगार मनरेगा में दे पानी में कामयाब हो पाई हैं। इस तरह से यह कानून आने वाले दिनों में 45 दिन भी रोजगार नहीं दे पाएगा और करोड़ों लोग जिसमें अधिकतर महिलाएं बिना रोजगार के वंचित हो जाएगी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी इस कानून का पूर्ण रूप से विरोध करती है और केंद्र सरकार से इस कानून को जल्द से जल्द वापस लेने की मांग करती है नहीं तो आने वाले समय में आम जनता के साथ मिलकर इस आम जनता विरोधी कानून को खत्म करने के लिए मजबूत आंदोलन किया जाएगा। पार्टी इस मुद्दे पर पूरे देश में 30 जनवरी से 5 फरवरी तक आम जनता के पास जाते हुए जागरूकता अभियान करेगी और 12 फरवरी की मजदूर किसानों की हड़ताल में भी इन मुद्दों को पुख्ता से उठाया जाएगा।
शिमला , 30 जनवरी [ विशाल सूद ] ! भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के लोकल कमेटी मंडी द्वारा गांधी चौक में केंद्र सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया।इस दौरान मार्क्सवादी के लोकल कमेटी सचिव सुरेश सरवाल ने कहा कि भाजपा-नेतृत्व वाली केंद्र सरकार संसद में ‘विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी–जी राम जी, 2025’ बिल को संसद में पारित कर दिया है। इस विधेयक का नाम ही इसके असली इरादों को उजागर करता है।
खोखले नारों की आड़ में मेहनतकश ग्रामीणों के संघर्ष से हासिल ‘काम के अधिकार’- मनरेगा को कमजोर करने की खतरनाक साज़िश रची जा रही है। यह बिल मांग-आधारित अधिकार को एक सरकारी योजना में बदलकर राज्यों पर वित्तीय बोझ डालता है। बजट कटौती, मजदूरी में देरी और प्रशासनिक बाधाओं के बाद यह सबसे बड़ा हमला है।
- विज्ञापन (Article Inline Ad) -
मजदूर-विरोधी, कॉरपोरेट-परस्त इस कानून के खिलाफ सड़कों पर एकजुट संघर्ष किया जाएगा। क्योंकि यह देश के करोड़ ग्रामीणों को प्रभावित करने वाला कानून है इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से कमजोर हो जाएगी और ग्रामीण लोग बेरोजगारी की और अधिक मार झेलेंगे। केंद्र सरकार ने इस कानून के तहत अपनी जिम्मेवारी से भी पल्ला झाड़ने की कोशिश की है।
इस कानून के तहत केंद्र 60% हिस्सेदारी व राज्य को 40% हिस्सेदारी देनी होगी। जो की संभव नहीं है पहले ही मनरेगा की बजट में लगातार कटौती कर मनरेगा को कमजोर किया गया और वादे किए जा रहे हैं कि 125 दिन रोजगार दिया जाएगा। अभी सरकारी आंकड़े पिछले सालों की औसतन 45 दिन का ही रोजगार मनरेगा में दे पानी में कामयाब हो पाई हैं। इस तरह से यह कानून आने वाले दिनों में 45 दिन भी रोजगार नहीं दे पाएगा और करोड़ों लोग जिसमें अधिकतर महिलाएं बिना रोजगार के वंचित हो जाएगी।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी इस कानून का पूर्ण रूप से विरोध करती है और केंद्र सरकार से इस कानून को जल्द से जल्द वापस लेने की मांग करती है नहीं तो आने वाले समय में आम जनता के साथ मिलकर इस आम जनता विरोधी कानून को खत्म करने के लिए मजबूत आंदोलन किया जाएगा। पार्टी इस मुद्दे पर पूरे देश में 30 जनवरी से 5 फरवरी तक आम जनता के पास जाते हुए जागरूकता अभियान करेगी और 12 फरवरी की मजदूर किसानों की हड़ताल में भी इन मुद्दों को पुख्ता से उठाया जाएगा।
- विज्ञापन (Article Bottom Ad) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 1) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 2) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 3) -
- विज्ञापन (Sidebar Ad 4) -